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रांची में बड़ा आदेश: 100 किलो कचरा फेंकने वालों पर अब सख्त पहरा, क्या है नया SWM पोर्टल?

Ranchi | रांची नगर निगम ने शहर के बड़े होटलों, अपार्टमेंट्स, अस्पतालों और कमर्शियल सेंटर्स के लिए एक नया और बेहद सख्त आदेश जारी किया है। इसके तहत अब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों को ताक पर रखना भारी पड़ सकता है।

नगर निगम ने साफ कर दिया है कि तय मापदंडों में आने वाले सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों (BWG) को अब केंद्रीय SWM पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा। अगर ऐसा नहीं किया, तो निगम सीधे कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी में है।

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इस नए फैसले से राजधानी के सैकड़ों बड़े संस्थानों में हड़कंप मच गया है। आइए ग्राउंड जीरो से समझते हैं कि आखिर इस नए पोर्टल से क्या बदलने वाला है और निगम के निशाने पर कौन-कौन से लोग हैं।

किन संस्थानों को माना गया है ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’?

रांची नगर निगम के स्वास्थ्य और कचरा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के तहत तीन बड़े मापदंड तय किए गए हैं। इनमें से किसी भी एक श्रेणी में आने वाले संस्थान को ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ माना जाएगा:

  • एरिया का साइज: जिनका बिल्ट-अप एरिया 20,000 वर्गमीटर या उससे ज्यादा है।
  • पानी की खपत: जहां हर दिन 40,000 लीटर या उससे अधिक पानी की खपत होती है।
  • कचरे की मात्रा: जो संस्थान रोजाना 100 किलोग्राम या उससे ज्यादा ठोस कचरा पैदा करते हैं।

रांची के मेन रोड और लालपुर इलाके के कई बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और होटलों में इस आदेश के बाद बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कारोबारियों में इस बात को लेकर संशय है कि कचरे की सटीक माप और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया कितनी जटिल होगी।

SWM पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन क्यों है जरूरी?

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि शहर में रोजाना निकलने वाले सैकड़ों टन कचरे का सही से निस्तारण (Disposal) नहीं हो पा रहा था। अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के SWM पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होने से कचरे की हर एक गतिविधि पर लाइव नजर रखी जा सकती है।

इस पोर्टल के जरिए निम्नलिखित व्यवस्थाओं की निगरानी होगी:

  1. सोर्स सेग्रीगेशन: कचरा जहां पैदा हो रहा है, वहीं सूखा और गीला कचरा अलग किया जा रहा है या नहीं।
  2. वेस्ट प्रोसेसिंग: क्या बड़े संस्थान अपने स्तर पर गीले कचरे से खाद बनाने जैसी तकनीक अपना रहे हैं?
  3. पारदर्शिता: हर संस्थान को हर महीने अपने कचरे और उसके निष्पादन का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन देना होगा।

लापरवाही की तो सील हो सकते हैं परिसर

निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अब तक कई बड़े मॉल और अस्पताल अपना कचरा गुपचुप तरीके से सामान्य डंपिंग यार्ड या खाली प्लॉटों में फिंकवा देते थे। लेकिन अब SWM पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन न कराने वालों की लिस्ट सीधे ब्लैकलिस्ट में डाली जाएगी। शुरुआत में नोटिस दिया जाएगा, और बात नहीं बनने पर भारी जुर्माना लगाने और परिसर को सील करने तक की कार्रवाई हो सकती है।”

इस फैसले का आम जनता ने स्वागत किया है, लेकिन बड़े व्यावसायिक संगठनों ने मांग की है कि निगम को पहले इस पोर्टल को लेकर एक ओरिएंटेशन वर्कशॉप चलानी चाहिए ताकि तकनीकी बारीकियों को समझा जा सके।

आगे क्या होगा?

रांची नगर निगम अगले हफ्ते से शहर के सभी चिन्हित अपार्टमेंट्स, बड़े होटलों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को व्यक्तिगत नोटिस भेजना शुरू करेगा। इसके साथ ही, ग्राउंड लेवल पर जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया जा रहा है जो औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर यह जांचेंगी कि कौन सा संस्थान 100 किलो से ज्यादा कचरा पैदा कर रहा है और उसने रजिस्ट्रेशन कराया है या नहीं।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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