रांची | झारखंड की मिट्टी से निकले सितारों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी चमक बिखेरी है। दिल्ली में आयोजित एशियन चैंपियनशिप (6-11 अप्रैल 2026) में पदकों की झड़ी लगाने वाले जांबाज खिलाड़ियों ने आज रांची के जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री से मुलाकात की। यह मुलाकात महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि झारखंड के खेल भविष्य की एक नई इबारत लिखने की शुरुआत है।
झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. मधुकांत पाठक के नेतृत्व में पहुंचे इन चैम्पियंस का स्वागत करते हुए उपायुक्त ने जो कहा, वह हर उभरते खिलाड़ी के लिए प्रेरणा बन गया है।
जब DC ऑफिस पहुंचे ‘स्वर्ण पदक’ विजेता: उत्साह और गर्व का माहौल
रांची कलेक्ट्रेट में आज का माहौल आम दिनों से अलग था। जब दिनेश कुमार, रेशमा कुमारी और बसंती कुमारी पदक पहनकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स की नजरें इन युवाओं पर टिक गईं। डॉ. मधुकांत पाठक ने उपायुक्त को खिलाड़ियों के कड़े संघर्ष और दिल्ली में मिली ऐतिहासिक जीत के बारे में विस्तार से बताया।
मेडल टैली जिसने सबको चौंकाया:
- दिनेश कुमार: दो शानदार स्वर्ण पदक जीतकर चैंपियनशिप के ‘पोस्टर बॉय’ बने।
- बसंती कुमारी: अंडर-25 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर साबित किया कि झारखंड की बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
- रेशमा कुमारी: एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
DC मंजूनाथ भजंत्री का बड़ा बयान: “प्रशासन हर कदम पर आपके साथ”
खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने न केवल उन्हें बधाई दी, बल्कि उनके खेल कौशल की बारीकियों को भी समझा। उन्होंने कहा:
“झारखंड के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की पहचान बना रहे हैं। दिनेश, रेशमा और बसंती की यह जीत हजारों ग्रामीण युवाओं के लिए एक सपना सच होने जैसा है। जिला प्रशासन आपको हर संभव तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
उपायुक्त का यह आश्वासन महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों को उचित इंफ्रास्ट्रक्चर और डाइट के लिए संघर्ष करना पड़ता है। रांची DC का यह रुख संकेत देता है कि झारखंड अब ‘स्पोर्ट्स हब’ बनने की दिशा में गंभीर है।
भविष्य की राह: एशियन चैंपियनशिप से ओलंपिक तक का सफर
इन खिलाड़ियों की जीत इसलिए बड़ी है क्योंकि इन्होंने एशिया के सबसे दिग्गज प्रतियोगियों को धूल चटाई है। दिनेश कुमार के दो स्वर्ण पदक बताते हैं कि उनकी फॉर्म अभी अपने चरम पर है। वहीं बसंती कुमारी का अंडर-25 वर्ग में गोल्ड जीतना यह सुनिश्चित करता है कि झारखंड के पास लॉन्ग-टर्म टैलेंट पाइपलाइन तैयार है।
खेल जानकारों का मानना है कि यदि इन खिलाड़ियों को सही समय पर उच्च स्तरीय विदेशी प्रशिक्षण (Foreign Training) मिले, तो 2028 के ओलंपिक में झारखंड से मेडल पक्का है।
मुलाकात के बाद डॉ. मधुकांत पाठक ने बताया कि एसोसिएशन का अगला लक्ष्य इन खिलाड़ियों के लिए विशेष कैंप आयोजित करना है। सरकार और प्रशासन के तालमेल से अब इन विजेताओं के लिए बेहतर स्कॉलरशिप और किट की व्यवस्था की जाएगी।
झारखंड के इन हीरों ने अपनी चमक दिखा दी है, अब बारी सिस्टम की है कि वह इन्हें कोहिनूर की तरह तराशे।











