रांची | झारखंड की राजधानी रांची के ग्रामीण इलाकों में आज उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब डालसा (DALSA) की टीमें घर-घर दस्तक देने पहुँचीं। यह कोई सामान्य दौरा नहीं था, बल्कि एक ऐसा मिशन था जिसका लक्ष्य उन मासूमों को नई जिंदगी देना है जिनका कोई सहारा नहीं है। ‘साथी’ और ‘डॉन’ जैसे अभियानों के जरिए अब प्रशासन सीधे जमीन पर उतरकर नशा और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रहार कर रहा है।
1200 बच्चों की पहचान: ‘साथी’ बना बेसहारा बच्चों की ढाल
ईटकी प्रखंड के मल्टी पंचायत स्थित पोखरटोली, मोरो और मकुन्दा गांवों में आयोजित इस विधिक जागरूकता कार्यक्रम में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। डालसा के अनुसार, ‘साथी अभियान’ के तहत अब तक 1200 से ज्यादा ऐसे निराश्रित बच्चों की पहचान की जा चुकी है, जिनका कोई आश्रय नहीं था।
झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में चल रहे इस 90 दिवसीय अभियान का मकसद साफ है—कोई भी बच्चा सिस्टम की नजरों से ओझल न रहे। डालसा सचिव राकेश रौशन की देखरेख में पीएलवी (PLV) की टीमें अब उन बच्चों को शिक्षा और संरक्षण की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं।
नशे के ‘डॉन’ पर प्रहार: व्यापार किया या नशा बेचा तो खैर नहीं
कार्यक्रम के दौरान ‘डॉन’ (DON) स्कीम पर विशेष जोर दिया गया। पीएलवी शतीश कुमार ने ग्रामीणों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि नशीले पदार्थों का भंडारण, बिक्री या सेवन न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि कानून की नजर में एक गंभीर अपराध है।
“नशा सीधे मस्तिष्क पर वार करता है और परिवारों को उजाड़ देता है। कानून में इसके लिए बेहद कठोर सजा का प्रावधान है, और डालसा अब गांव-गांव जाकर लोगों को सचेत कर रहा है।”
सावधान! बाल विवाह में शामिल हुए तो जाना होगा जेल
सिर्फ नशा ही नहीं, डालसा ने बाल विवाह पर भी अपना रुख कड़ा कर लिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी कराना कानूनन जुर्म है।
- सबसे बड़ी चेतावनी: इस तरह की शादियों में शामिल होने वाले मेहमान और दोनों पक्षकार (माता-पिता/रिश्तेदार) भी अपराधी माने जाएंगे।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: मौके पर ‘मईंया सम्मान योजना’, वृद्धा और विधवा पेंशन जैसी जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई ताकि बिचौलियों का खेल खत्म हो सके।
कल लगेगी ‘अदालत’: मौके पर होगा मुकदमों का निपटारा
जागरूकता के साथ-साथ समाधान की भी तैयारी है। डालसा ने घोषणा की है कि 09 मई 2026 (कल) को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। अगर आपका कोई मामला लंबे समय से अटका है, तो कल उसका निपटारा आपसी सहमति से किया जा सकता है।
अगला कदम क्या?
डालसा की यह ‘डोर-टू-डोर’ मुहिम आने वाले दिनों में रांची के अन्य प्रखंडों में भी तेज होगी। प्रशासन का अगला कदम इन चिन्हित 1200 बच्चों को सरकारी शेल्टर होम और स्कूलों में दाखिला दिलाना है। यह रिपोर्ट साफ करती है कि अब विधिक सहायता केवल कोर्ट-कचहरी तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके दरवाजे तक पहुँच चुकी है।
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