31 साल बाद लौटा वो मंजर: फरवरी की ठंड में शुरू होगा रमजान, रोजेदारों को मिलेगी बड़ी राहत या बढ़ेगी चुनौती?

Subhash Shekhar
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Ramzan Kab se Shuru Hai | इबादत, सब्र और रूहानियत का पाक महीना ‘रमजान’ इस बार इतिहास दोहराने जा रहा है। करीब तीन दशक (31 साल) के लंबे इंतजार के बाद, मुस्लिम समुदाय के लिए यह पवित्र महीना फरवरी की गुलाबी ठंड के बीच दस्तक दे रहा है। खगोलीय गणनाओं और इस्लामी कैलेंडर के चक्र ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जो न केवल आस्था के लिहाज से बल्कि सेहत और सुहूलियत के नजरिए से भी बेहद खास मानी जा रही है।

चांद के दीदार के साथ ही 19 या 20 फरवरी 2026 से इस मुकद्दस महीने का आगाज हो जाएगा। 1995 के बाद यह पहला मौका है जब फरवरी के महीने में सहरी और इफ्तार की सदाएं गूंजेंगी। इस बदलाव का सीधा असर रोजेदारों की दिनचर्या और इबादत के वक्त पर पड़ने वाला है।

आखिर क्यों खास है 2026 का रमजान?

इस्लामी कैलेंडर (हिजरी सन) और अंग्रेजी कैलेंडर (ग्रेगोरियन) के बीच हर साल करीब 10 से 11 दिनों का अंतर होता है। यही वजह है कि रमजान का महीना हर मौसम का सफर तय करते हुए करीब 33 साल में अपना चक्र पूरा करता है।

विद्वानों के मुताबिक, पिछली बार 1995 में 1 फरवरी को रमजान शुरू हुआ था। अब 31 साल बाद 2026 में फिर से यह फरवरी के तीसरे हफ्ते में लौट रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रोजेदारों को भीषण गर्मी, उमस और प्यास की तपिश से बड़ी राहत मिलेगी।

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कम होगा वक्त, आसान होगा सफर: जानें सहरी और इफ्तार का गणित

फरवरी और मार्च के महीने में दिन की लंबाई जून-जुलाई के मुकाबले काफी कम होती है।

  • छोटा दिन: गर्मियों में रोजा अक्सर 14 से 15 घंटे का होता है, लेकिन इस बार यह अवधि घटकर करीब 12 से 13 घंटे रह सकती है।
  • ठंडा मौसम: प्यास की शिद्दत कम महसूस होगी, जिससे बुजुर्गों और बच्चों के लिए रोजा रखना आसान होगा।
  • सेहत पर असर: डॉक्टरों का मानना है कि कम तापमान में रोजा रखने से शरीर में ‘डिहाइड्रेशन’ का खतरा न्यूनतम रहता है।

मस्जिदों में तैयारियां और ‘शब-ए-बारात’ की दस्तक

रमजान से ठीक पहले 3 फरवरी को शब-ए-बारात मनाई जाएगी, जिसे ‘मुकद्दस रात’ कहा जाता है। इस दिन कब्रिस्तानों की सफाई और रोशनी का काम पूरा कर लिया गया है। वहीं, मस्जिदों में ‘तरावीह’ (विशेष नमाज) के लिए हाफिजों की नियुक्तियां शुरू हो चुकी हैं।

राजधानी दिल्ली से लेकर हैदराबाद और लखनऊ की गलियों में अभी से रौनक दिखने लगी है। बाजार खजूर, फेनी और इत्र की खुशबू से महकने लगे हैं। मौलाना अहमद अली खान रजवी कहते हैं, “रमजान की असल खूबसूरती संयम में है, लेकिन खुदा की रहमत देखिए कि इस बार उसने अपने बंदों के लिए मौसम को भी सादगी और सुकून भरा बना दिया है।”

2030 में बनेगा एक और दुर्लभ रिकॉर्ड

खगोलीय गणनाओं के अनुसार, आने वाले कुछ सालों में हम एक और अद्भुत घटना के साक्षी बनेंगे। वर्ष 2030 में दुनिया एक ही साल में दो बार रमजान देखेगी। पहला रमजान जनवरी में शुरू होगा और दूसरा दिसंबर के अंत में। ऐसी स्थिति करीब 33 साल के अंतराल पर ही बनती है।

📅 प्रमुख इस्लामी तारीखें (संभावित)

पर्व / घटनासंभावित तारीख
शब-ए-बारात3 फरवरी
पहला रोजा (रमजान)19/20 फरवरी
लैलतुल क़द्र17 मार्च
ईद-उल-फितर20/21 मार्च

आगे क्या?

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मौसम विभाग के अनुसार, फरवरी के अंत तक उत्तर भारत में हल्की ठंड बरकरार रहेगी। प्रशासन ने भी रमजान और ईद को देखते हुए बिजली सप्लाई और सफाई व्यवस्था को लेकर कमर कस ली है। अब बस इंतजार है उस ‘दूज के चांद’ का, जो दुनिया भर के करोड़ों लोगों के चेहरे पर इबादत की चमक लेकर आएगा।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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