Advertisement
Education

रांची में Physics Wallah के टीचर्स को देख सड़कों पर उतरे छात्र, आखिर बोर्ड परीक्षा खत्म होते ही क्यों मचा ऐसा हड़कंप?

रांची | झारखंड की राजधानी रांची की सड़कों पर आज जो नजारा दिखा, उसने नेटफ्लिक्स की चर्चित वेब सीरीज ‘Physics Wallah’ के उन भावुक दृश्यों की याद दिला दी, जहाँ गुरु और शिष्य का रिश्ता किताबों से ऊपर नजर आता है। टेंडर हार्ट्स स्कूल, बोगईचोली परीक्षा केंद्र के बाहर जैसे ही 10वीं बोर्ड की अंतिम घंटी बजी, वहां सन्नाटे की जगह भारी शोर और उत्साह ने ले ली। वजह थी—Physics Wallah (PW) के चहेते शिक्षक समृद्धि मैम और अनुराग सर की अचानक एंट्री।

यह कोई सामान्य विज़िट नहीं थी; यह उन लाखों छात्रों के मानसिक बोझ को हल्का करने की एक सोची-समझी कोशिश थी, जो महीनों से ‘रिजल्ट’ और ‘प्रतिस्पर्धा’ के दबाव में दबे हुए थे।

Advertisement

नेटफ्लिक्स वाली रील लाइफ अब रांची की सड़कों पर रीयल!

हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आई पीडब्लू की वेब सीरीज इन दिनों ट्रेंडिंग में है। उस सीरीज में दिखाया गया ‘इमोशन’ आज रांची के परीक्षा केंद्र के बाहर जीवंत हो उठा। जैसे ही छात्र गणित और विज्ञान के कठिन सवालों के जाल से बाहर निकले, उनके सामने अपने पसंदीदा मेंटर्स को देखकर उनकी आंखों में चमक आ गई। समृद्धि मैम (समृद्धि शर्मा) और अनुराग सर (अनुराग त्यागी) ने न केवल छात्रों का स्वागत किया, बल्कि उन्हें गले लगाकर यह अहसास कराया कि “तुम सिर्फ एक रोल नंबर नहीं हो।”

बोर्ड परीक्षा का अंत या नई आज़ादी का आगाज?

शिक्षकों ने छात्रों के बीच पहुंचकर जिस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया, वह थी—‘आजादी’

  • तनाव से मुक्ति: महीनों की अधूरी नींद और कोचिंग के चक्करों से ब्रेक।
  • नंबरों की दौड़ से बाहर: समृद्धि मैम ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षा महज एक पड़ाव है, मंजिल नहीं।
  • मेंटल हेल्थ पर फोकस: अनुराग सर ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और माता-पिता की अत्यधिक अपेक्षाओं के बोझ पर खुलकर चर्चा की।

“हम यहाँ यह सुनिश्चित करने आए हैं कि परीक्षा खत्म होने के बाद छात्र खुद को अकेला या खाली महसूस न करें। यह समय अपनी पसंद और जुनून (Passion) को तलाशने का है।” — समृद्धि मैम, Physics Wallah

क्यों जरूरी थी यह ‘सरप्राइज विजिट’?

आमतौर पर बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद छात्र एक अजीब से ‘वैक्यूम’ या खालीपन में चले जाते हैं। रांची के इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य छात्रों के उस मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक बोझ को कम करना था, जो अक्सर ‘टॉप’ करने की होड़ में पैदा होता है। पीडब्ल्यू के इस कदम को विशेषज्ञ ‘Human-First’ अप्रोच मान रहे हैं, जो एडटेक सेक्टर में केवल कोर्स बेचने के बजाय छात्र के कल्याण की बात करता है।

ग्राउंड रिपोर्ट: छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की। एक अभिभावक ने बताया, “हमें डर था कि परीक्षा के बाद बच्चा नर्वस होगा, लेकिन शिक्षकों को यहाँ देखकर वह सब भूलकर चहक रहा है।” छात्रों ने शिक्षकों के साथ सेल्फी ली, ऑटोग्राफ लिए और अपनी शैक्षणिक यात्रा के अनुभव साझा किए।

आगे क्या? सिस्टम और समाज के लिए बड़ा संदेश

रांची का यह वाकया केवल एक मुलाकात नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के लिए एक संदेश है। परीक्षाओं को ‘हौआ’ बनाने के बजाय उन्हें एक उत्सव की तरह कैसे मनाया जाए, यह आज की इस घटना ने साबित कर दिया। आने वाले दिनों में अन्य शहरों में भी पीडब्ल्यू के ऐसे ही ‘मेंटल वेलबीइंग’ सत्र देखे जा सकते हैं।

प्रशासन और शिक्षाविदों का मानना है कि यदि शिक्षक ग्राउंड पर उतरकर छात्रों के तनाव को साझा करें, तो छात्र आत्महत्या और डिप्रेशन जैसे मामलों में बड़ी गिरावट आ सकती है।

Related Stories & Ads

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment