टुसू परब से पूरे झारखंड में होगा पंचपरगनिया भाषा-संस्‍कृति का संरक्षण

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टुसू परब के जरिए पूरे झारखंड में होगा पंचपरगनिया भाषा-संस्‍कृति का संरक्षण
टुसू परब के जरिए पूरे झारखंड में होगा पंचपरगनिया भाषा-संस्‍कृति का संरक्षण

Ranchi: पंचपरगनिया भाषा विकास केन्द्रीय समिती बुंडू के तत्वाधान में सूर्य मंदिर बुंडू में वनभोज सह मिलन समारोह का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ गोविंद महतो के द्वारा संपन्न हुआ. इस अवसर पर समिति के सचिव डॉ करम चन्द्र अहीर ने पंचपरगनिया भाषा के छात्रों से जिला विस्तार आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाने का आहवान किया.

जिला विस्तार के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ अहीर ने कहा कि सरकार दूसरे राज्य की भाषा संस्कृति को अवश्य बढ़ावा दे रही है किंतु पंचपरगनिया भाषी बेरोजगारों को तीन जिलों में सीमित करके लाखों युवाओं के साथ अन्याय कर रही है. पंचपरगनिया भाषा प्रेमियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पंचपरगनिया भाषा को भी पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, हजारीबाग आदि जिलों में मान्यता देने की मांग किया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ गोविन्द महतो ने टुसू परब को पंचपरगनिया संस्कृति का महत्वपूर्ण त्योहार बताते हुए इसे बचाए रखने को आवहान किया.

डॉ अंबिका स्वांसी ने कहा कि पंचपरगनिया भाषा के क्षेत्र विस्तार और साहित्यिक रचना को बढ़ावा देने की बात कही साथ ही पंचपरगनिया भाषा शिक्षण के लिए विभिन्न स्कूल कॉलेजों में आवश्यकता अनुसार सीट क्रिएशन करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

समाजसेवी रामदुर्लभ मुंडा ने कहा कि पंचपरगनिया भाषा के जिला विस्तार के लिए हमें आंदोलन करने की आवश्यकता होगी तो हम हमेशा वहां उपस्थित रहेंगे. साथ ही हमें विभिन्न जनप्रतिनिधियों के पास पंचपरगनिया भाषा के समस्याओं को लेकर आवगत कराने की बात कही.

डॉ भूतनाथ प्रमाणिक ने कहा कि पंचपरगनिया भाषा के उत्थान के लिए हमें सभी स्तरों से दवाब बनाने की आवश्यकता है साथ इन्होंने पंचपरगनिया भाषा के लिए उलगुलान गीत गाकर सभी को प्रत्साहित किए.

इस कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ वासुदेव महतो ने किया तथा इन्होंने कहा कि पंचपरगनिया भाषा को कैसे आगे बढ़ाया जाए और इसके लिए पंचपरगनिया भाषा प्रेमी को सामूहिक रूप से संगठनात्मक तरीके से अपने हक और अधिकार के लिए अग्रसर होना चाहिए. अगर सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती है तो हमें कानूनी सहयोग भी लेना पड़े तो वो भी लेंगे.

इस अवसर पर स्नातकोत्तर पंचपरगनिया विभाग रांची विश्वविद्यालय, स्नातकोत्तर तथा स्नातक पंचपरगनिया विभाग डी.एस.पी.एम.यू रांची, डोरोंडा कॉलेज रांची, पी.पी.के कॉलेज बुंडू, सिल्ली कॉलेज सिल्ली के छात्र – छात्राओं तथा पंचपरगनिया भाषा प्रेमी के लोगों द्वारा टुसू गीत तथा भादर गीत के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया.

इस अवसर पर डॉ करम चन्द्र अहीर, डॉ गोविन्द महतो, डॉ अंबिका स्वांसी, डॉ. भूतनाथ प्रमाणिक, डॉ. दिनबंधु महतो, विद्यासागर यादव, डॉ. पराग किशोर सिंह, राजकिशोर स्वांसी, पुरेन्द्र अहीर, डॉ. नरेन्द्र दास, डॉ. वासुदेव महतो, कृष्णा सिंह मुंडा, अमित पातर, लक्ष्मीकांत प्रामाणिक, हलधर अहीर, सुरेश चन्द्र महतो, पंकज महतो, सहदेव महतो, रुपेश कुमार, मुकेश कुम्हार, सुदर्शन अहीर, हेमंत अहीर, धर्मेंद्र यादव, कुणाल किशोर, अपराजिता कुमारी, जयंती कुमारी, सुनीता देवी, शांति देवी, सरिता कुमारी, रेखा कुमारी आदि अनेक पंचपरगनिया भाषा प्रेमी तथा कला प्रेमी मौजूद थे.

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