बाल सुधार गृह से 21 से अधिक बाल बंदी फरार, मचा हड़कंप

Subhash Shekhar
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चाईबासा स्थित पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय के बाल सुधार गृह से 21 से अधिक बाल बंदी फरार हो गए। यह घटना मंगलवार की शाम को उस समय हुई जब शहर में सरहुल पर्व को लेकर जुलूस निकाला जा रहा था। इस दौरान सुधार गृह के अंदर बाल बंदियों के बीच अचानक झगड़ा शुरू हो गया, जो देखते ही देखते हिंसा में बदल गया।

बाल बंदियों ने गार्डों पर किया हमला, तोड़ा सीसीटीवी

सूत्रों के अनुसार, बाल सुधार गृह में खेल रहे बाल बंदियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि उन्होंने आपस में मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद बंदियों ने एकजुट होकर जमकर उत्पात मचाया और सुरक्षा गार्डों पर भी हमला कर दिया।

गुस्साए बंदियों ने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए और गेट के ताले को भी तोड़कर फरार हो गए। इस दौरान कुछ सुरक्षाकर्मियों को गंभीर चोटें भी आई हैं। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार 21 बाल बंदी भाग चुके हैं, हालांकि यह संख्या और भी बढ़ सकती है।

अधिकारियों की टीम पहुंची घटनास्थल पर

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रशिक्षु आईपीएस निखिल राय, एसडीपीओ बहामन टुटी, एसडीओ संदीप अनुराग टोपनो, सदर सीओ उपेंद्र कुमार और मुफ्फसिल थाना प्रभारी रंजीत उरांव तुरंत संप्रेक्षण गृह पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

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बताया जा रहा है कि बाल सुधार गृह में कुल 85 बाल बंदी थे, जिनमें से 21 फरार हो गए। इस दौरान किसी व्यक्ति ने बाल बंदियों के भागने का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

प्रशासन ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

घटना को लेकर उपायुक्त कुलदीप चौधरी ने कहा कि पुलिस टीम तुरंत सुधार गृह पहुंच गई है और भागे हुए बाल बंदियों को ट्रेस करने की कोशिश कर रही है। कुछ बच्चों को ढूंढ निकाला गया है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार सुरक्षा कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और प्रशासन की टीमें जिले भर में छापेमारी कर रही हैं ताकि फरार बंदियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।

इलाके में दहशत, सुरक्षा बढ़ाई गई

बाल बंदियों के इस तरह फरार होने से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। प्रशासन ने इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया है और शहर के विभिन्न हिस्सों में गश्त बढ़ा दी गई है।

फिलहाल, जिले की पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और बाल बंदियों की तलाश में जुटी हुई है। यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है और सरकार से इस पर ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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