Ranchi | केरेडारी स्वास्थ्य केंद्र की गंभीर कुव्यवस्था को उजागर करने के बाद एक महिला कर्मचारी को कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है। वायरल वीडियो सामने आने के बाद भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को “चोरी और सीनाजोरी साथ-साथ” करार देते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
हजारीबाग जिले के केरेडारी स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से कुछ दिन पहले एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।इस वीडियो में परिवार नियोजन ऑपरेशन बिजली और जनरेटर की कमी के कारण टॉर्च की रोशनी में किए जाने का दृश्य सामने आया।वीडियो ने झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
इस मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया, जब आरोप लगा कि वीडियो बनाने वाली महिला कर्मचारी को स्वास्थ्य विभाग के ही एक कर्मचारी द्वारा धमकाया जा रहा है।धमकी से जुड़ा एक और वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई।
क्यों भड़का विवाद
केरेडारी स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए एकमात्र सरकारी स्वास्थ्य सुविधा है। यहां संसाधनों की कमी, उपकरणों की खराब स्थिति और स्टाफ की लापरवाही के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।
वायरल वीडियो ने पहली बार इन अव्यवस्थाओं को सार्वजनिक मंच पर ला दिया।महिला कर्मचारी द्वारा बनाए गए वीडियो ने न केवल विभागीय लापरवाही उजागर की, बल्कि जवाबदेही का सवाल भी खड़ा किया।
भाजपा सांसद आदित्य साहू ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्ट पदाधिकारी और कर्मचारी सरकार के “टूल किट” की तरह काम कर रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सत्ता तंत्र का डर दिखाया जा रहा है।
साहू ने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि अमानवीय कृत्य है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो अधिकारी सच बोलने वालों को धमकाते हैं, वे अधिकारी नहीं बल्कि गुंडागर्दी करने वाले लोग हैं।
इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सच्चाई सामने लाने वालों को ही धमकाया जाएगा, तो सिस्टम कैसे सुधरेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या है। ऐसे में केरेडारी जैसे मामलों से जनता का भरोसा सरकारी व्यवस्था से और कमजोर होता दिख रहा है।
कई सामाजिक संगठनों ने भी महिला कर्मचारी को सुरक्षा देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
आगे क्या? संभावित कार्रवाई और अगला कदम
आदित्य साहू ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, वीडियो बनाने वाली महिला को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। दूसरी, धमकी देने वाले कर्मचारी पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। तीसरी, केरेडारी स्वास्थ्य केंद्र की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं। अगर जांच होती है, तो यह झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम मोड़ साबित हो सकती है।
केरेडारी स्वास्थ्य केंद्र का मामला केवल एक अस्पताल की बदहाली तक सीमित नहीं है। यह सच बोलने की कीमत, प्रशासनिक जवाबदेही और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है। अब चुनौती यह है कि सरकार इस चेतावनी को गंभीरता से लेती है या नहीं।









