Gumla | झारखंड के गुमला जिले में 30 दिसंबर को आयोजित होने वाली कार्तिक उरांव जयंती को इस बार राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इस अवसर पर आदिवासी समाज और क्षेत्रीय राजनीति को साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। कार्यक्रम में राष्ट्रपति सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
झारखंड के प्रसिद्ध आदिवासी नेता स्वर्गीय कार्तिक उरांव की जयंती को लेकर इस बार गुमला जिला राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। आदिवासी शक्ति स्वायत्तशासी विश्वविद्यालय निर्माण समिति (झारखंड-छत्तीसगढ़-ओडिशा) के तत्वावधान में रायडीह प्रखंड क्षेत्र में भव्य आयोजन की तैयारी की गई है।
आयोजकों के अनुसार, 30 दिसंबर को होने वाले इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने की संभावना है। इसके साथ ही झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है। आयोजन को अंतरराष्ट्रीय जन-सांस्कृतिक समागम के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल जयंती समारोह नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकारों पर विमर्श का मंच बनेगा।
कार्तिक उरांव झारखंड के उन गिने-चुने आदिवासी नेताओं में रहे, जिन्होंने शिक्षा, भूमि अधिकार और आदिवासी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। वे लंदन से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर लौटे और संसद में आदिवासी मुद्दों की मुखर आवाज बने।
उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक स्वायत्त आदिवासी विश्वविद्यालय की परिकल्पना की थी। उनका सपना था कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर ऐसा संस्थान बने, जहां आदिवासी बच्चे अपनी भाषा और संस्कृति के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।
वर्ष 1981 में उन्होंने इस मांग को केंद्र सरकार के समक्ष औपचारिक रूप से रखा था। यही कारण है कि उनकी जयंती पर विश्वविद्यालय निर्माण की मांग को फिर से प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
भाजपा की रणनीति और राजनीतिक संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कार्तिक उरांव जयंती के मंच से भाजपा आदिवासी समाज को साधने की कोशिश कर रही है। झारखंड में आदिवासी मतदाताओं की भूमिका निर्णायक रही है और आने वाले चुनावी परिदृश्य को देखते हुए यह आयोजन अहम माना जा रहा है।
कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव और अनुसूचित जाति-जनजाति संसदीय समिति के अध्यक्ष फगन सिंह कुलस्ते को भी आमंत्रित किया गया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि आदिवासी समाज के विकास, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर पार्टी गंभीर है और कार्तिक उरांव के विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
प्रशासन और सरकार की भूमिका
जिला प्रशासन ने कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था की तैयारियां शुरू कर दी हैं। गुमला प्रशासन के अनुसार, संभावित वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए यातायात, सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से अभी औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम स्थल के आसपास अस्थायी ढांचे, सांस्कृतिक मंच और प्रदर्शनी लगाने की योजना है।
आदिवासी समाज पर असर
स्थानीय आदिवासी संगठनों का कहना है कि यदि कार्तिक उरांव के सपनों को नीति स्तर पर आगे बढ़ाया जाता है, तो यह क्षेत्र के युवाओं के लिए बड़ा अवसर हो सकता है। शिक्षा और रोजगार से जुड़े ठोस निर्णय आदिवासी समाज की दिशा बदल सकते हैं।
हालांकि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि जयंती समारोह केवल राजनीतिक मंच न बनकर वास्तविक विकास की दिशा में ठोस कदम उठाने का जरिया बने, तभी इसका उद्देश्य पूरा होगा।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कार्तिक उरांव जयंती से जुड़े प्रस्तावों पर केंद्र या राज्य स्तर पर कोई ठोस घोषणा होती है या नहीं। यदि स्वायत्त आदिवासी विश्वविद्यालय को लेकर आधिकारिक पहल होती है, तो यह झारखंड समेत पड़ोसी राज्यों के लिए बड़ी खबर होगी।
कार्यक्रम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और घोषणाएं झारखंड की आदिवासी राजनीति की दिशा तय कर सकती हैं।
गुमला में आयोजित होने वाली कार्तिक उरांव जयंती केवल स्मरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति, शिक्षा और पहचान से जुड़े बड़े सवालों का मंच बनती दिख रही है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि यह आयोजन प्रतीकात्मक रहेगा या कार्तिक उरांव के अधूरे सपनों को नई दिशा देगा।








