Ranchi | अगर आपको लगता है कि सिर्फ शादियों में भारी भीड़ होती है, तो शायद आपने झारखंड कांग्रेस की ताज़ा लिस्ट नहीं देखी! प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और सह-प्रभारी भूपेंद्र मारावी ने रविवार को ऐसी ‘जंबो कमेटी’ लॉन्च की है कि इसे पढ़ने के लिए आपको चश्मे के साथ-साथ एक कप कड़क चाय की भी ज़रूरत पड़ेगी।
कुल 229 पदाधिकारी! जी हां, आपने सही पढ़ा। कांग्रेस ने इस बार ‘सबका साथ, सबका विकास’ को पद बांटने में इतना सीरियस ले लिया है कि संगठन की लिस्ट किसी जिले की वोटर लिस्ट जैसी लगने लगी है। लेकिन रुकिए, ये सिर्फ भीड़ नहीं है, इसमें अंबा प्रसाद और दयामनी बारला जैसे वो नाम भी हैं जिन्होंने इस लिस्ट में ‘मिर्ची’ का तड़का लगा दिया है।
लिस्ट में ‘तड़का’: अंबा का जोश और दयामनी का ‘डायरेक्ट’ धमाका
इस पूरी लिस्ट में दो नामों ने सबसे ज्यादा शोर मचाया है। पहली हैं अंबा प्रसाद, जिन्हें ‘कैंपेन कमेटी’ में डालकर पार्टी ने साफ कर दिया है कि चुनाव प्रचार में ग्लैमर और आक्रामकता की कमी नहीं होने वाली।
लेकिन असली ‘गूगली’ तो दयामनी बारला के नाम की है। दो साल पहले पार्टी में आईं ‘आयरन लेडी’ दयामनी को सीधे उपाध्यक्ष की कुर्सी दे दी गई है। मतलब, कांग्रेस अब जल-जंगल-जमीन की लड़ाई सीधे फ्रंट फुट पर आकर खेलने वाली है। विरोधियों के लिए ये खबर थोड़ी ‘हजमोला’ कम और ‘सिरदर्द’ ज्यादा साबित हो सकती है।
पावर की बंदरबांट या मास्टरस्ट्रोक?
पार्टी ने पदों की ऐसी सेटिंग की है कि हर कोई खुश रहे। 16 उपाध्यक्ष बनाए गए हैं—यानी इतनी बड़ी टीम कि अगर सब एक साथ मंच पर आ जाएं, तो मंच को बीमा की ज़रूरत पड़ जाए!
- उपाध्यक्षों का टास्क: 14 उपाध्यक्षों को एक-एक ‘संसदीय सीट’ दी जाएगी। यानी ‘अपना एरिया संभालो और जीत कर दिखाओ।’
- महासचिवों की फौज: 43 महासचिव बनाए गए हैं। इनका काम होगा जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं का जोश हाई करना।
- दिग्गजों का ‘रिटायरमेंट प्लान’ नहीं: रामेश्वर उरांव, सुखदेव भगत और राजेश ठाकुर जैसे पूर्व अध्यक्षों को ‘SIR कमेटी’ में रखा गया है। मतलब— ‘एक्सपीरियंस भी ज़रूरी है बॉस!’
तो क्या सबको मिल गया ‘लॉलीपॉप’?
सोशल मीडिया पर चर्चा है कि क्या यह सबको खुश रखने का ‘जुगाड़’ है? जब इतने सारे नेता होंगे, तो तालमेल कैसे बैठेगा? लेकिन कांग्रेस का तर्क सीधा है— “जितनी बड़ी फौज, उतनी बड़ी जीत!” सोमवार को जब इन सबको अपनी-अपनी ड्यूटी का ‘टाइम टेबल’ मिलेगा, तब असली ‘खेला’ शुरू होगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल तो रांची के कांग्रेस दफ्तर में बधाई देने वालों का तांता लगा है। अब देखना ये है कि ये 229 ‘रथी’ मिलकर कांग्रेस के रथ को 2029 की मंजिल तक पहुंचा पाते हैं या फिर ‘ज्यादा रसोइए खाना खराब कर देते हैं’ वाली कहावत सच होगी? नजरें कल के कार्य विभाजन पर टिकी हैं!
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