Dhanbad | तमिलनाडु की सीफूड फैक्ट्री में हुए भीषण अमोनिया गैस रिसाव के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वहां काम करने वाले झारखंड के करीब 40 मजदूरों ने खुद को बंधक बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर झारखंड सरकार से तुरंत रेस्क्यू करने की गुहार लगाई है।
यह पूरा मामला तिरुवल्लूर जिले का है, जहां जिला प्रशासन ने इन मजदूरों को एक निजी मैरिज हॉल में रखा है। मजदूरों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर उन्हें कैद कर दिया गया है और घर जाने की इजाजत नहीं मिल रही है।
21 जून को सेंट पीटर पॉल सीफूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में गैस रिसाव से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे के बाद से ही अन्य राज्यों के मजदूरों में दहशत का माहौल है और वे किसी भी कीमत पर अपने वतन लौटना चाहते हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट: “खाना मिल रहा है, लेकिन बाहर जाने पर पहरा”
मैरिज हॉल के बाहर से मिल रही जमीनी जानकारी के मुताबिक, पूरी इमारत को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। करीब 25 से ज्यादा हथियारबंद पुलिसकर्मी वहां चौबीसों घंटे तैनात हैं। ग्राउंड जीरो से मजदूरों ने फोन पर बताया कि प्रशासन उनके रहने-खाने का इंतजाम तो कर रहा है, लेकिन उनकी आजादी पूरी तरह छीन ली गई है।
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस रिसाव से कुल 83 कर्मचारी प्रभावित हुए थे। फिलहाल 40 मजदूरों का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जिनमें से दो वेंटिलेटर पर और नौ ऑक्सीजन सपोर्ट पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
“बीमार पत्नी से मिलने पर भी पुलिस का पहरा” – मजदूरों की आपबीती
झारखंड के धनबाद जिले के रहने वाले 20 वर्षीय बबलू कुमार की कहानी बेहद दर्दनाक है। बबलू ने बताया:
“मेरी पत्नी अभी भी अस्पताल में भर्ती है। जब भी मैं उससे मिलने की मिन्नतें करता हूँ, पुलिसवाले मुझे अपनी गाड़ी में लेकर जाते हैं। महज कुछ मिनटों की मुलाकात कराकर वापस इसी मैरिज हॉल में बंद कर देते हैं। हम गुनहगार नहीं हैं, हम बस अपने घर जाना चाहते हैं।”
हादसे में धनबाद की प्रीति देवी की मौत के बाद झारखंड के मजदूरों में डर और बढ़ गया है। मृतकों में 12 ओडिशा के, 2 असम के और 1 झारखंड की निवासी थीं।
राजनीति और सुस्ती: ओडिशा-असम के मजदूर लौटे, झारखंड वाले अब भी इंतजार में
मैरिज हॉल में बंद गोमो निवासी मुकेश कुमार ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुकेश का कहना है कि तमिलनाडु प्रशासन ने समन्वय दिखाकर ओडिशा के 60-70 श्रमिकों और असम के 70 से अधिक मजदूरों को वापस भेज दिया है। लेकिन झारखंड सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
मजदूरों की मांग सिर्फ घर लौटने की नहीं है। वे चाहते हैं कि तमिलनाडु छोड़ने से पहले कंपनी और स्थानीय प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि गैस रिसाव से प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा मिले और उनका बकाया वेतन भी तुरंत चुकाया जाए।
प्रशासन का दावा: औपचारिकताएं होते ही भेजेंगे घर
इस पूरे मामले पर तिरुवल्लूर जिला प्रशासन का कहना है कि वे झारखंड के श्रम विभाग के साथ लगातार संपर्क में हैं। मृतक महिला के शव को पहचान संबंधी औपचारिकताएं पूरी होते ही झारखंड भेज दिया जाएगा। प्रशासन ने दावा किया कि सभी मजदूरों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और जल्द ही सबको सुरक्षित घर रवाना किया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी को उजागर किया है। अब देखना यह होगा कि झारखंड सरकार इस पर कितनी जल्दी एक्शन लेती है। जब तक रांची से श्रम विभाग की टीम तमिलनाडु नहीं पहुंचती, तब तक इन 40 मजदूरों की रातें इसी मैरिज हॉल की बंद दीवारों और पुलिस के पहरे के बीच सिसकते हुए गुजरेंगी।











