Birsa Munda Central Jail Ranchi: रांची के भगवान बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार जेल) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इस वीडियो में कुछ कैदी डांस करते हुए नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वही कैदी हैं जो शराब और जीएसटी घोटाले में आरोपी हैं। वीडियो जेल परिसर के एक हॉल में शूट किया गया है।
वीडियो सामने आते ही जेल महकमे में अफरा-तफरी मच गई। रांची जेल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है। जेल आईजी के निर्देश पर जेलर देवनाथ राम और जमादार विनोद कुमार को लापरवाही के आरोप में बुधवार देर शाम निलंबित कर दिया गया। वहीं दिनेश वर्मा को नया जेलर नियुक्त किया गया है और उन्हें तत्काल कार्यभार संभालने का आदेश दिया गया है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल की मौजूदगी ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिरसा मुंडा जेल में ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ का खुलासा
दैनिक भास्कर की पड़ताल में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। होटवार जेल में रसूखदार कैदियों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाता है। यहां तक कि जेल के अंदर बने ‘वीआईपी वार्ड’ का रेट भी तय बताया गया है। कैदियों की एंट्री फीस से लेकर मासिक खर्च तक का पूरा हिसाब ‘कोड वर्ड’ में तय होता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर महीने में जीएसटी घोटाले के आरोपी विक्की भलोटिया के मोबाइल नंबर पर हुई एक बातचीत ने जेल के अंदर चल रहे इस सिस्टम का खुलासा किया। इस कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग दैनिक भास्कर के पास मौजूद है। बातचीत में एक व्यक्ति ने विक्की से कहा —
“भैया, अपना आदमी अंदर गया है, 10 नंबर रोड में रहने की व्यवस्था कराना है।”
इस पर विक्की जवाब देता है — “10 नंबर का तो रेट बहुत ज्यादा है।” जब रिपोर्टर ने पूछा कि “कितना पड़ेगा?”, तो विक्की ने जवाब दिया — “10 नंबर रोड का रेट तो 50 रुपया है।” इस बातचीत से यह साफ होता है कि जेल के अंदर ‘रोड नंबर’ के नाम पर सेल का रेट तय है और पैसे के बल पर कैदी अपनी सुविधानुसार जगह चुनते हैं।
पैसे और पहुंच से बदलती है जेल की व्यवस्था
जेल के अंदर के सूत्र बताते हैं कि रसूखदार कैदियों के लिए अलग नियम हैं। उन्हें मोबाइल फोन, बेहतर खाना, टीवी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क चलता है। बाहर से आने वाले पैसों के बदले अंदर ‘वीआईपी सेल’ में आरामदायक जीवन मुहैया कराया जाता है।
जेल में बने कई खास वार्डों में नामचीन कैदी रहते हैं, जिनकी देखरेख के लिए अलग स्टाफ नियुक्त किया गया है। वहीं, आम कैदियों को तंग हालात में रहना पड़ता है।
जेल प्रशासन ने अब इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कैदियों के पास मोबाइल और कैमरा कैसे पहुंचे, और इस पूरे ‘वीआईपी नेटवर्क’ में कौन-कौन शामिल है।
होटवार जेल का यह वीडियो एक बार फिर जेलों में व्याप्त भ्रष्टाचार और वीआईपी संस्कृति की हकीकत को उजागर करता है। सवाल यह है कि क्या कार्रवाई सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगी, या जेल सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे?








