झारखंड में भूंजा-पान विक्रेताओं को GST नोटिस

Subhash Shekhar
4 Min Read

जमशेदपुर: झारखंड के छोटे व्यापारियों पर अब डिजिटल भुगतान भी भारी पड़ने लगा है। भूंजा, पान और फल बेचने जैसे पारंपरिक छोटे कारोबारियों को GST नोटिस थमाए गए हैं। वजह बनी है उनके यूपीआई ट्रांजैक्शन। इन नोटिसों से जमशेदपुर जैसे शहरों में व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।

2021 से 2024 तक के लेनदेन डेटा पर आधारित कार्रवाई

जीएसटी विभाग की ओर से जो नोटिस भेजे गए हैं, वे साल 2021 से 2024 के बीच हुए डिजिटल लेनदेन के आधार पर जारी किए गए हैं। इन नोटिसों में लाखों रुपये की टैक्स रिकवरी की चेतावनी दी गई है, जबकि जिन व्यापारियों को नोटिस भेजा गया है, वे अधिकतर छूट प्राप्त वस्तुएं बेचते हैं।

पान, फूल और फल वाले भी अब इनकम टैक्स के रडार पर

छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ीं

- Advertisement -

बिष्टुपुर जैसे इलाके के पान दुकानदार, भूंजा बेचने वाले और फल विक्रेताओं को लाखों का टैक्स नोटिस मिलना चौंकाने वाला है। यही नहीं, बेकरी, फूल वाले, चाय बेचने वाले और किराना दुकानदार भी अब इनकम टैक्स की नजर में आ गए हैं। इन सभी के यूपीआई लेनदेन को व्यवसायिक टर्नओवर मान लिया गया है।

व्यापारी संगठनों ने जताई आपत्ति

व्यापारी संगठनों का कहना है कि क्यूआर कोड से जुड़े कई ट्रांजैक्शन निजी लेनदेन के लिए होते हैं, लेकिन उन्हें टैक्स योग्य मान लिया गया है। जमशेदपुर में यूपीआई का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है और कई दुकानदारों के पास एटीएम का प्रयोग ही नहीं होता।

छोटे व्यापारियों के लिए नीति बनाने की मांग

सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने कहा कि डिजिटल इंडिया के साथ कदम मिलाना ज़रूरी है, लेकिन छोटे कारोबारियों को राहत देने वाली नीति भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को सालाना टर्नओवर के आधार पर एक निर्धारित पैकेज तय करना चाहिए।

- Advertisement -

कैट ने सुझाया कंपोजिशन स्कीम का विकल्प

कंपोजिशन स्कीम से हो सकती है राहत

कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेश सोंथालिया ने छोटे व्यापारियों को कंपोजिशन टैक्स स्कीम का लाभ उठाने की सलाह दी है। इसके तहत केवल 1% टैक्स देकर व्यवसाय को वैध रूप से चलाया जा सकता है। साथ ही इससे भविष्य में लोन लेने की प्रक्रिया भी आसान होगी।

टर्नओवर बढ़े तो टैक्स से भागना नहीं होगा

- Advertisement -

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी व्यापारी का टर्नओवर तय सीमा से ऊपर जाता है, तो उसे जीएसटी और इनकम टैक्स कानूनों का पालन करना होगा। लेकिन सरकार को ऐसे व्यापारियों को समय रहते जागरूक करने की ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए।

जीएसटी नोटिस की यह लहर झारखंड में छोटे व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। डिजिटल भुगतान को लेकर स्पष्ट नीति और सही समझ जरूरी है, वरना हर भूंजा और पान वाला भी अब इनकम टैक्स के जाल में फंस सकता है। सरकार को चाहिए कि वह डिजिटल ट्रांजैक्शन और छोटे कारोबारियों के बीच संतुलन बनाते हुए समावेशी नीति बनाए।

Share This Article
Follow:
सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
Leave a comment

Leave a Reply