रांची: झारखंड के युगपुरुष और दशोम गुरु बाबा शिबू सोरेन के निधन पर राज्यभर में शोक की लहर है। ऐसे में शहीद पांडेय गणपत राय जी के परिवार की प्रपौत्री और रांची विश्वविद्यालय की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वंदना राय ने गुरुजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
उनके अनुसार, गुरुजी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि झारखंड की आत्मा थे। उन्होंने कहा, “भारत के नक्शे में झारखंड का नक्शा हमारे गुरुजी का देन है।” यह वाक्य झारखंडियों के दिल में उनकी भूमिका और योगदान की गहराई को दर्शाता है।
गुरुजी के निधन से झारखंड को अपूरणीय क्षति
डॉ. राय ने कहा कि बाबा शिबू सोरेन का जाना केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि एक विचारधारा की क्षति है। उन्होंने झारखंड की अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों के लिए जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
शहीद पांडेय गणपत राय के वंशजों सहित उनका पूरा परिवार इस दुखद क्षण में शोकाकुल है और गुरुजी के परिवार के साथ संवेदना प्रकट करता है।
कोटि-कोटि नमन, दशोम गुरु को
डॉ. वंदना राय ने श्रद्धांजलि संदेश में आगे कहा कि “हम सबने एक मार्गदर्शक, एक सामाजिक योद्धा और झारखंड की पहचान गढ़ने वाले युगपुरुष को खो दिया है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि शहीद पांडेय गणपत राय जैसे क्रांतिकारियों की प्रेरणा का विस्तार आजादी के बाद शिबू सोरेन जैसे नेताओं में देखा गया।
उनके शब्दों में, “गुरुजी ने जो शुरू किया, वह झारखंड की मिट्टी में हमेशा जीवित रहेगा। उनका नाम केवल किताबों में नहीं, हमारे संस्कारों में रहेगा।”
झारखंड के आत्मसम्मान की आवाज थे शिबू सोरेन
गुरुजी का जीवन संघर्ष और साधना का प्रतीक था। उन्होंने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की लड़ाई और सामाजिक न्याय के लिए अनेक मोर्चों पर संघर्ष किया।
डॉ. राय के अनुसार, गुरुजी की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा, झारखंड आंदोलन की रीढ़ थी। यही कारण है कि आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो राज्य शोक में डूबा है और हर दिल उनके योगदान को याद कर रहा है।
भावभीनी विदाई, स्थायी विरासत
शिबू सोरेन भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विचारधारा, उनका संघर्ष, उनकी आत्मा इस राज्य में बसती रहेगी।
डॉ. वंदना राय ने अपने श्रद्धांजलि संदेश का अंत करते हुए कहा, “गुरुजी ने जो बीज बोए, वह आज वटवृक्ष बन चुके हैं। हम उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हैं।”









