पश्चिमी सिंहभूम (झारखंड): चाईबासा के नोवामुंडी और आसपास के क्षेत्रों में एक आदमखोर दंतैल हाथी ने मौत का तांडव मचा रखा है। मंगलवार (6 जनवरी) की रात बाबरिया गांव में हाथी ने एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित पांच लोगों को बेरहमी से कुचल दिया, जिससे पूरे जिले में हाहाकार मचा हुआ है।
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चाईबासा हाथी हमला: एक ही रात में उजड़ गए कई परिवार
पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत जेटेया थाना क्षेत्र के बाबरिया गांव में मंगलवार की रात करीब 10 बजे एक जंगली हाथी ने अचानक हमला बोल दिया। ग्रामीण अपने घरों में सो रहे थे, तभी दंतैल हाथी ने कच्ची दीवारों को ध्वस्त कर दिया। इस हमले में सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई और उनके दो मासूम बच्चों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
इसी गांव के एक अन्य ग्रामीण मोगदा लागुरी को भी हाथी ने अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परिवार का एक बच्चा किसी तरह जान बचाने में सफल रहा, जिसने भागकर ग्रामीणों को सूचित किया। घटना के बाद गांव में चीख-पुकार और मातम का माहौल है।
अन्य गांवों में भी मौत का साया: प्रशासन अलर्ट पर
हाथी का हमला केवल बाबरिया गांव तक सीमित नहीं रहा। इसके बाद हाथी ने बड़ा पासीया और लांपाईसाई गांव की ओर रुख किया। ताजा जानकारी के अनुसार, बड़ा पासीया में एक और लांपाईसाई में एक ग्रामीण को हाथी ने कुचलकर मार डाला। समाचार लिखे जाने तक इन दोनों मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर पहुँच चुकी हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों को जंगलों की ओर न जाने और रात में घरों के अंदर रहने की सख्त हिदायत दी है। वन विभाग के अधिकारी फिलहाल हाथी की लोकेशन ट्रैक कर रहे हैं ताकि उसे आबादी वाले क्षेत्र से दूर खदेड़ा जा सके।
जनवरी 2026: हाथी के हमलों का काला सप्ताह (तिथि-वार विवरण)
झारखंड के इस क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से हाथी का आतंक चरम पर है। 1 जनवरी से अब तक हुई घटनाओं का ब्योरा रोंगटे खड़े करने वाला है:
| तिथि | क्षेत्र/गांव | विवरण |
| 01 जनवरी | टोंटो, बिरसिंहहातु, रोरो | मंगल सिंह हेंब्रम, उर्दूप बहंदा और विष्णु सुंडी की मौत। 2 घायल। |
| 02 जनवरी | सायतवा, चक्रधरपुर | 13 वर्षीय रेंगा कयोम की मौत; 10 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल। |
| 04 जनवरी | अमराई कितापी (गोइलकेरा) | 47 वर्षीय महिला की कुचलकर मौत; पति और पुत्र घायल। |
| 05 जनवरी | मिस्त्रीबेड़ा (संतरा वन) | जोंगा लागुरी की जान गई; पति चंद्र मोहन गंभीर घायल। |
| 06 जनवरी | सोवा एवं कुईलसूता | कुंदरा बाहदा, उनके 6 वर्षीय पुत्र और 8 माह की बच्ची सहित 4 की मौत। |
आखिर क्यों आक्रामक हुए हाथी?
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के प्राकृतिक गलियारों (Elephant Corridors) में मानवीय हस्तक्षेप और जंगलों में भोजन की कमी के कारण हाथी अब सीधे बस्तियों पर हमला कर रहे हैं। संतरा वन क्षेत्र और गोइलकेरा के इलाकों में हाथियों का झुंड अक्सर भटकता रहता है, लेकिन एक अकेले दंतैल हाथी का इस तरह हिंसक होना चिंता का विषय है।
ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग की ओर से न तो समय पर चेतावनी दी गई और न ही हाथियों को भगाने के लिए पर्याप्त मशालें या पटाखे उपलब्ध कराए गए।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन ने मृतकों के आश्रितों को सरकारी प्रावधान के अनुसार मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। वन विभाग ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और विशेष ‘एलीफेंट ड्राइव’ टीम को बुलाया गया है। प्रशासन ने अपील की है कि ग्रामीण झुंड से अलग हुए अकेले दंतैल हाथी को छेड़ें नहीं, क्योंकि वह इस समय अत्यधिक आक्रामक है।
क्या है सुरक्षा का समाधान?
झारखंड के चाईबासा में हुई यह सामूहिक मौत की घटना प्रशासन की विफलता और मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह तस्वीर पेश करती है। जब तक जंगली इलाकों में हाथियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन और थर्मल सेंसर) का उपयोग नहीं होगा, तब तक निर्दोष ग्रामीणों की जान इसी तरह जोखिम में रहेगी।










