बिहार महागठबंधन में बढ़ी दरार? राजद–कांग्रेस की जुबानी जंग से सियासी हलचल तेज

बिहार महागठबंधन में बढ़ी दरार? राजद–कांग्रेस की जुबानी जंग से सियासी हलचल तेज

Patna | बिहार विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद महागठबंधन के भीतर अंतर्विरोध खुलकर सामने आने लगे हैं। गठबंधन में शामिल दलों के वरिष्ठ नेता अब सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। ताजा बयानबाजी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार में महागठबंधन की एकता खतरे में है।

बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच बयानबाजी अब सीधे टकराव में बदलती नजर आ रही है।

सोमवार को कांग्रेस नेता शकील अहमद के बयान के बाद मंगलवार को राजद ने भी कड़ा पलटवार किया। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में कांग्रेस को जो भी वोट मिलते हैं, वह राजद की वजह से मिलते हैं।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस का बिहार में स्वतंत्र जनाधार कमजोर है और वह राजद की ताकत पर ही चुनावी मैदान में टिक पाती है। उन्होंने यह भी कहा कि “हमारे ही दम पर उछलने वाले हमें ही ज्ञान दे रहे हैं,” जो सीधे तौर पर कांग्रेस नेताओं पर निशाना था।

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद सामने आए थे। उस समय राजद और कांग्रेस ने किसी तरह आपसी सहमति बनाकर एक साथ चुनाव लड़ा, लेकिन नतीजों के बाद असंतोष और गहराता चला गया।

राजद नेताओं का मानना है कि बिहार में सबसे बड़ा सामाजिक और राजनीतिक आधार उनके पास है। चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए वे दावा करते हैं कि राज्य में सबसे अधिक वोट राजद को मिले, जबकि कांग्रेस अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करती रही।

वहीं कांग्रेस के एक वर्ग का तर्क है कि गठबंधन में रहते हुए पार्टी को न तो संगठनात्मक मजबूती मिली और न ही राजनीतिक विस्तार का अवसर।

राजद की प्रतिक्रिया: कांग्रेस को आत्ममंथन की नसीहत

राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कांग्रेस की राष्ट्रीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है, लेकिन उसका जनाधार लगातार सिमटता जा रहा है, जो पार्टी के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए गठबंधन किया जाता है और इस दिशा में राजद ने हमेशा त्याग किया है। उनके अनुसार, कांग्रेस को मिलने वाली सीटों का नुकसान भी अंततः राजद को ही उठाना पड़ता है।

शकील अहमद के बयान से बढ़ा विवाद

कांग्रेस नेता शकील अहमद ने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में कहा था कि बिहार में अब महागठबंधन जैसी कोई चीज नहीं बची है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को राजद के साथ रहने के बजाय अकेले राजनीतिक राह चुननी चाहिए।

उनका तर्क था कि राजद के साथ गठबंधन में रहकर कांग्रेस को न तो चुनावी लाभ मिला और न ही संगठन मजबूत हुआ। ऐसे में यह गठबंधन कांग्रेस के लिए बोझ बन गया है।

बिहार की राजनीति पर असर

राजद और कांग्रेस के बीच जारी बयानबाजी का सीधा असर बिहार की राजनीति पर पड़ता दिख रहा है। विपक्षी खेमे की एकता पर सवाल उठने लगे हैं, जिससे सत्ताधारी दलों को राजनीतिक बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर महागठबंधन में दरार और गहरी होती है, तो इसका असर आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में साफ दिखाई देगा।

फिलहाल दोनों दलों की ओर से औपचारिक रूप से गठबंधन टूटने की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, नेताओं के बयान यह संकेत जरूर दे रहे हैं कि अंदरखाने मतभेद गंभीर हैं।

आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व स्तर पर बातचीत होती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। अगर आपसी संवाद से समाधान नहीं निकला, तो बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

बिहार में महागठबंधन फिलहाल कठिन दौर से गुजर रहा है। राजद और कांग्रेस के नेताओं के तीखे बयान यह साफ संकेत दे रहे हैं कि गठबंधन की एकता कमजोर पड़ रही है। अब यह देखना अहम होगा कि राजनीतिक मजबूरियां दोनों दलों को फिर एक मंच पर लाती हैं या बिहार की राजनीति एक नए मोड़ की ओर बढ़ती है।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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