रांची से उठी ‘एक ध्वज, एक पहचान’ की मांग, ज्वेलर्स एसोसिएशन ने लिया बड़ा फैसला

Subhash Shekhar
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रांची। झारखंड की राजधानी रांची में स्वर्णकार समाज ने अपने भविष्य की दिशा तय करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है। ‘अखिल भारतीय स्वर्णकार समाज एवं ज्वेलर्स एसोसिएशन’ ने समाज के उत्थान और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए एक विस्तृत 17-सूत्रीय एजेंडा जारी किया है।

​इस नए घोषणापत्र के सामने आने के बाद से ही झारखंड के सर्राफा बाजार और स्वर्णकार समुदाय के बीच चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो चुका है। एसोसिएशन के इस बड़े कदम का सीधा असर राज्य के हजारों ज्वेलर्स, कारीगरों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला है।

​एकता से लेकर डिजिटल ट्रेनिंग तक: क्या हैं प्रमुख उद्देश्य?

​ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के मुताबिक, एसोसिएशन के इस आधिकारिक दस्तावेज (दिनांक 11/06/26) में स्वर्णकार समाज को एक मंच पर लाने और उनके आर्थिक-सामाजिक विकास के लिए एक मुकम्मल ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है।

​व्यवसायिक संरक्षण और कानूनी मदद

​दस्तावेज के अनुसार, इसका सबसे मुख्य फोकस ज्वेलर्स के व्यापारिक हितों की रक्षा करना है। व्यापार में आने वाली किसी भी कानूनी या प्रशासनिक समस्या के समाधान के लिए संगठन अब सीधे तौर पर उचित मार्गदर्शन और मदद प्रदान करेगा। इसके अलावा, समाज के अनुभवी और बुजुर्ग व्यवसायियों को सम्मानित कर उनके अनुभवों का लाभ नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाएगा।

​युवाओं के लिए आधुनिक डिजाइनिंग और वर्कशॉप

​बदलते दौर के साथ पारंपरिक आभूषण व्यवसाय को डिजिटल और आधुनिक बनाने पर विशेष जोर है। इसके लिए स्वर्ण कला से जुड़े कारीगरों और युवाओं के लिए आधुनिक डिजाइनिंग और तकनीकी कार्यशालाओं (वर्कशॉप) का आयोजन किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सके।

​सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर बड़ा दांव

​इस एजेंडे में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार को भी शीर्ष प्राथमिकता दी गई है। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सामने आया कि संगठन एक स्थायी संचित कोष (फंड) का निर्माण करने जा रहा है।

  • शिक्षा और छात्रवृत्ति: मेधावी और निर्धन बच्चों को उच्च शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और ज्वेलरी डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में छात्रवृत्ति दी जाएगी। प्राथमिक से लेकर डिग्री कॉलेज और ज्वेलरी मेकिंग के प्रशिक्षण संस्थानों का संचालन भी इस योजना का हिस्सा है।
  • स्वास्थ्य और आवास: निर्धन एवं असहाय व्यक्तियों के लिए मुफ्त औषधालय, चिकित्सा शिविर और एम्बुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, निराश्रित एवं परित्यक्ता महिलाओं के लिए आश्रम, स्वरोजगार अभियान और पेंशन व आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
  • सांस्कृतिक गौरव: महाराजा अम्बरीष जी, संत शिरोमणि नरहरी जी, महाराजा अजमीढ़ जी और भगवान विश्वकर्मा जी की स्मृति में चौराहों का नामकरण, मूर्तियों की स्थापना और धर्मशालाओं का निर्माण किया जाएगा।

​’एक ध्वज, एक पहचान’ से मिलेगी राजनीतिक ताकत

​एसोसिएशन के झारखंड प्रदेश कोषाध्यक्ष शम्बू प्रसाद, दिलीप वर्मा और प्रदेश मीडिया प्रभारी सुनील पोद्दार सहित अन्य पदाधिकारियों की देखरेख में जारी इस संकल्प पत्र में एक बेहद दिलचस्प बिंदु शामिल है। वह है—“एक ध्वज, एक पहचान”

​संगठन पूरे स्वर्णकार समाज को एक झंडे के नीचे लाकर उनकी राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करना चाहता है। रांची के स्थानीय दुकानदारों और कारीगरों का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि शासन-प्रशासन में भी उनकी आवाज को अनसुना करना मुश्किल होगा।

​निष्कर्ष / What Next

​रांची से शुरू हुई यह मुहिम आने वाले दिनों में पूरे झारखंड के सर्राफा नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह होगा कि एसोसिएशन इन 17 उद्देश्यों को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन के साथ मिलकर किस तरह की कार्ययोजना तैयार करता है। आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान और सामूहिक विवाह जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत हो सकती है, जो समाज में एक बड़ा बदलाव लाएंगे।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।