Ranchi Liquor Scam: झारखंड की राजधानी रांची में उत्पाद विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए शराब सिंडिकेट का एक बहुत बड़ा खेल सामने आया है। रांची में खुदरा शराब दुकानों के संचालन में बड़े पैमाने पर अनियमितता और कमीशनखोरी की शिकायतें मिल रही हैं। Ranchi Liquor Scam के तहत एक्साइज एक्ट (उत्पाद अधिनियम) को ताक पर रखकर ऐसी दुकानों को चलाया जा रहा है, जिनका लाइसेंस किसी और के नाम पर है और उन्हें ऑपरेट कोई दूसरा ही बैकडोर से कर रहा है।
शुरुआती जांच और सूत्रों के हवाले से रांची की ऐसी 8 खुदरा शराब दुकानों की पहचान हुई है, जहां यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। अगर विभाग इसकी निष्पक्ष सत्यापन (Verification) कराए, तो राज्य में एक बहुत बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ होना तय है।
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रांची की इन 8 दुकानों पर चल रहा है कमीशन का खेल
रांची में इस वक्त शराब सिंडिकेट का नेटवर्क बेहद मजबूत हो चुका है। हमारे पास मौजूद पुख्ता जानकारी के मुताबिक, रांची के प्रमुख इलाकों जैसे हरमू मुक्तिधाम के पास, नामकुम के लोआडीह, स्टेशन रोड और पंडरा में स्थित खुदरा शराब दुकानों को असली लाइसेंसधारियों ने सिर्फ भारी-भरकम कमीशन के लालच में दूसरे लोगों के हाथों में सौंप दिया है।
बड़ी बात यह है कि इस Ranchi Liquor Scam में रिंग रोड के एक नामी बार संचालक और बुंडू इलाके के बड़े शराब कारोबारी का नाम सीधे तौर पर सामने आ रहा है। इस रसूखदार कारोबारी को हरमू मुक्तिधाम के पास वाली कंपोजिट शराब दुकान को चलाने का जिम्मा कमीशन बेसिस पर मिला हुआ है।
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लाइसेंस किसी का, दुकान किसी और की – ग्राउंड रिपोर्ट
राज्य में करीब 18 ऐसी लाइसेंसी दुकानें हैं, जिन्हें उनका असली मालिक नहीं बल्कि कोई और ही ‘मुखौटा’ बनकर चला रहा है।
खेल का तरीका समझें:
- असली लाइसेंसधारी को हर महीने एक तय फिक्स कमीशन मिल जाता है।
- दुकान का पूरा मैनेजमेंट और बिक्री का जिम्मा बाहरी सिंडिकेट संभालता है।
- नियमों के मुताबिक, जिस व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस है, वही दुकान के स्टॉक और सेल के लिए जिम्मेदार होता है, लेकिन यहाँ सारे नियम गायब हैं।

रामगढ़ में 170 पेटी शराब जब्ती से खुला राज
इस पूरे Ranchi Liquor Scam की परतें तब खुलनी शुरू हुईं, जब रांची के पड़ोसी जिले रामगढ़ में उत्पाद विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई की। चलिए आपको सिलसिलेवार ढंग से बताते हैं कि आखिर 23 मार्च को क्या हुआ था।
| तारीख | कार्रवाई की जगह | जब्त किया गया माल | परमिट का रूट | असली डेस्टिनेशन |
| 23 मार्च | कोठार ओवर ब्रिज, रामगढ़ | 170 पेटी अवैध शराब | पिस्का स्टेशन गोदाम से हरमू (रांची) | रामगढ़ (अवैध तस्करी) |
रामगढ़ के सहायक आयुक्त उत्पाद ने इस मामले को लेकर रांची के सहायक आयुक्त उत्पाद को 30 अप्रैल को एक बेहद सीक्रेट और आधिकारिक पत्र लिखा था। इस पत्र में साफ तौर पर रांची के अधिकारियों से इस पूरे नेक्सस की जांच करने की मांग की गई थी।
जेएसबीसीएल (JSBCL) गोदाम से कैसे बदला जाता है रूट?
झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के गोदामों से सरकारी नियमों के तहत हर खुदरा दुकान के लिए शराब का आवंटन (Allocation) किया जाता है। नियम यह कहता है कि जिस दुकान के नाम पर परमिट कटा है, शराब की पेटी सीधे उसी दुकान के काउंटर पर अनलोड होनी चाहिए।
लेकिन Ranchi Liquor Scam के शातिर खिलाड़ी अपने फायदे के लिए इस पूरी चेन को ही हाईजैक कर लेते हैं। पिस्का स्टेशन (नगड़ी) स्थित जेएसबीसीएल गोदाम से गाड़ी परमिट लेकर तो रांची की दुकान के लिए निकलती है, लेकिन रास्ते में ही उसे किसी और जिले या अवैध ठिकानों पर भेज दिया जाता है। इसके बदले में सिंडिकेट के गुर्गों को मोटी ब्लैक मनी और मुनाफा मिलता है।
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सब कुछ जानकर भी क्यों सो रहा है उत्पाद विभाग?
अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह उठता है कि जब विभाग के आला अधिकारियों को इस पूरे खेल की भनक है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? ‘लोकल खबर’ को मिले इनपुट्स के अनुसार, अधिकारी इसके पीछे एक अजीब सा तर्क दे रहे हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि अगर इन दुकानों को तुरंत सील किया गया या लाइसेंस सस्पेंड किए गए, तो राज्य सरकार का राजस्व (Revenue) प्रभावित होगा। यानी सरकारी खजाने को नुकसान न हो, इस बहाने के पीछे शराब माफिया को खुलेआम अवैध तरीके से दुकानें चलाने की मौन सहमति दे दी गई है।
रांची और रामगढ़ उत्पाद अधिकारियों के बीच की चिट्ठी
30 अप्रैल को रामगढ़ के सहायक आयुक्त उत्पाद द्वारा रांची के सहायक आयुक्त को लिखे गए पत्र को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है। रामगढ़ के उत्पाद दारोगा ने जब कोठार ओवर ब्रिज के पास गाड़ी पकड़ी थी, तो ड्राइवर के पास जो कागजात मिले, वो रांची के कोतवाली थाना क्षेत्र के हरमू बाईपास रोड स्थित मुक्तिधाम के पास की कंपोजिट शराब दुकान के थे।

परमिट रांची का था, गाड़ी रामगढ़ में पकड़ी गई। इस बात को बीते हुए डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन रांची के सहायक आयुक्त उत्पाद ने अब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं की है। फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जो सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
राजस्व का बहाना और माफिया का फायदा
Ranchi Liquor Scam पर हमारी इन-डेप्थ एनालिसिस (In-depth Analysis) कहती है कि यह सिर्फ एक या दो दुकानों का मामला नहीं है। यह सीधे तौर पर झारखंड के राजस्व को अरबों रुपये का चूना लगाने की एक सोची-समझी साजिश है।
मुख्य बिंदु जिनपर ध्यान देना जरूरी है:
- सुरक्षा का खतरा: जब असली लाइसेंसधारी मौके पर नहीं होता, तो दुकानों से मिलावटी या अवैध शराब बेचे जाने का खतरा 200% बढ़ जाता है।
- लोकल क्राइम को बढ़ावा: ऐसी बेनामी दुकानों के आस-पास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ जाता है, जैसा कि हरमू और नामकुम के इलाकों से स्थानीय लोगों ने शिकायत भी की है।
- सिंडिकेट का दबाव: छोटे और ईमानदार शराब व्यापारियों को इस बड़े सिंडिकेट के कारण धंधा छोड़ना पड़ रहा है।
निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई की मांग
आखिर कब तक राजस्व के नुकसान का डर दिखाकर इस Ranchi Liquor Scam को पाला-पोसा जाएगा? रांची के जागरूक नागरिकों और विपक्षी संगठनों ने अब इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री और उत्पाद मंत्री से उच्च स्तरीय जांच (High-Level Inquiry) की मांग की है। रामगढ़ में जब्त हुई 170 पेटी शराब के मुख्य सरगनाओं को जब तक सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक रांची की सड़कों पर यह अवैध खेल ऐसे ही चलता रहेगा। ‘लोकल खबर’ इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है और आगे भी इस स्कैम से जुड़े हर एक नाम का खुलासा जनता के सामने करता रहेगा।








