जमुई के इंजीनियर के 4 ठिकानों पर EOU की बड़ी रेड, कमाई से 81% ज़्यादा की संपत्ति देख अधिकारी भी हैरान

BREAKING NEWS: बिहार में सुबह-सुबह EOU की बड़ी कार्रवाई, जमुई के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के 4 ठिकानों पर छापेमारी

पटना/जमुई: बिहार में भ्रष्ट सरकारी अफसरों के खिलाफ नीतीश सरकार और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) का हंटर एक बार फिर चला है। जमुई में तैनात ग्रामीण कार्य विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर गोपाल कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में शनिवार सुबह-सुबह EOU की टीमों ने एक साथ चार ठिकानों पर धावा बोल दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है।

शुरुआती जांच और सत्यापन में जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। इंजीनियर साहब ने अपनी वैध कमाई से करीब 81.5 प्रतिशत अधिक संपत्ति अवैध तरीके से बटोरी है। न्यायालय निगरानी से सर्च वारंट मिलने के बाद EOU की अलग-अलग टीमें राजधानी पटना से लेकर जमुई और झाझा तक खंगाल रही हैं।

मोबाइल स्क्रीन पर इस खबर को पढ़ रहे आम टैक्सपेयर्स के लिए यह जानना जरूरी है कि आपकी गाढ़ी कमाई का पैसा कैसे कुछ रसूखदार अफसरों की तिजोरियों में बंद हो रहा है। सुबह की चाय के साथ शुरू हुई यह छापेमारी फिलहाल जारी है, और सूत्रों के मुताबिक कई बेनामी संपत्तियों और निवेश के कागजात हाथ लगे हैं।

सुबह 6 बजे कंकड़बाग से जमुई तक खलबली: कहां-कहां चल रही है रेड?

ग्राउंड से मिल रही सीधी रिपोर्ट के मुताबिक, EOU की स्पेशल टीमों ने शनिवार की अलसुबह गोपाल कुमार के रसूख और आलीशान ठिकानों की घेराबंदी की। जिन चार जगहों पर इस वक्त सर्च ऑपरेशन चल रहा है, वे इस प्रकार हैं:

  • ठिकाना 1: पटना के पॉश इलाके मजिस्ट्रेट कॉलोनी, ज्योतिपुरम स्थित ‘जगत विला अपार्टमेंट’ का फ्लैट।
  • ठिकाना 2: पटना के कंकड़बाग (पूर्वी इंदिरा नगर, रोड नंबर-4) स्थित निजी आलीशान आवास।
  • ठिकाना 3: जमुई में के.के.एम. कॉलेज के पास स्थित उनका आलीशान किराए का मकान।
  • ठिकाना 4: झाझा (जमुई) स्थित उनका एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का सरकारी कार्यालय।

ग्राउंड जीरो अपडेट: कंकड़बाग और मजिस्ट्रेट कॉलोनी वाले ठिकानों पर जैसे ही EOU की गाड़ियां रुकीं, आसपास के लोग सन्न रह गए। इंजीनियर के परिजनों को फोन तक इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी गई है। घर के अंदर मौजूद लॉकरों को खोलने के लिए एक्सपर्ट्स को बुलाया गया है।

आंकड़ों का खेल: 81.5% की अवैध छलांग और 2 करोड़ का शुरुआती हिसाब

EOU के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गोपाल कुमार के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। गुप्त सत्यापन के बाद आर्थिक अपराध इकाई थाना में मामला दर्ज किया गया।

$$ \text{अवैध संपत्ति} \approx \text{₹2,00,61,000} \quad (\text{वैध आय से } 81.5\% \text{ अधिक}) $$

प्राथमिक जांच में ही 2 करोड़ 61 हजार रुपये की ऐसी संपत्ति का पता चला है, जिसका इंजीनियर के पास कोई वैध जरिया या हिसाब नहीं है। यह आंकड़ा सिर्फ शुरुआती फाइलों के आधार पर है; सूत्रों का कहना है कि जब कंकड़बाग और जगत विला अपार्टमेंट के लॉकर पूरी तरह खुलेंगे, तो यह आंकड़ा कई गुना ऊपर जा सकता है।

क्या-क्या मिलने की है उम्मीद?

डिजिटल इनवेस्टिगेशन और ग्राउंड इनपुट्स के आधार पर, छापेमारी टीम मुख्य रूप से इन चीजों को तलाश रही है:

  1. पटना और अन्य शहरों में जमीनों के डीड (Plat Deeds)
  2. सोने-चांदी के गहने और भारी मात्रा में कैश
  3. विभिन्न बैंकों के खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के कागजात
  4. शेल कंपनियों या रिश्तेदारों के नाम पर किए गए गुप्त निवेश

आम आदमी पर असर: आपकी सड़क का पैसा इंजीनियर की तिजोरी में?

बिहार में जब भी किसी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) पर रेड होती है, तो उसका सीधा संबंध सीधे आम जनता के विकास कार्य से जुड़ता है। ग्रामीण कार्य विभाग के जिम्मे गांवों की सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचा तैयार करना होता है।

जब योजना का एक बड़ा हिस्सा (जैसा कि इस मामले में 81.5% की अवैध संपत्ति से साफ है) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है, तो सड़कें पहली ही बरसात में टूट जाती हैं। जमुई और झाझा के ग्रामीण इलाकों के लोग आज इस कार्रवाई को देखकर कह रहे हैं—“साहब कमा रहे थे, और हमारी सड़कें गड्ढों में तब्दील हो रही थीं।”

आगे क्या? लॉकर खुलते ही बाहर आएंगे कई बड़े सफेदपोशों के नाम

EOU के आला अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम तक बकायदा प्रेस नोट जारी कर बरामदगी की पूरी लिस्ट साझा की जाएगी।

सिस्टम का अगला कदम:

  • गोपाल कुमार को सस्पेंड करने के लिए विभाग को पत्र भेजा जाएगा।
  • जब्त दस्तावेजों के आधार पर बेनामी संपत्ति कानून के तहत कार्रवाई होगी।
  • इस बात की भी जांच होगी कि इस काली कमाई के तार पटना के किन बड़े सिंडिकेट या सफेदपोशों से जुड़े हैं।

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार के लिए यह रेड एक बड़ा संदेश है, लेकिन सवाल वही है—आखिर सिस्टम की नाक के नीचे अफसर इतनी बड़ी रकम कैसे बटोर लेते हैं?

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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