Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची के रातू इलाके से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने शासन और प्रशासन के गलियारों में खलबली मचा दी है। करीब 90 हजार सीएफटी जब्त बालू के रहस्यमयी तरीके से ‘गायब’ होने और उसे अन्यत्र बेच दिए जाने के आरोपों के बाद खान निदेशालय ने सख्त रुख अख्तियार किया है। खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
क्या है पूरा मामला? क्यों मचा है रातू में बवाल?
घटनाक्रम की शुरुआत 12 मई को हुई जब रांची के जिला खनन पदाधिकारी (DMO) अबु हुसैन ने रातू थाना क्षेत्र के चटकपुर में छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध बालू का स्टॉक जब्त किया था। स्थानीय ग्रामीणों और बालू कारोबारियों का आरोप है कि डीएमओ ने जब्त किए गए लगभग 50 से 60 हाइवा बालू (करीब 90 हजार सीएफटी) को सुरक्षित रखने के बजाय रातों-रात अन्य जगहों पर भेजकर ठिकाने लगा दिया।
आरोप है कि 14 मई की रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच करीब 15 हाइवा के जरिए बालू को मौके से हटाया गया। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो प्रशासन की ओर से सरकारी संपत्ति का हवाला देकर उन्हें पीछे हटा दिया गया। अब खान विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या वाकई जब्त बालू की अवैध बिक्री हुई है या इसके पीछे कोई और खेल है।
तीन सदस्यीय टीम करेगी दूध का दूध और पानी का पानी
खान विभाग ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। खान निदेशक द्वारा गठित जांच कमेटी में निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं:
- संजीव कुमार: खान उपनिदेशक, दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल।
- एक एडीएम (ADM): जिनका नाम रांची डीसी द्वारा तय किया जाएगा।
- एक कार्यपालक दंडाधिकारी: प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए।
यह टीम न केवल मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करेगी, बल्कि उन आरोपों की भी पड़ताल करेगी जिनमें कहा गया है कि ‘जब्त बालू’ को सरकारी रिकॉर्ड में चढ़ाए बिना ही गायब कर दिया गया।
25 मई को होनी है 2.53 लाख सीएफटी बालू की नीलामी
एक तरफ जहाँ बालू चोरी के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रांची डीसी ने जिले के विभिन्न हिस्सों से जब्त कुल 2.53 लाख सीएफटी बालू की नीलामी का आदेश जारी कर दिया है।
- नीलामी की तारीख: 25 मई, दोपहर 3 बजे।
- स्थान: समाहरणालय, रांची।
- कुल रिजर्व प्राइस: 30 लाख 46 हजार 400 रुपये।
हैरानी की बात यह है कि चटकपुर (रातू) से जब्त जिस बालू पर विवाद हो रहा है, उसे भी इस नीलामी सूची में रखा गया है। लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि वहाँ अब वह बालू मौजूद ही नहीं है जिसे नीलाम किया जाना है।
आम आदमी और पर्यावरण पर असर: सिस्टम पर उठते सवाल
बालू की अवैध निकासी और सरकारी संरक्षण में इसके ‘गायब’ होने की खबरों ने आम जनता के बीच सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो राज्य के राजस्व को होने वाली करोड़ों की हानि को कौन रोकेगा? इस मामले का असर आने वाले दिनों में रांची के निर्माण क्षेत्र और बालू की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
प्रशासन की अगली चाल
जांच कमेटी को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यदि डीएमओ या किसी अन्य अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो झारखंड सरकार उन पर कड़ी विभागीय कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल, रातू इलाके में तनाव का माहौल है और ग्रामीण प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजरें गड़ाए हुए हैं।










