आम आदमी की जेब पर ‘सोने’ की चोट: सरकार ने रातों-रात बढ़ाया टैक्स, अब क्या फिर बढ़ेगी तस्करी?

आम आदमी की जेब पर 'सोने' की चोट: सरकार ने रातों-रात बढ़ाया टैक्स, अब क्या फिर बढ़ेगी तस्करी?

New Delhi | देश के करोड़ों परिवारों के लिए आज एक झकझोरने वाली खबर आई है। केंद्र सरकार ने बुधवार, 13 मई को बड़ा आर्थिक प्रहार करते हुए सोने और चांदी के आयात (Import) पर लगने वाली ड्यूटी में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है। जो इंपोर्ट टैरिफ कल तक 6% था, वह अब सीधा 15% पर पहुँच गया है। सरकार के इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से सर्राफा बाजार में हड़कंप मच गया है और आशंका है कि कल सुबह जब दुकानें खुलेंगी, तो सोने की कीमतें आसमान छू रही होंगी।

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला? रुपये को बचाने की जद्दोजहद

भारत अपनी सोने की कुल खपत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। इसके लिए हमें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। जब हम भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं, तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange) कम होता है और चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ जाता है। वर्तमान में डॉलर के मुकाबले रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर है। सरकार का सीधा लक्ष्य सोने की मांग को कम करना है ताकि रुपये की गिरती सेहत को सुधारा जा सके।

इस 15% टैक्स स्ट्रक्चर में 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) शामिल किया गया है।

स्मगलिंग का ‘ग्रे मार्केट’ फिर होगा एक्टिव? विशेषज्ञों की चेतावनी

बाजार विशेषज्ञों और इंडस्ट्री के दिग्गजों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। साल 2024 में जब सरकार ने ड्यूटी घटाई थी, तब सोने की तस्करी (Smuggling) में भारी गिरावट देखी गई थी क्योंकि वैध तरीके से सोना मंगाना सस्ता था।

  • मुनाफे का गणित: अब 15% टैक्स का मतलब है कि अवैध तरीके से सोना लाने वालों को सीधा 15% का मार्जिन मिलेगा।
  • सुरक्षा चुनौती: जानकारों का कहना है कि ऊंचे टैक्स रेट से ‘ग्रे मार्केट’ फिर से सक्रिय हो सकता है, जिससे न केवल राजस्व का नुकसान होगा बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती भी बढ़ जाएगी।

शादियों के सीजन पर ‘ग्रहण’: क्या और महंगा होगा गहना?

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। पहले से ही सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर पर हैं, और अब 9% की अतिरिक्त टैक्स बढ़ोतरी से घरेलू बाजार में कीमतें प्रति 10 ग्राम हजारों रुपये बढ़ सकती हैं।

आम आदमी पर असर: मिडिल क्लास परिवार जो शादियों के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे थे, उनके बजट में अब बड़ा छेद होने वाला है। सर्राफा व्यापारियों का मानना है कि ऊंची कीमतों की वजह से ग्राहक बाजार से दूरी बना सकते हैं, जिससे ज्वेलरी सेक्टर की चमक फीकी पड़ सकती है।

पीएम मोदी की अपील और ‘स्वदेशी’ का मंत्र

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से बेहद भावुक और रणनीतिक अपील की थी। पीएम ने कहा था कि “कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचें।” उन्होंने स्पष्ट किया था कि सोना खरीदने की हमारी होड़ देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करती है क्योंकि हमारा पैसा विदेशों में चला जाता है। सरकार चाहती है कि लोग सोने के बजाय ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाएं और स्थानीय उत्पादों में निवेश करें।

आगे क्या होगा?

सरकार का यह कदम एक कड़वी दवा की तरह है। एक तरफ देश की करेंसी (रुपया) को बचाना जरूरी है, तो दूसरी तरफ आम जनता की जेब और ज्वेलरी इंडस्ट्री का भविष्य दांव पर है। आने वाले दिनों में सीमा शुल्क विभाग और DRI (Directorate of Revenue Intelligence) को एयरपोर्ट्स और बॉर्डर पर चौकसी दोगुनी करनी होगी। अब देखना यह है कि क्या जनता पीएम की अपील मानकर सोने से दूरी बनाती है या फिर ऊंची कीमतों के बावजूद ‘गोल्ड मोह’ बरकरार रहता है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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