रिम्स में खौफनाक सुबह: चतरा के युवक ने अस्पताल में लगाई फांसी, सुरक्षा के दावों के बीच सिस्टम पर खड़े हुए 10 बड़े सवाल

रिम्स में खौफनाक सुबह: चतरा के युवक ने अस्पताल में लगाई फांसी, सुरक्षा के दावों के बीच सिस्टम पर खड़े हुए 10 बड़े सवाल

रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) से शुक्रवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। चतरा के रहने वाले विवेक कुमार, जो पिछले एक महीने से जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, उन्होंने अस्पताल के वार्ड में ही फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जब सुबह वार्ड में अन्य मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों की नजर उन पर पड़ी, तो वहां चीख-पुकार मच गई। सुरक्षा गार्डों और सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी के बावजूद एक मरीज का इस तरह आत्मघाती कदम उठाना रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था और ‘पेशेंट केयर’ प्रोटोकॉल पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

अप्रैल से चल रहा था इलाज, नशे की लत ने छीनी सुध-बुध

मृतक विवेक कुमार चतरा जिले का रहने वाला था और उसे अप्रैल महीने में रिम्स में भर्ती कराया गया था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विवेक गांजे के अत्यधिक सेवन (ड्रग एडिक्शन) का शिकार था, जिसके कारण उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। डॉक्टरों की टीम उसकी रिकवरी में जुटी थी, लेकिन शुक्रवार की भोर में उसने मौत को गले लगा लिया। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या वह अस्पताल में अकेलेपन या किसी मानसिक अवसाद (Depression) का शिकार था।

रिम्स की सुरक्षा में सेंध या लापरवाही?

झारखंड का ‘लाइफलाइन’ कहा जाने वाला रिम्स हमेशा अपनी चाक-चौबंद सुरक्षा का दावा करता है, लेकिन इस घटना ने उन दावों की हवा निकाल दी है।

  • वार्ड बॉय और नर्स कहाँ थे? जब विवेक फांसी लगा रहा था, तब ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
  • मेंटल हेल्थ काउंसलिंग का अभाव: क्या रिम्स में भर्ती गंभीर मरीजों की मानसिक स्थिति की जांच की जाती है?
  • सीधे सवाल: क्या नशे की लत से जूझ रहे मरीजों के लिए कोई विशेष निगरानी सेल है?

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई: जांच के घेरे में अस्पताल प्रबंधन

सूचना मिलते ही बरियातू थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे हर एंगल से जांच कर रहे हैं। क्या युवक ने किसी तनाव में यह कदम उठाया या फिर उसे उचित समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाई? अस्पताल प्रबंधन से भी जवाब-तलब किया जा रहा है। रिम्स के कुछ स्टाफ से पूछताछ की जा रही है कि आखिर सुबह के वक्त वार्ड की निगरानी में चूक कैसे हुई।

“हम मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों और समय का पता चल पाएगा। अस्पताल की सुरक्षा और वार्ड की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली जा रही है।”

जांच अधिकारी, रांची पुलिस

इस घटना के बाद रिम्स में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल है। झारखंड स्वास्थ्य विभाग इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे सकता है। यह मामला न केवल एक आत्महत्या है, बल्कि यह रिम्स जैसे बड़े संस्थान में मरीजों की मानसिक काउंसलिंग और सुरक्षा ढांचे में बड़े सुधार की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment