रांची पहाड़ी मंदिर में ‘राजेश कुमार साहू’ की फिर हुई वापसी: नई समिति के गठन के साथ ही क्यों बदला शहर का धार्मिक समीकरण?

रांची पहाड़ी मंदिर में 'राजेश कुमार साहू' की फिर हुई वापसी: नई समिति के गठन के साथ ही क्यों बदला शहर का धार्मिक समीकरण?

Ranchi: राजधानी रांची की पहचान और आस्था के सबसे बड़े केंद्र, पहाड़ी मंदिर के प्रबंधन को लेकर चल रहा इंतजार अब खत्म हो गया है। झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर की नई संचालन समिति की घोषणा कर दी है। सबसे ज्यादा चर्चा राजेश कुमार साहू की है, जिन्हें एक बार फिर इस महत्वपूर्ण टीम में शामिल किया गया है। आखिर इस पुनर्गठन के मायने क्या हैं और आने वाले 5 वर्षों में पहाड़ी बाबा के दरबार की सूरत कितनी बदलेगी? आइए समझते हैं इस ग्राउंड रिपोर्ट में।

पहाड़ी मंदिर समिति का नया चेहरा: किसे मिली कमान?

झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नई समिति का ढांचा काफी मजबूत रखा गया है। मंदिर के सुचारू संचालन और न्यायिक पारदर्शिता के लिए माननीय न्यायाधीश एस. एन. पाठक को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

लेकिन, जमीन पर काम करने वाले चेहरों में राजेश कुमार साहू का नाम सबसे अहम माना जा रहा है। श्री शिव बारात आयोजन महासमिति के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उनकी सक्रियता को देखते हुए बोर्ड ने उन्हें आगामी 5 वर्षों के लिए पुन: सदस्य मनोनीत किया है। उनके साथ ही विजय पाठक को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में जगह मिली है।

प्रशासनिक पहरे में आस्था: ‘पावरफुल’ विशेष आमंत्रित सदस्य

इस बार की समिति केवल धार्मिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक रूप से भी बेहद ‘पावरफुल’ नजर आ रही है। समिति में विशेष आमंत्रित सदस्यों के तौर पर इन दिग्गजों को शामिल किया गया है:

  • क्षेत्रीय सांसद और विधायक
  • रांची उपायुक्त (DC)
  • वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP)
  • सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO)

प्रशासनिक अधिकारियों के सीधे जुड़ाव से मंदिर के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा संबंधी फाइलों को अब सरकारी दफ्तरों में धूल नहीं फांकनी होगी। अतिक्रमण और क्राउड मैनेजमेंट जैसे मुद्दों पर अब त्वरित फैसले लिए जा सकेंगे।

राजेश कुमार साहू की वापसी के पीछे का ‘लॉजिक’

राजेश कुमार साहू को दोबारा जिम्मेदारी मिलना महज इत्तेफाक नहीं है। उनके पास शिव बारात जैसे विशाल आयोजनों का दशकों का अनुभव है।

  1. अनुभव का लाभ: पहाड़ी मंदिर में सावन और शिवरात्रि के दौरान लाखों की भीड़ उमड़ती है। राजेश साहू की पकड़ स्थानीय स्वयंसेवकों और भक्तों के बीच गहरी है।
  2. विकास को गति: पिछली कार्यकालों में मंदिर के विकास कार्यों में उनकी सक्रियता देखी गई है।
  3. जनता का भरोसा: समिति की घोषणा होते ही भक्तों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने राजेश साहू को बधाई दी, जो उनकी जमीनी लोकप्रियता को दर्शाता है।

चुनौतियां और उम्मीदें: क्या बदलेगा पहाड़ी मंदिर में?

रांची का पहाड़ी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर है (जहाँ देश का तिरंगा भी फहराया जाता है)। नई समिति के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं:

  • सौंदर्यीकरण का रुका हुआ काम: मंदिर की सीढ़ियों और ऊपरी परिसर के जीर्णोद्धार की योजना को समय पर पूरा करना।
  • भक्तों की सुविधाएं: पीने का पानी, शेड और कतार प्रबंधन को डिजिटल तकनीक से जोड़ना।
  • ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण: पहाड़ की भूगर्भीय मजबूती को बनाए रखते हुए निर्माण कार्य करना।

समिति के एक सदस्य के अनुसार: “हमारा लक्ष्य सिर्फ पूजा-पाठ का प्रबंधन नहीं, बल्कि पहाड़ी मंदिर को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना है।”

आगे क्या?

नई समिति का गठन रांची के धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने के लिए एक सकारात्मक संकेत है। राजेश कुमार साहू के अनुभव और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्ति मिलकर पहाड़ी मंदिर के गौरव को और बढ़ा सकती है। अब शहर की नजरें पहली औपचारिक बैठक पर टिकी हैं, जहाँ विकास का नया रोडमैप तैयार होगा।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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