रांची (खेलगांव): झारखंड के ग्रामीण इलाकों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। राजधानी रांची के खेलगांव स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह’ के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीधे तौर पर गांवों को “पावर सेंटर” बनाने की घोषणा कर दी है। अब ग्रामीणों को आधार कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के लिए शहर के चक्कर नहीं काटने होंगे, क्योंकि यह सुविधा अब आपकी अपनी ग्राम पंचायत में ही मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार “हेडक्वार्टर” से नहीं, बल्कि “खेत-खलिहानों” से चलती है। इस सम्मेलन में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के हजारों मुखियाओं के बीच सीएम ने न केवल करोड़ों की प्रोत्साहन राशि बांटी, बल्कि जल संकट से निपटने और सोलर पावर से कमाई करने का नया ‘झारखंड मॉडल’ भी पेश किया।
आधार कार्ड के लिए नहीं भटकेंगे ग्रामीण, पंचायतों को मिला नया अधिकार
इस ऐतिहासिक सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण UIDAI (आधार) के साथ हुआ नया समझौता (MoU) रहा। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हस्ताक्षरित इस MoU के बाद अब राज्य की ग्राम पंचायतों में ही आधार से जुड़े काम हो सकेंगे।
क्यों है यह फैसला खास?
- दूरी का खात्मा: सुदूर इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों और दिव्यांगों को अब आधार अपडेट के लिए प्रखंड कार्यालय या शहर नहीं जाना होगा।
- CSC का सशक्तिकरण: गांवों में स्थित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) अब आधार केंद्रों के रूप में काम करेंगे।
- भ्रष्टाचार पर लगाम: पंचायत स्तर पर काम होने से बिचौलियों का प्रभाव कम होगा।
करोड़ों का इनाम: उत्कृष्ट पंचायतों की झोली में आई प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बेहतर कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों, ग्राम सभाओं और जिला परिषदों को सम्मानित किया।
”अच्छे कार्यों को पहचानना और उन्हें सम्मानित करना जरूरी है, ताकि दूसरे लोग भी प्रेरित हों। यह प्रोत्साहन राशि केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि ग्रामीण सशक्तिकरण का ईंधन है।” — हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री
चयनित पंचायतों को ‘उत्कृष्ट ग्राम पंचायत’ और ‘स्वच्छ एवं स्वस्थ पंचायत’ जैसी श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जब जड़ (गांव) मजबूत होगी, तभी विकास का पेड़ फल देगा।
खेतों में बिजली उगाकर अमीर बनेंगे किसान: सोलर पावर का ‘आय मंत्र’
सीएम सोरेन ने किसानों के लिए एक क्रांतिकारी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वैसी जमीन जहां खेती नहीं होती या जो बंजर पड़ी है, वहां ग्रामीण सोलर पावर प्लांट लगाएं।
- बिजली खरीदेगी सरकार: इन प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को सरकार सीधे खरीदेगी, जिससे किसानों को खेती के साथ-साथ एक तय मासिक आय भी मिलेगी।
- जल संरक्षण पर जोर: गर्मी की तपिश को देखते हुए सीएम ने मुखियाओं को निर्देश दिया कि तालाबों के गहरीकरण और चापाकलों के पास ‘सोक पिट’ (Soke Pit) का निर्माण युद्ध स्तर पर कराएं ताकि भूजल स्तर बना रहे।
ग्राउंड रिपोर्ट: राजधानी से नहीं, पंचायत से चल रही सरकार
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री का लहजा पूरी तरह आक्रामक और जन-केंद्रित रहा। उन्होंने पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि पहले सुदूर क्षेत्रों तक न सरकार की आवाज पहुंचती थी और न योजनाएं। लेकिन अब पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान किया जा रहा है।
इस मौके पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, डॉ. इरफान अंसारी और शिल्पी नेहा तिर्की सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों को चेतावनी और सलाह दोनों दी कि वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरें, क्योंकि सरकार का खजाना अब सीधे पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए खुला है।
क्या बदलेगी झारखंड के गांवों की सूरत?
आधार कार्ड का अधिकार पंचायतों को देना और सोलर फार्मिंग को बढ़ावा देना, हेमंत सोरेन सरकार का एक बड़ा दांव माना जा रहा है। यदि इसका क्रियान्वयन सही ढंग से हुआ, तो झारखंड का ग्रामीण मॉडल देश के लिए मिसाल बन सकता है। अब गेंद जनप्रतिनिधियों (मुखियाओं) के पाले में है कि वे इन संसाधनों का उपयोग गांव के अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचाते हैं।










