UPSC Success Story | यूपीएससी (UPSC) की डगर कितनी कठिन है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के लाखों छात्र सालों-साल किताबों में डूबे रहते हैं, फिर भी सफलता कोसों दूर रहती है। लेकिन असम की बेटी लीजा गर्ग (Liza Garga) की कहानी उन सभी के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है जो बार-बार मिल रही असफलता से हार मान चुके हैं। लगातार तीन बार प्रीलिम्स की दहलीज पर दम तोड़ने वाली लीजा ने चौथे प्रयास में न केवल परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया रैंक (AIR) 303 हासिल कर सबको चौंका दिया है।
लीजा की यह जीत केवल एक परीक्षा की सफलता नहीं है, बल्कि उस ’75 डेज स्मार्ट स्टडी प्लान’ की जीत है, जिसने उन्हें इंजीनियरिंग के सुरक्षित करियर और विदेश जाने के सपने से निकालकर देश की नौकरशाही के शीर्ष तक पहुँचाया।
हार के अंधेरे से AIR 303 तक का सफर
असम के नगांव में जन्मी और गुवाहाटी में पली-बढ़ी लीजा गर्ग का शुरुआती सपना विदेश में पढ़ाई करने का था। एनआईटी (NIT) सिलचर से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद सब कुछ ट्रैक पर था, लेकिन कोविड-19 महामारी ने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने देश सेवा के लिए यूपीएससी को चुना। हालांकि, शुरुआत बेहद दर्दनाक रही। पहले, दूसरे और तीसरे प्रयास में वह प्रीलिम्स तक क्लियर नहीं कर पाईं। अक्सर छात्र यहीं आकर हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन लीजा ने अपनी एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग को ही अपनी ताकत बना लिया।
75 दिनों का ‘गेम-चेंजर’ चैलेंज: क्या थी लीजा की स्ट्रैटेजी?
जब लीजा ने चौथे प्रयास में प्रीलिम्स की बाधा पार की, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—समय। मेंस (Mains) की तैयारी के लिए उनके पास केवल 75 दिन बचे थे। इसी वक्त उन्होंने एक ऐसा ‘स्मार्ट चैलेंज’ तैयार किया जिसने आज उन्हें एक अफसर बना दिया है।
1. सोर्सेस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: लीजा ने सबसे पहले किताबों के ढेर को कम किया। उन्होंने ‘लिमिटेड बुक्स, मैक्सिमम रिवीजन’ का मंत्र अपनाया। 10 नई किताबें पढ़ने के बजाय उन्होंने एक ही स्टैंडर्ड सोर्स को 10 बार रिवाइज किया।
2. PYQs और आंसर राइटिंग: उन्होंने पिछले सालों के प्रश्नपत्रों (PYQs) का पोस्टमार्टम किया और यह समझा कि यूपीएससी क्या पूछना चाहता है। हर दिन घंटों आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस की ताकि परीक्षा हॉल में हाथ न रुकें और जवाबों में स्ट्रक्चरल क्लैरिटी रहे।
3. ऑप्शनल पर स्ट्रिक्ट फोकस: लीजा जानती थीं कि मेंस में ऑप्शनल सब्जेक्ट ही रैंक दिलाता है। उन्होंने अपने डेली टारगेट का एक बड़ा हिस्सा ऑप्शनल को दिया, जिससे उनका स्कोर 973 के कुल आंकड़े तक पहुँच सका।
आंकड़ों में समझिए सफलता की गूंज
लीजा को मिली रैंक 303 उनके दृढ़ संकल्प का नतीजा है। उन्हें कुल 973 अंक प्राप्त हुए हैं, जिनका ब्रेकअप कुछ इस प्रकार है:
- लिखित परीक्षा (Mains): 775 अंक
- इंटरव्यू (Personality Test): 198 अंक
सिस्टम पर असर और युवाओं के लिए सबक
लीजा गर्ग की सफलता यह साबित करती है कि यूपीएससी केवल ‘मेहनत’ का नहीं, बल्कि ‘रणनीति’ का खेल है। उनका चयन असम जैसे राज्यों के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कोचिंग के अभाव या सीमित संसाधनों के कारण पीछे हट जाते हैं। प्रशासन को भी ऐसे जुझारू अधिकारियों की जरूरत है जो संकट के समय (जैसे 75 दिन का चैलेंज) दबाव को झेलने और परिणाम देने की क्षमता रखते हों।
आगे क्या? लीजा अब प्रशासनिक सेवाओं में शामिल होकर ग्राउंड लेवल पर बदलाव लाने के लिए तैयार हैं। उनकी कहानी यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम भी अपनी असफलताओं के कारणों का ईमानदारी से विश्लेषण कर रहे हैं?











