बिहार में महासंग्राम: नीतीश के राज्यसभा जाने की खबर से भड़का आक्रोश, क्या JDU में होने वाली है बड़ी टूट?

बिहार में महासंग्राम: नीतीश के राज्यसभा जाने की खबर से भड़का आक्रोश, क्या JDU में होने वाली है बड़ी टूट?

पटना | बिहार की सियासत में आज जो मंजर मुख्यमंत्री आवास (1 अणे मार्ग) के बाहर दिखा, उसने दिल्ली से लेकर पटना तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं ने न केवल बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि JDU कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है। कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि वे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते हुए नहीं देखना चाहते। गुस्सा इतना है कि जेडीयू नेता कृष्ण मुरारी शरण को आवास के भीतर जाने से रोक दिया गया और ‘नीतीश कुमार जिंदाबाद’ के नारों के साथ हवा में भारी तनाव तैर रहा है।

“हमारी होली बर्बाद कर दी गई” – कार्यकर्ताओं का छलका दर्द

मुख्यमंत्री आवास के बाहर जमा हजारों कार्यकर्ताओं की आंखों में गुस्सा और नमी साफ देखी जा सकती है। जेडीयू नेता राजीव रंजन पटेल ने कड़े शब्दों में अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि कल से चल रही इन खबरों ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ दिया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:

"हमारी होली बर्बाद कर दी गई" – कार्यकर्ताओं का छलका दर्द

“किसी जेडीयू नेता ने कल होली नहीं मनाई। कार्यकर्ताओं ने खून-पसीना एक करके नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए बहुमत दिलाया था, इसलिए नहीं कि वे बीच में ही कार्यकाल छोड़ दें। बिहार की जनता रो रही है, हम बिहार की बागडोर किसी और के हाथ में नहीं जाने देंगे।”

निशांत कुमार को राज्यसभा भेजो, नीतीश ही रहेंगे CM: नई मांग

प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने एक नया प्रस्ताव सामने रख दिया है। कार्यकर्ताओं की मांग है कि यदि राज्यसभा की सीट भरनी ही है, तो नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को दिल्ली भेजा जाए, लेकिन बिहार की कमान नीतीश कुमार के पास ही सुरक्षित रहनी चाहिए। पटेल ने सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी को लगता है कि उनके पास नेतृत्व बदलने की ताकत है, तो वे अभी चुनाव करा लें और अपना बहुमत साबित करें।

विपक्ष का तंज: “एक राजनीतिक अध्याय के अंत की कहानी”

इस पूरे ड्रामे पर विपक्ष ने भी चुटकी ली है। आरजेडी नेता मनोज झा ने इसे बिहार में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ (शिंदे गुट जैसा घटनाक्रम) दोहराने की भाजपा की कोशिश बताया है। झा ने कहा कि अगर इन खबरों में सच्चाई है, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़े अध्याय के अवसान (अंत) का संकेत है। दूसरी तरफ, सांसद अरुण भारती ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए कहा कि जब तक आधिकारिक सूचना नहीं आती, नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री हैं और बने रहेंगे।

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या यह भाजपा का ‘ऑपरेशन बिहार’ है?

पटना की सड़कों पर चर्चा गरम है कि क्या भाजपा बिहार में भी महाराष्ट्र जैसा कोई बड़ा फेरबदल करना चाहती है? जेडीयू कार्यकर्ताओं का डर जायज है क्योंकि उन्हें लगता है कि नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में जाना, बिहार में जेडीयू के अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है।

मुख्य बिंदु जो चिंता बढ़ा रहे हैं:

  • कार्यकर्ताओं की अनदेखी: नेताओं का आरोप है कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले जमीनी कार्यकर्ताओं से राय नहीं ली गई।
  • नेतृत्व का संकट: नीतीश के बिना जेडीयू का चेहरा कौन होगा? इस सवाल ने पार्टी के भीतर असुरक्षा पैदा कर दी है।
  • 2025 का लक्ष्य: कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने 2025 के लिए नीतीश के नाम पर वोट मांगा है, किसी और के लिए नहीं।

फिलहाल मुख्यमंत्री आवास के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात है। कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया है कि वे नीतीश कुमार को नामांकन भरने के लिए बाहर नहीं निकलने देंगे। अब गेंद नीतीश कुमार के पाले में है—क्या वे कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए बिहार में ही रुकेंगे, या दिल्ली की राजनीति की ओर कदम बढ़ाकर बिहार में एक नए नेतृत्व की नींव रखेंगे? अगले 24 घंटे बिहार की सत्ता और सियासत के लिए निर्णायक होने वाले हैं।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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