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रांची के RKDF यूनिवर्सिटी में ‘कार्निविस्टा 2026’ का धमाका: क्या आपने देखीं रैंप वॉक और लाइव बैंड की ये तस्वीरें?

रांची | राजधानी रांची के शैक्षणिक गलियारों में कल रात एक अलग ही रौनक देखने को मिली। मौका था आरकेडीएफ विश्वविद्यालय (RKDF University) के वार्षिक महोत्सव ‘कार्निविस्टा 2026’ का, जहाँ छात्रों के हुनर और आधुनिकता का ऐसा संगम दिखा कि लोग देखते रह गए। शाम 4 बजे शुरू हुआ यह जश्न देर रात तक चला, जिसमें रैंप वॉक से लेकर रॉक बैंड की धुनों ने पूरे परिसर को जोश से भर दिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. एस. चटर्जी और कुलसचिव डॉ. अमित कुमार पांडेय ने दीप प्रज्वलित कर इस महाकुंभ का आगाज किया। कैंपस की चकाचौंध और छात्र-छात्राओं का उत्साह यह बताने के लिए काफी था कि झारखंड के युवा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कला और संस्कृति के मंच पर भी झंडा गाड़ने को तैयार हैं।

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लाइव बैंड और सुरों की महफिल: जब झूम उठा पूरा कैंपस

‘कार्निविस्टा 2026’ की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की म्यूजिकल नाइट रही। जैसे ही स्टेज पर लाइव बैंड ने अपनी पहली धुन छेड़ी, पूरा ग्राउंड तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। छात्रों ने न केवल बॉलीवुड गानों पर अपनी प्रस्तुति दी, बल्कि लोक संगीत और फ्यूजन का भी तड़का लगाया।

कुलपति डॉ. चटर्जी ने अपने संबोधन में एक बड़ी बात कही— “शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है। कार्निविस्टा जैसे आयोजन छात्रों के व्यक्तित्व में वो निखार लाते हैं, जो उन्हें कॉर्पोरेट और असल दुनिया के लिए तैयार करता है।”

रैंप वॉक ने जीता दिल: ग्लैमर और आत्मविश्वास का संगम

इस साल के महोत्सव का ‘शो-स्टॉपर’ रहा यहाँ का रैंप वॉक कम्पटीशन। पारंपरिक परिधानों से लेकर वेस्टर्न फ्यूजन तक, छात्रों ने अपने स्टाइल और कॉन्फिडेंस से पेशेवर मॉडल्स को टक्कर दी।

  • आकर्षण का केंद्र: छात्रों द्वारा तैयार किए गए इनोवेटिव डिजाइन।
  • प्रतिक्रिया: दर्शकों और शिक्षकों ने खड़े होकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
  • मकसद: कुलसचिव डॉ. अमित कुमार पांडेय के अनुसार, इसका उद्देश्य छात्रों के स्टेज फियर (मंच के डर) को खत्म करना और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करना है।
रैंप वॉक ने जीता दिल: ग्लैमर और आत्मविश्वास का संगम

ग्राउंड रिपोर्ट: क्यों खास है इस बार का कार्निविस्टा?

हमारी टीम ने जब ग्राउंड पर छात्रों से बात की, तो एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिली। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार तकनीक और रचनात्मकता का ज्यादा इस्तेमाल दिखा। रंग-बिरंगी लाइटिंग और प्रोफेशनल साउंड सेटअप ने इसे किसी बड़े म्यूजिक फेस्टिवल जैसा फील दिया।

शिक्षकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से छात्रों में टीमवर्क और मैनेजमेंट स्किल्स आती हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन के पीछे भी छात्रों की एक बड़ी टीम का हाथ था, जिन्होंने वॉलंटियर के रूप में दिन-रात एक कर दिया।

विश्वविद्यालय का अगला कदम

आरकेडीएफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे भविष्य में इसे और भी बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं। आने वाले समय में इंटर-यूनिवर्सिटी कॉम्पिटिशन की भी संभावना है।

यह आयोजन सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि रांची के युवाओं के लिए एक संदेश है कि प्रतिभा को अगर सही मंच मिले, तो वह कमाल कर सकती है। क्या आपको लगता है कि झारखंड के विश्वविद्यालयों में ऐसे और भी बड़े आयोजन होने चाहिए?

विश्वविद्यालय का अगला कदम
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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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