Chaibasa। झारखंड के सियासी गलियारों से लेकर कारोबारी जगत तक उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शनिवार दोपहर सेंट्रल जीएसटी (CGST) की टीम ने चाईबासा के दिग्गज कारोबारी विनय ठाकुर के आवास पर अचानक दस्तक दी। विनय ठाकुर, राज्य के पूर्व कद्दावर मंत्री और झामुमो नेता मिथलेश ठाकुर के छोटे भाई हैं। सरकारी योजनाओं के बड़े ठेके लेने वाली कंपनी ‘सत्यम बिल्डर्स’ के मालिक के घर हुई इस कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब आठ अधिकारियों की इस हाई-प्रोफाइल टीम ने घंटों तक दस्तावेजों को खंगाला। जैसे ही अमला टोला स्थित आवासीय कार्यालय के बाहर इनोवा और स्कॉर्पियो गाड़ियां रुकीं, इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। आखिर इस कार्रवाई के पीछे की असली वजह क्या है और क्या यह सिर्फ एक रूटीन जांच है या किसी बड़े वित्तीय घोटाले की आहट?
दोपहर 2 बजे शुरू हुआ एक्शन, 4 बजे तक खंगाले गए कागजात
जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 2 बजे जमशेदपुर से आई CGST की टीम ने सीधे विनय ठाकुर के अमला टोला स्थित आवास और कार्यालय परिसर में प्रवेश किया। उस वक्त विनय ठाकुर शहर से बाहर बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों को घेर लिया और पिछले 3-4 वर्षों के टैक्स रिटर्न, इनवॉइस और टर्नओवर से जुड़े दस्तावेजों की मांग की।
जांच टीम ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर फोकस किया:
- इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): क्या सरकारी ठेकों में गलत तरीके से टैक्स छूट ली गई?
- टर्नओवर मिसमैच: क्या कागजों पर दिखाया गया कारोबार और वास्तविक लेन-देन में अंतर है?
- निविदा प्रणाली: सरकारी योजनाओं के तहत किए गए निर्माण कार्यों के भुगतान और उस पर चुकाए गए जीएसटी का मिलान।
राजनीतिक कनेक्शन ने बढ़ाई हलचल: पूर्व मंत्री के भाई पर नजर
इस छापेमारी की सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र विनय ठाकुर का पारिवारिक बैकग्राउंड है। झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री मिथलेश ठाकुर के भाई होने के नाते, इस कार्रवाई को सियासी चश्मे से भी देखा जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सत्यम बिल्डर्स के पास कई महत्वपूर्ण सरकारी प्रोजेक्ट्स हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की एजेंसी द्वारा की गई यह जांच आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में नया उबाल ला सकती है।
सत्यम बिल्डर्स का पक्ष: “यह सिर्फ सामान्य प्रक्रिया है”
इधर, कार्रवाई के बाद सत्यम बिल्डर्स प्रबंधन ने सफाई पेश की है। कंपनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह एक सामान्य विभागीय प्रक्रिया है और विभाग समय-समय पर दस्तावेजों का सत्यापन करता है। प्रबंधन ने दावा किया कि उन्होंने अधिकारियों को पूरा सहयोग दिया है और मांगे गए सभी कागजात उपलब्ध करा दिए गए हैं। शाम करीब 4 बजे टीम अपनी जांच पूरी कर वापस जमशेदपुर लौट गई।
क्या है अगला कदम?
भले ही कंपनी इसे ‘सामान्य’ बता रही हो, लेकिन जिस तरह से CGST की टीम ने दो घंटे तक सघन जांच की, उससे संकेत मिलते हैं कि विभाग के पास पहले से ही कुछ ठोस इनपुट थे। यदि दस्तावेजों में विसंगतियां पाई जाती हैं, तो आने वाले दिनों में विनय ठाकुर को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस जांच की आंच रांची तक पहुंचेगी।









