रांची: मोरहाबादी मैदान में 20 अक्टूबर को रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजक हिंदू पंजाबी बिरादरी के अनुसार, इस बार 90 फीट ऊंचे रावण, 65 फीट के कुंभकर्ण और 60 फीट के मेघनाथ के पुतलों का दहन होगा। कार्यक्रम में दो मंजिला सोने की लंका की प्रतिकृति, राम दरबार की झांकी, आतिशबाजी और विशेष लेजर शो की भी तैयारी है।
बिरादरी के अध्यक्ष कुणाल अजमानी समेत अन्य पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता में आयोजन की जानकारी दी। आयोजकों ने बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई है। उनके मुताबिक, भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
हेमंत सोरेन, संजय सेठ और सीपी सिंह का कार्यक्रम प्रस्तावित
आयोजकों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रावण के पुतले का दहन करेंगे। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के हाथों कुंभकर्ण और रांची के विधायक सीपी सिंह के हाथों मेघनाथ के पुतले का दहन प्रस्तावित है।
राम दरबार की झांकी और भांगड़ा की प्रस्तुति
कार्यक्रम में श्रीराम दरबार और रावण वध की जीवंत झांकियां दिखाई जाएंगी। स्थानीय लोक कलाकारों के साथ धनबाद की विक्की छाबड़ा टीम के कलाकार भी प्रस्तुति देंगे। आयोजकों के अनुसार, टाटा की सन्नी ग्रुप भांगड़ा टीम भी कार्यक्रम में शामिल होगी।
आकाशीय आतिशबाजी का प्रदर्शन कोलकाता की पायरो फायर वर्क्स मुखर्जी टीम करेगी। बिहार के बक्सर जिले के मोहम्मद जलील अहमद और मोहम्मद आसिक अंसारी उर्फ रिंकू जमीनी आतिशबाजी करेंगे। इसके साथ विशेष लेजर शो भी रखा गया है।

बच्चों की जेब में पता और संपर्क नंबर रखने की अपील
हिंदू पंजाबी बिरादरी ने बच्चों के साथ आने वाले अभिभावकों से सावधानी बरतने की अपील की है। आयोजकों ने कहा है कि छोटे बच्चों की जेब में ऐसी पर्ची रखें, जिस पर घर का पता और संपर्क नंबर लिखा हो।
आयोजकों के मुताबिक, भीड़ में बच्चा परिवार से अलग हो जाए तो यह जानकारी उसे परिजनों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
आयोजकों के अनुसार, 1948 में हुई थी शुरुआत
हिंदू पंजाबी बिरादरी के अनुसार, रांची में इस आयोजन की शुरुआत वर्ष 1948 में 12 फीट ऊंचे रावण के पुतले से हुई थी। शुरुआती दौर में आयोजक स्वयं पुतला तैयार करते थे।
बिरादरी की ओर से साझा इतिहास के मुताबिक, वर्ष 1950 से 1955 के बीच रेलवे स्टेशन के पास खजुरिया तालाब स्थित रेस्ट कैंप में पुतले बनाए जाते थे। उस दौरान दहन का आयोजन बारी पार्क में होता था। बाद में डोरंडा स्थित राम मंदिर में भी पुतलों का निर्माण कराया गया।
आयोजकों के अनुसार, वर्ष 1960 से रावण दहन के लिए मोरहाबादी मैदान को चुना गया। समय के साथ रावण के पुतले की ऊंचाई बढ़ी और आयोजन में कुंभकर्ण, मेघनाथ तथा सोने की लंका की प्रतिकृति भी शामिल हुई।












