रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC-CGL)-2023 के कथित पेपर लीक मामले में संजय कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। रांची के एजेसी-1 योगेश कुमार की अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को केस डायरी और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद यह निर्णय दिया।
अभियोजन पक्ष ने संजय कुमार पर अभ्यर्थियों को जुटाने, परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराने की व्यवस्था में समन्वय करने तथा पैसे के लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगाया। बचाव पक्ष ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि उन्हें संदेह के आधार पर मामले में फंसाया गया है।
पटना में सवाल-जवाब याद कराने का आरोप
आदेश में दर्ज अभियोजन पक्ष के विवरण के मुताबिक, 20 सितंबर 2024 को कई अभ्यर्थियों को पटना बुलाया गया था। उन्हें गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के आसपास जुटाने के बाद एक मकान में ले जाने का आरोप है।
अभियोजन का कहना है कि वहां प्रश्नपत्र के तीन सेट और उनके उत्तर लाए गए। अभ्यर्थियों को करीब तीन घंटे तक सवाल-जवाब याद कराए गए। इसके बाद कथित तौर पर प्रश्नपत्र और उत्तर वाली सामग्री जलाकर नष्ट कर दी गई तथा अभ्यर्थियों को अलग-अलग रास्तों से भेजा गया।
JSSC-CGL परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को तीन पालियों में आयोजित हुई थी।
प्रमाणपत्र और चेक जमा कराने का भी आरोप
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और चेक भी जमा कराए गए थे। इन्हें कथित तौर पर भुगतान की सुरक्षा के रूप में रखा गया था।
जांच एजेंसी सीआईडी के अनुसार, संजय कुमार की पहचान अजय कुमार से एक पुस्तकालय में हुई थी। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर अपने दोस्तों, विद्यार्थियों और परिचितों के माध्यम से परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को जुटाया।
अभियोजन ने आरोप लगाया कि संजय कुमार ने पटना के भिखना पहाड़ी स्थित कृष्णा डिफेंस एकेडमी के संचालक राकेश रंजन से संपर्क और समन्वय किया। सरकारी पक्ष के मुताबिक, उनकी कथित भूमिका अभ्यर्थियों का परिचय कराने से आगे बढ़कर उन्हें पटना पहुंचाने और परीक्षा से पहले की गतिविधियों का समन्वय करने तक थी।
बैंक खाते में करीब तीन लाख रुपये आने का उल्लेख
आदेश में दर्ज केस डायरी के विवरण का हवाला देते हुए अभियोजन पक्ष ने बताया कि दिसंबर 2024 में अमित कुमार की ओर से संजय कुमार के बैंक खाते में करीब तीन लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
सरकारी पक्ष ने संजय कुमार के अजय कुमार के साथ पटना जाने और वहां राकेश रंजन को पैसे पहुंचाने का भी आरोप लगाया। अभियोजन के विवरण में चयन के बाद अतिरिक्त रकम की व्यवस्था करने, बैंक ट्रांसफर और नकद भुगतान का उल्लेख है।
ये लेन-देन अभियोजन ने कथित परीक्षा संबंधी व्यवस्था से जोड़कर पेश किए हैं।
कई स्थानों पर गतिविधियों का दावा
अभियोजन पक्ष के विवरण में बोकारो के दुग्धा, पश्चिम बंगाल के नियामतपुर और सितुलपुर, पटना तथा नेपाल के बीरगंज का उल्लेख है। आरोप है कि अलग-अलग स्थानों पर अभ्यर्थियों को समूहों में जुटाकर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए।
सरकारी पक्ष ने मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री का भी हवाला दिया। उसका कहना है कि इनसे संजय कुमार और अन्य आरोपियों के बीच संपर्क तथा कथित समन्वय की जानकारी मिली।
बचाव पक्ष ने संपर्क को साजिश का प्रमाण मानने पर उठाए सवाल
संजय कुमार की ओर से दलील दी गई कि उनका नाम प्राथमिकी में नहीं था। बचाव पक्ष ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड से संपर्क या लोकेशन का पता चल सकता है, लेकिन इससे अपने आप प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश में भागीदारी साबित नहीं होती।
बचाव पक्ष के अनुसार, संजय कुमार स्वयं JSSC-CGL परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन सफल नहीं हुए। वह दूसरी परीक्षा में चयनित होकर जमशेदपुर के मानगो में सैनिटरी इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे।
उन्होंने पुलिस हिरासत में खाली कागज पर हस्ताक्षर कराने और बाद में उसे कथित स्वीकारोक्ति के रूप में पेश करने का आरोप भी लगाया। गिरफ्तारी के आधार तैयार करने में देरी पर भी सवाल उठाए गए।
अदालत ने जमानत क्यों खारिज की?
अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि अभियोजन की सामग्री संजय कुमार की कथित भूमिका को केवल अभ्यर्थियों से परिचय कराने तक सीमित नहीं बताती। इसमें अभ्यर्थियों को जुटाने, परीक्षा से पहले की गतिविधियों का समन्वय करने और चयन के वादे से जुड़े वित्तीय लेन-देन में भागीदारी के आरोप हैं।
सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और लागू जमानत शर्तों पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि इस स्तर पर यह मानने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं कि संजय कुमार कथित अपराधों के दोषी नहीं हैं। इसी आधार पर जमानत याचिका खारिज की गई।
यह निर्णय जमानत याचिका पर है। इसे आरोपों पर दोषसिद्धि का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए।












