झारखंड के सबसे बड़े लोकपर्वों में शुमार करम पूजा 2026 की आधिकारिक तिथियों का ऐलान हो गया है। केंद्रीय सरना समिति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया है कि इस साल महोत्सव ऐतिहासिक और भव्य अंदाज में मनाया जाएगा।
रांची के कचहरी स्थित आरआईटी बिल्डिंग कार्यालय से समिति ने न केवल पूजा का पूरा खाका रखा, बल्कि राज्य सरकार के सामने 6 सूत्रीय मांगें रखकर कड़ा संदेश भी दिया। राजधानी से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अखाड़ों में मांदर की थाप गूंजने की तैयारी तेज हो गई है।
अगर आप भी करम परब की तैयारियों में जुटे हैं, तो 22 से 24 सितंबर के बीच का पूरा शेड्यूल और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी प्रशासनिक मांगें जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
करम पूजा 2026: 22 सितंबर को उपवास, 24 को विसर्जन
केंद्रीय सरना समिति के अनुसार, इस वर्ष भादो एकादशी पर परंपरा और आस्था का संगम देखने को मिलेगा। समिति ने तीन दिवसीय मुख्य अनुष्ठानों की समय-सारणी सार्वजनिक कर दी है:
- 22 सितंबर 2026 (भादो एकादशी, शुक्ल पक्ष): व्रती पूरे दिन उपवास रखेंगे। रात ठीक 8:00 बजे से पारंपरिक विधि-विधान के साथ करम पूजा और कथा वाचन शुरू होगा।
- 23 सितंबर 2026 (भादो द्वितीया): उपवास के पारण के साथ परना मनाया जाएगा और अखाड़ों में पारंपरिक नृत्य-गीत का दौर चलेगा।
- 24 सितंबर 2026 (भादो तृतीया): पूरी श्रद्धा और रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र करम डाली का विसर्जन संपन्न होगा।
शराबबंदी से लेकर नो-एंट्री तक: सरकार के सामने रखीं 6 बड़ी मांगें
महोत्सव को शांतिपूर्ण और निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए समिति ने हेमंत सरकार और स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। केंद्रीय सरना समिति का कहना है कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से कोई समझौता नहीं होगा।
समिति की प्रमुख मांगें:
- पूजन सामग्री का वितरण: हर अखाड़े में श्रद्धालुओं के लिए चना, गुड़, चीनी और अरवा चावल का प्रशासनिक स्तर पर प्रबंध हो।
- अखाड़ों का समतलीकरण: बारिश के मौसम को देखते हुए सभी अखाड़ों में समय रहते मुरम या डस्ट (मिट्टी) डाली जाए।
- बुनियादी सुविधाएं: पूजा स्थलों पर 24 घंटे निर्बाध बिजली, टैंकरों से शुद्ध पेयजल और नगर निगम की ओर से विशेष साफ-सफाई हो।
- ट्रैफिक नियंत्रण: मुख्य पूजा और शोभायात्रा के दिन शहर में भारी और बड़े व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगे।
- पूर्ण शराबबंदी: पर्व की पवित्रता बनाए रखने के लिए पूजा के दौरान क्षेत्र में शराब की बिक्री और सेवन पर सख्त पाबंदी लागू की जाए।
- पारंपरिक वाद्य यंत्र: संस्कृति के संरक्षण हेतु प्रत्येक मान्यता प्राप्त अखाड़े को ढोल, नगाड़ा और मांदर उपलब्ध कराया जाए।
एकजुट हुआ आदिवासी नेतृत्व, प्रशासन से तुरंत पहल की अपील
कचहरी परिसर में आयोजित इस बैठक में विभिन्न आदिवासी संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधि एक मंच पर दिखे। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की के साथ अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के सत्यनारायण लकड़ा और मसना समिति करमटोली के नंदा उरांव ने साफ कहा कि पर्व के दौरान किसी भी श्रद्धालु को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
बैठक में बाना मुंडा, अजय लिंडा, संजय तिर्की, एंजेल लकड़ा, विमल कच्छप, ललित कच्छप, भुवनेश्वर लोहरा, अमर तिर्की, मानसी करमाली, प्रमोद एक्का, सोहन कच्छप और राधा हेंब्रम सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि प्रशासन को समय रहते संयुक्त समीक्षा बैठक बुलाकर अखाड़ों की भौतिक स्थिति का जायजा लेना चाहिए।
तिथियों के औपचारिक ऐलान के बाद अब गेंद रांची जिला प्रशासन और राज्य सरकार के पाले में है। शराबबंदी, ट्रैफिक डायवर्जन और अखाड़ों की मरम्मत को लेकर नगर निगम और पुलिस प्रशासन आने वाले दिनों में क्या गाइडलाइंस जारी करता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। समिति ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय में अखाड़ों तक सुविधाएं नहीं पहुंचीं, तो प्रतिनिधिमंडल उच्चाधिकारियों से सीधे जवाब मांगेगा।











