Ranchi | झारखंड सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक की वजह से अचानक निधन हो गया है। इस अप्रत्याशित खबर के सामने आते ही सत्ता के गलियारों से लेकर गिरिडीह की गलियों तक गहरा सन्नाटा पसर गया।
देर रात आई इस दुखद सूचना ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहद करीबी और गठबंधन के मुख्य रणनीतिकार माने जाने वाले सुदिव्य सोनू के निधन से झारखंड की सियासत में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर आला मंत्रियों तक, हर कोई इस अपूरणीय क्षति से गहरे सदमे में है। राजधानी रांची से लेकर उनके गृह क्षेत्र गिरिडीह तक शोक की लहर दौड़ गई है।

‘बड़े भाई चले गए…’ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भावुक संदेश
सुदिव्य सोनू के जाने से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व्यक्तिगत रूप से टूट गए हैं। उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा:
“देर रात अपने बड़े भाई, हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन का दुःखद समाचार मिला। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद कठिन है। सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। वे मेरे लिए सिर्फ एक वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे, वे बड़े भाई की तरह थे—स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और हर कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले।”
सीएम ने उनके संघर्षों को याद करते हुए आगे लिखा कि वे दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ झारखंड आंदोलन के दौर से ही पूरी निष्ठा से डटे रहे। उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित कर दिया।
सियासी गलियारों में शोक: “सरकार के सबसे बड़े संकटमोचक थे सोनू”
रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन से लेकर पार्टी कार्यालय तक मंत्रियों और नेताओं का जुटना शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने उनके योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जब भी गठबंधन या सरकार पर कोई गंभीर संकट आता, हेमंत सोरेन हमेशा सुदिव्य सोनू को आगे करते थे। वे सही मायनों में सरकार के संकटमोचक थे और तीखी नोंक-झोंक के बीच भी समाधान निकालना जानते थे।
वहीं, कैबिनेट सहयोगी दीपिका पांडे सिंह ने रूंधे गले से कहा:
“हमारे साथी मंत्री और करीबी भाई अब हमारे बीच नहीं हैं। विश्वास कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। हम सभी साथी तुरंत गिरिडीह के लिए रवाना हो रहे हैं।”
कैबिनेट मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने स्तब्ध होते हुए बताया कि अभी परसों ही उनकी सुदिव्य जी से विस्तार से बातचीत हुई थी और वे गिरिडीह के लिए निकले थे; आज सुबह यह मनहूस खबर आ गई। जेएमएम नेता मनोज पांडे ने भी दो टूक कहा कि सोनू जी ने बहुत कम समय में राजनीति में शुचिता की जो लंबी लकीर खींची है, उसे राज्य हमेशा याद रखेगा।
दलगत राजनीति से ऊपर सम्मान: पक्ष और विपक्ष दोनों हुए भावुक
सुदिव्य सोनू की लोकप्रियता केवल सत्ता पक्ष तक सीमित नहीं थी। विपक्ष के नेताओं ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया है। बीजेपी नेता प्रतुल शाहदेव ने उन्हें याद करते हुए कहा:
“यह पूरे राज्य के लिए चौंकाने वाला है। अलग-अलग विचारधाराओं के बावजूद उनसे हमेशा बेहद सार्थक चर्चाएं होती थीं। वे जमीन से जुड़े एक ऐसे कार्यकर्ता थे, जिन्होंने अपनी लगन के दम पर मंत्री पद तक का सफर तय किया।”
बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमर कुमार बाउरी ने भी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके असमय जाने से झारखंड की राजनीति में जो शून्यता आई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है।
जमीन से जुड़े ‘सोनू भैया’: गिरिडीह से कैबिनेट तक का सफर
सुदिव्य कुमार सोनू की पहचान केवल एक विधायक या मंत्री तक सीमित नहीं थी; वे ज़मीन पर कार्यकर्ताओं की आवाज़ थे। झारखंड आंदोलन के दिनों से ही उन्होंने छात्र राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक रुख अपनाया।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का जिम्मा संभालते हुए वे राज्य के युवाओं के लिए कई सुधारात्मक कदमों पर काम कर रहे थे। प्रशासनिक स्तर पर उनकी पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच ‘सोनू भैया’ के नाम से उनकी सहज उपलब्धता ही उन्हें राज्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं की कतार में खड़ा करती थी।
गिरिडीह में जुटेगा सियासी अमला, अंतिम विदाई की तैयारी
प्रशासन और पार्टी सूत्रों के अनुसार, पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक क्षेत्र गिरिडीह ले जाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कैबिनेट के कई मंत्री, विधायक और तमाम दलों के वरिष्ठ नेता गिरिडीह रवाना हो रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से राजकीय सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार की प्रशासनिक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।











