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मोमो से भी सस्ता पर्स और ₹30 का गमछा: रांची में करमा शॉपिंग का महाधमाका!

रांची। झारखंड के सबसे बड़े लोकपर्व करमा (Karma Puja) की दस्तक के साथ ही राजधानी रांची के बाजारों में रौनक चरम पर है। महंगाई के दौर में जब त्योहार की खरीदारी आम परिवारों की जेब पर भारी पड़ रही है, वहीं रांची के कांके रोड स्थित ‘जोहार ट्राइबल मार्ट’ (Johar Tribal Mart) ने ग्राहकों के लिए डिस्काउंट का पिटारा खोल दिया है। यहां पारंपरिक गमछे महज ₹30 से और लेडीज ट्राइबल पर्स ₹135 से शुरू हो रहे हैं।

करमा पर्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कुड़मी और सरना आदिवासी संस्कृति की साझा विरासत और प्रकृति के प्रति समर्पण का उत्सव है। इस बार उत्सव की तैयारी में कपड़ों से लेकर पारंपरिक आभूषणों तक, मार्ट ने हर समुदाय की पसंद का पूरा ख्याल रखा है। चाहे हो, संथाली, मुंडा समाज हो या कुड़मी भाई-बहन—हर किसी के पारंपरिक परिधान बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध कराए गए हैं।

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ग्राहकों और छोटे व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई को दूर करते हुए मार्ट प्रबंधन ने सीधे फैक्ट्री मैन्युफैक्चरिंग के दम पर बिचौलियों का मुनाफा खत्म कर दिया है। खुदरा खरीदारों के साथ-साथ राज्य भर से आ रहे छोटे दुकानदारों के लिए यह स्टोर करमा शॉपिंग का मुख्य केंद्र बन चुका है।

₹30 का गमछा और ₹135 का पर्स: बाजार से आधी कीमत पर सामान

पारंपरिक पहनावे की खरीदारी में सबसे ज्यादा मांग गमछे और बंडी की होती है। मार्ट में पीला-हरा बॉर्डर वाला गमछा (कुड़मी समाज की विशेष पसंद), संथाली ब्लैक-रेड स्ट्राइप्स और हो समाज के पारंपरिक रंगों वाले गमछे उपलब्ध हैं, जिनकी शुरुआती कीमत मात्र ₹30 रखी गई है।

पुरुषों और युवाओं के लिए ट्राइबल लुक वाली बंडी (नेहरू जैकेट) महज ₹260 से शुरू हो रही है। महिलाओं के लिए ट्राइबल पर्स मात्र ₹135 में उपलब्ध हैं, जिसे देखकर ग्राउंड पर पहुंचे ग्राहक भी हैरान हैं कि आज के दौर में मोमो की एक प्लेट की कीमत में फैंसी पर्स कैसे मिल रहा है।

“हमारी खुद की फैक्ट्री है, कोई माल न बिके तो वापस ले आएं”

दुकानदारों और ग्राहकों को इतनी कम कीमत में सामान मिलने के पीछे की वजह बताते हुए मार्ट की संचालिका ने कहा:

“हमारा यह दावा खोखला नहीं है। हमारी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, इसलिए हम बिचौलियों का खर्च काटकर सीधे ग्राहकों को फायदा देते हैं। कोई भी खरीदार पहले पूरे रांची का बाजार घूम ले, फिर हमारे पास आए। छोटे दुकानदारों के लिए हमारी खुली नीति है—अगर त्योहार तक आपका कोई माल नहीं बिकता, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है, आप उसे हमारे पास लाकर बदल सकते हैं।”

पहली बार ‘करमा स्पेशल’ जावा डिजाइन साड़ियां और ट्राइबल ब्लेजर

इस बार के कलेक्शन में सबसे खास आकर्षण महिलाओं के लिए तैयार की गई ‘करमा स्पेशल’ साड़ियां हैं। इन साड़ियों के पल्लू और बॉर्डर पर करमा पूजा में उठने वाले ‘जावा’, मयूर और हिरण की एम्ब्रॉयडरी उकेरी गई है। यह डिजाइन पारंपरिक छौड़ी साड़ी पर विशेष रूप से तैयार कराया गया है, जिस पर सीधे 15% का विशेष डिस्काउंट दिया जा रहा है।

पुरुषों के लिए भी इस बार अनोखा प्रयोग देखने को मिल रहा है। पारंपरिक खादी और कॉटन फैब्रिक में ट्राइबल ब्लेजर, फोर-पॉकेट बीरू पैटर्न बंडी और रेडीमेड धोती उतारी गई है। जो युवा पारंपरिक धोती बांधने के झंझट से बचते हैं, वे इसे पैंट की तरह पहनकर सीधे मांदर की थाप पर थिरक सकते हैं।

ढोल-मांदर से लेकर पारंपरिक आभूषण: एक छत के नीचे पूरा उत्सव

करमा का पर्व बिना मांदर की गूंज और पारंपरिक नृत्य के अधूरा है। मार्ट में सिर्फ कपड़े ही नहीं, बल्कि ओरिजिनल मांदर, कमरबंद, बैंगल, तुरिया और दिशोम गुरु शिबू सोरेन व भगवान बिरसा मुंडा के चित्र वाले खास सिक्के के लॉकेट (चंदवा) भी मौजूद हैं। 1 साल के बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक के लिए कुर्ता-पायजामा और स्टेज कार्यक्रमों के लिए मैचिंग पगड़ी की पूरी वैरायटी उपलब्ध कराई गई है।

ढोल-मांदर से लेकर पारंपरिक आभूषण: एक छत के नीचे पूरा उत्सव
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स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा और डिजिटल ऑर्डर की सुविधा

त्योहार के इस सीजन में वोकल फॉर लोकल की यह पहल न केवल झारखंडी संस्कृति को संजो रही है, बल्कि महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत भी दे रही है। मार्ट प्रबंधन के अनुसार, जो लोग रांची नहीं आ सकते, वे मार्ट के आधिकारिक नंबर पर व्हाट्सएप करके सीधे कैटलॉग मंगा सकते हैं और घर बैठे ऑर्डर बुक कर सकते हैं। करमा जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, कांके रोड के इस ट्राइबल मार्ट में झारखंडी परिधानों की मांग कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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