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Curesta ACMS Hospital में रक्षाबंधन पर भावुक पल: छात्राओं ने डॉक्टरों को बांधी राखी

Ranchi | रांची के ओरमांझी स्थित Curesta ACMS Super Speciality Hospital में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक बेहद मार्मिक और प्रेरक दृश्य देखने को मिला।

कलकत्ता पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने अस्पताल पहुंचकर उन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा, जो दिन-रात मरीजों की जान बचाने में जुटे रहते हैं।

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त्योहार की भागदौड़ से दूर अस्पताल के गलियारों में जब छात्राओं ने स्वास्थ्यकर्मियों को तिलक लगाकर राखी बांधी, तो वहां मौजूद हर शख्स इस आत्मीय रिश्ते का साक्षी बना।

समाज के 'सच्चे रक्षकों' के प्रति जताया सम्मान

समाज के ‘सच्चे रक्षकों’ के प्रति जताया सम्मान

स्कूल की छात्राओं का मानना है कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी समाज के असली रक्षक हैं। किसी भी आपदा, महामारी या गंभीर बीमारी के समय अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा करने वाले डॉक्टरों के प्रति यह एक छोटी-सी कृतज्ञता थी।

छात्राओं की इस पहल ने अस्पताल के माहौल को एक पारिवारिक और आत्मीय रंग दे दिया, जहाँ इलाज के तनाव के बीच चेहरे पर मुस्कान तैर गई।

डॉक्टरों के लिए सम्मान और भावुकता का क्षण

कार्यक्रम के दौरान अस्पताल प्रबंधन और वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस पहल की दिल से सराहना की।

“रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ एक-दूसरे की सुरक्षा और देखभाल का संकल्प है। हमें बेहद खुशी है कि छात्राओं ने डॉक्टरों को इस पावन भावना से जोड़ा। यह पहल समाज में सम्मान, सेवा और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली है।” — डॉ. संजय कुमार, निदेशक, Curesta ACMS Hospital

मैक्सिलोफ़ेशियल सर्जन डॉ. अनुज कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी का पर्व है। छात्राओं का यह स्नेह डॉक्टरों के प्रति समाज के अटूट भरोसे को दर्शाता है।

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मेजर रमेश दास ने इस मौके पर कहा, “यह आयोजन समाज और स्वास्थ्य सेवा के बीच विश्वास और सम्मान के रिश्ते को रेखांकित करता है। बच्चों की यह संवेदनशीलता पूरे मेडिकल समुदाय के लिए प्रेरणादायक है।”

भरोसा और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की पहल

अस्पताल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि स्वास्थ्य सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक गहरा समर्पण है। डॉक्टरों और आम जनता के बीच अक्सर दिखने वाली दूरी को पाटने में ऐसे मानवीय आयोजन मील का पत्थर साबित होते हैं। कार्यक्रम का समापन स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा समाज की अनवरत सेवा के संकल्प के साथ हुआ।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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