रांची: झारखंड सरकार के एक बड़े फैसले ने राज्य के लाखों अभ्यर्थियों की तकदीर और सियासत दोनों को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में JSSC CGL परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का ऐलान किया गया। इसके साथ ही परीक्षा एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को भी निरस्त कर दिया गया है।
कैबिनेट के इस फैसले के बाद रांची की सड़कों पर दो बिल्कुल अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जयपाल सिंह स्टेडियम में लंबे समय से धांधली का आरोप लगाकर आंदोलन कर रहे छात्र गुलाल उड़ाकर जश्न मना रहे हैं।
दूसरी तरफ प्रोजेक्ट भवन के बाहर उन चयनित अभ्यर्थियों का रो-रोकर बुरा हाल है, जिनकी नियुक्तियां हो चुकी थीं और जो इस फैसले के बाद अचानक खुद को फिर से बेरोजगार पा रहे हैं।
जयपाल सिंह स्टेडियम में मना जश्न, छात्र नेता बोले- ‘यह सिर्फ पहली जीत’
कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद जैसे ही परीक्षा और TDPL की सभी गतिविधियों को रद्द करने की खबर आई, जयपाल सिंह स्टेडियम में डटे अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। छात्रों ने इसे अपनी मेहनत और संघर्ष का नतीजा बताया।
छात्र नेता पीयूष कुमार ने मैदान से हुंकार भरते हुए कहा:
“यह बस पहला कदम है और हमारी पहली जीत है। ’11 से 13′ वाले मुद्दे पर हमारी मांग अभी भी कायम है। संघर्ष जारी रहेगा; हम कहीं नहीं जा रहे हैं। CBI जांच की मांग अभी बाकी है। हम पूरी रणनीति बनाकर आगे की लड़ाई लड़ेंगे।”
प्रोजेक्ट भवन पर चयनित अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा: ‘हम एक पल में बेरोजगार हो गए’
सिक्के का दूसरा पहलू प्रोजेक्ट भवन के बाहर नजर आया। परीक्षा पास कर विभागों में योगदान दे चुके सफल अभ्यर्थी सरकार के इस फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ गए हैं। कई अभ्यर्थी पुरानी सरकारी और निजी नौकरियां छोड़कर इसमें शामिल हुए थे।
प्रदर्शन कर रहे एक चयनित अभ्यर्थी ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया:
“हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद हमारी नियुक्ति हुई थी। फिर अचानक सरकार ने सब रद्द कर दिया। सैकड़ों साथियों ने पिछली नौकरियों से इस्तीफा देकर यह पद संभाला था, उनका क्या होगा? हम पूरी तरह निष्पक्ष प्रक्रिया से आए थे। अगर गड़बड़ी थी तो जांच कर दोषियों को हटाते, सबको क्यों सजा दी गई? हम दोबारा कोर्ट जाएंगे।”
सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान: 2014 से हुई गड़बड़ियों की होगी जांच
फैसले की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी हर गतिविधि—चाहे वह आयोजित परीक्षा हो, घोषित नतीजे हों या चयनित उम्मीदवार—सबको रद्द करने का फैसला लिया है। इसके अलावा, साल 2014 के बाद से हुई सभी छोटी-बड़ी भर्ती गड़बड़ियों की व्यापक और गहन जांच कराई जाएगी।
कानूनी लड़ाई या नई परीक्षा नीति?
झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चयनित अभ्यर्थियों के कोर्ट जाने के बाद क्या यह मामला फिर कानूनी पेंच में उलझेगा? वहीं, दूसरी तरफ आंदोलनकारी छात्रों की निगाहें सीबीआई जांच और आगामी परीक्षा कैलेंडर पर टिकी हैं। सरकार के लिए आने वाले दिन दोनों पक्षों के बीच संतुलन साधने और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को पटरी पर लाने की कड़ी परीक्षा साबित होंगे।











