Garhwa | गढ़वा के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में कथित फूड प्वाइजनिंग से हड़कंप मच गया है। दूषित भोजन और भीषण गर्मी में टंकी का खौलता पानी पीने से करीब 60 छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
सभी पीड़ित छात्राओं को आनन-फानन में इलाज के लिए भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में भर्ती कराया गया है। इनमें से 20 से अधिक बच्चियों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिनका इलाज रातभर से जारी है।
इस पूरी घटना ने आवासीय विद्यालयों की सुरक्षा और प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के वक्त हॉस्टल में न तो वॉर्डन मौजूद थीं और न ही कोई जिम्मेदार पदाधिकारी, पूरा परिसर सिर्फ एक गार्ड के भरोसे था।
‘पुआ-चावल’ और खौलता पानी: छात्राओं की आपबीती
अस्पताल के बेड पर दर्द से तड़पती छात्राओं ने हॉस्टल प्रशासन की संवेदनहीनता की पोल खोल कर रख दी है। पीड़ित बच्चियों ने बताया कि दोपहर के भोजन में उन्हें ‘पुआ’ और चावल दिया गया था। भीषण गर्मी के कारण छत पर रखी प्लास्टिक की टंकी का पानी पूरी तरह खौल रहा था। बिजली गुल होने की वजह से छात्राओं को मजबूरी में वही गर्म पानी पीना पड़ा।
छात्राओं का गंभीर आरोप है कि स्कूल परिसर में जनरेटर की सुविधा होने के बावजूद पानी की मोटर नहीं चलाई गई। शाम के नाश्ते के बाद जब बच्चियों ने पानी मांगा, तो उन्हें पानी तक नसीब नहीं हुआ। रात करीब 9 बजे जब बच्चियों की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी, तब जाकर उन्हें अस्पताल ले जाने की सुध ली गई।
आधी रात को हंगामा: जब रोते परिजनों को गेट पर रोका गया
जैसे ही बच्चियों के बीमार होने की खबर फैली, बदहवास परिजन कस्तूरबा स्कूल के मुख्य द्वार पर पहुंचने लगे। लेकिन प्रबंधन अपनी लापरवाही को छुपाने और मामले को दबाने में जुट गया। हॉस्टल के गार्ड ने रोते-बिलखते माता-पिता को अंदर जाने से रोक दिया और मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया।
घंटों चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। भवनाथपुर बीडीओ नंद जी राम और अंचलाधिकारी (CO) शंभू राम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के कड़े हस्तक्षेप के बाद स्कूल का गेट खोला गया और तुरंत एम्बुलेंस बुलाकर बच्चियों को अस्पताल रवाना किया गया।
अधिकारियों और डॉक्टरों का क्या है कहना?
ग्राउंड ज़ीरो पर मुस्तैद डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चियों की सेहत पर नज़र बनाए हुए है। इस हादसे पर चिकित्सा पदाधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है:
“प्रथम दृष्टया यह मामला फूड प्वाइजनिंग और अत्यधिक गर्म पानी पीने का है। सभी छात्राओं का आपातकालीन इलाज शुरू कर दिया गया है। स्थिति नियंत्रण में है, सभी को ज़रूरी दवाइयां और स्लाइन दी जा रही हैं।” — डॉ. दिनेश कुमार सिंह, चिकित्सा पदाधिकारी, भवनाथपुर पीएचसी
दूसरी तरफ, जिले के आला अधिकारी भी मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं:
“साठ बच्चियों का इलाज रातभर चला है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और हमारी टीम अलर्ट पर है।” — जॉन एफ कैनेडी, सिविल सर्जन, गढ़वा
सिस्टम की लाचारी या बड़ी लापरवाही: अब आगे क्या?
गढ़वा की इस घटना ने सरकारी आवासीय विद्यालयों की आंतरिक व्यवस्था को बेनकाब कर दिया है। इतनी भीषण गर्मी में जब सरकार ने स्कूलों के लिए स्पेशल गाइडलाइंस जारी की हैं, तब कस्तूरबा स्कूल में जनरेटर होने के बाद भी छात्राओं को खौलता पानी पीने पर मजबूर होना पड़ा। वॉर्डन और पदाधिकारियों की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि बच्चियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
आगे की राह: स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। दोषी वॉर्डन और लापरवाह प्रबंधन के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है। लेकिन सवाल वही है कि क्या हर बार किसी बड़े हादसे या मासूमों की जान दांव पर लगने के बाद ही हमारा सिस्टम जागेगा?











