UPSC Result Fake Claim: ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती का दावा निकला झूठा, आयोग ने बताया कौन है असली ‘आकांक्षा सिंह’

UPSC Result Fake Claim: ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती का दावा निकला झूठा, आयोग ने बताया कौन है असली 'आकांक्षा सिंह'

New Delhi | संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजों के बाद बिहार से लेकर दिल्ली तक जिस ‘आकांक्षा सिंह’ के नाम का डंका बज रहा था, उसकी सच्चाई ने सबको झकझोर कर रख दिया है। रणवीर सेना के दिवंगत प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह द्वारा सिविल सेवा परीक्षा में 301वीं रैंक लाने का दावा पूरी तरह फर्जी साबित हुआ है। यूपीएससी ने एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।

आयोग का बड़ा खुलासा: गाजीपुर की बेटी ने मारी बाजी

सोमवार को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में यूपीएससी ने स्पष्ट किया कि 301वीं रैंक हासिल करने वाली असली उम्मीदवार उत्तर प्रदेश के गाजीपुर (अभयपुर गांव) की रहने वाली आकांक्षा सिंह हैं। विवाद को खत्म करने के लिए आयोग ने चयनित उम्मीदवार के माता-पिता का नाम भी सार्वजनिक कर दिया है। असली आकांक्षा सिंह के पिता का नाम रणजीत सिंह और माता का नाम नीलम सिंह है, और वे वर्तमान में पटना AIIMS में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रही हैं।

कैसे खुला झूठ का पिटारा? QR कोड ने बिगाड़ा खेल

पिछले हफ्ते जब नतीजे आए, तो आरा की आकांक्षा सिंह (पिता इंदू भूषण सिंह) ने मीडिया में जमकर सुर्खियां बटोरीं। फूल-मालाओं और मिठाइयों के बीच उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 301वीं रैंक पाई है। लेकिन शक तब गहराया जब गाजीपुर की आकांक्षा ने भी इसी रैंक पर अपना दावा पेश किया।

  • एडमिट कार्ड का सच: जब दोनों पक्षों ने अपने दस्तावेज दिखाए, तो आरा वाली आकांक्षा ने केवल प्रिलिम्स का एडमिट कार्ड पेश किया। वहीं, गाजीपुर की आकांक्षा ने इंटरव्यू का समन लेटर साझा किया।
  • तकनीकी जांच: डिजिटल युग में झूठ छिपना नामुमकिन था। जब दोनों के एडमिट कार्ड पर मौजूद QR कोड को स्कैन किया गया, तो गाजीपुर वाली आकांक्षा का रोल नंबर सही पाया गया, जबकि आरा की आकांक्षा का डेटा बदलते ही पोल खुल गई।

CCTV फुटेज का दिया था हवाला, पर आयोग ने फेरा पानी

हैरानी की बात यह है कि विवाद बढ़ने के बावजूद आरा की आकांक्षा सिंह अपने दावे पर अड़ी थीं। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा था कि, “यूपीएससी के सीसीटीवी फुटेज निकलवा लीजिए, वहां मेरा वीडियो मिल जाएगा।” हालांकि, आयोग के आधिकारिक बयान ने अब इस पूरे ड्रामे और विवाद का पटाक्षेप (End) कर दिया है।

एक्सपर्ट व्यू: विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फर्जी दावों से न केवल आयोग की गरिमा प्रभावित होती है, बल्कि उन गंभीर उम्मीदवारों के मनोबल पर भी चोट पहुंचती है जिन्होंने दिन-रात एक कर यह मुकाम हासिल किया है।

प्रशासन ले सकता है कड़ा एक्शन

यूपीएससी द्वारा स्पष्टीकरण जारी होने के बाद अब गेंद बिहार प्रशासन के पाले में है। फर्जी तरीके से जीत का जश्न मनाने और सरकारी संस्थान के नाम पर गुमराह करने को लेकर आकांक्षा सिंह (आरा) पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है। यह घटना सोशल मीडिया के दौर में “सत्यापन (Verification)” की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करती है।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment