बेंगलुरु। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या से ‘अबुआ अधिकार मंच’ के संस्थापक वेदांत कौस्तव ने मुलाकात की है। गुरुवार को बेंगलुरु में हुई इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
इस बैठक के दौरान दोनों युवा नेताओं के बीच ‘विकसित भारत’ के संकल्पों और मौजूदा राजनीति में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को लेकर लंबी बातचीत हुई। इसके साथ ही, झारखंड आंदोलन और राज्य के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के गौरवशाली इतिहास पर भी विशेष मंथन किया गया।
युवाओं की भागीदारी और ‘विकसित भारत’ पर महामंथन
जमीन से उठकर युवाओं की आवाज बनने वाले दोनों नेताओं की इस मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बेंगलुरु में हुई इस बैठक में मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि देश के युवाओं को किस तरह राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
शहीद सीधो-कान्हो पर लिखी पुस्तक की भेंट
मुलाकात के दौरान वेदांत कौस्तव ने सांसद तेजस्वी सूर्या को भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और महान आदिवासी शहीद सीधो-कान्हो के जीवन पर आधारित एक विशेष पुस्तक भेंट की। ग्राउंड जीरो से मिल रही खबरों के मुताबिक, तेजस्वी सूर्या ने इस किताब को सहर्ष स्वीकार किया और झारखंड के वीरों के बलिदान को नमन किया।
वेदांत कौस्तव ने मुलाकात के बाद कहा:
“तेजस्वी सूर्या जैसे ऊर्जावान और युवा राजनीतिज्ञों से मिलकर एक नई ऊर्जा मिलती है। उनसे समाज के लिए कुछ बेहतर करने की प्रेरणा प्राप्त हुई है। आज हमारी युवा पीढ़ी को अनुभवी और युवा नेताओं से सीख लेकर सामाजिक कल्याण की गतिविधियों में अपनी सहभागिता को हर हाल में सुनिश्चित करना होगा।”
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और झारखंड के गौरव पर विशेष चर्चा
इस मुलाकात का एक बड़ा एजेंडा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान भी रहा। गौरतलब है कि इस अभियान की शुरुआत 31 अक्टूबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल की 140वीं जयंती के अवसर पर की गई थी।
सांस्कृतिक और भाषाई एकता को मजबूत करने पर जोर
बैठक में इस बात पर गहराई से विचार किया गया कि कैसे विभिन्न राज्यों की विविधता को सेलिब्रेट करते हुए राष्ट्रीय एकता को और मजबूत किया जाए। वेदांत और तेजस्वी के बीच झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों के सांस्कृतिक, भाषाई और शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।
इस मुलाकात के मायने
प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टिकोण:
यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट तक सीमित नहीं दिखती। झारखंड में ‘अबुआ अधिकार मंच’ के बढ़ते प्रभाव और वेदांत कौस्तव की युवाओं के बीच पैठ को देखते हुए, इसे भविष्य की राजनीति की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
आगे की राह
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘अबुआ अधिकार मंच’ और BJYM मिलकर युवाओं के डिजिटल और जमीनी सशक्तिकरण के लिए क्या कदम उठाते हैं। संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही झारखंड के जनजातीय गौरव को राष्ट्रीय पटल पर और बड़े स्तर पर लाने के लिए कुछ संयुक्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा सकती है।











