चोकाहातु बनेगा UNESCO विश्व धरोहर? सुदेश महतो ने जुएल ओराम से की मुलाकात

झारखंड के 'पत्थरों के रहस्य' को मिलेगी वैश्विक पहचान? सुदेश महतो ने दिल्ली में उठाई चोकाहातु को UNESCO दर्जा दिलाने की मांग

New Delhi | क्या झारखंड का एक छोटा सा गांव दुनिया के नक्शे पर इतिहास बदलने वाला है? सिल्ली के चोकाहातु में दफन हजारों साल पुराने रहस्य अब दुनिया के सामने आने को तैयार हैं। आजसू पार्टी के प्रमुख और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने नई दिल्ली में केंद्रीय जनजातीय कल्याण मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात कर एक ऐसी मांग रखी है, जिससे न केवल झारखंड का गौरव बढ़ेगा, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी क्रांति आ सकती है।

महतो ने चोकाहातु स्थित ‘महापाषाण स्थल’ (Megalithic Site) को जल्द से जल्द UNESCO विश्व धरोहर घोषित करने और इसके संरक्षण के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। मुंडा आदिवासियों की परंपराओं से जुड़ा यह स्थल भारत का सबसे बड़ा महापाषाण क्षेत्र माना जाता है, जो आज भी उपेक्षा का शिकार है।

हजारों साल पुरानी ‘हड़गड़ी’ रस्म और ग्रेनाइट के विशाल पत्थर

चोकाहातु सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि मुंडा जनजाति की आस्था और उनके पूर्वजों की स्मृतियों का केंद्र है। इसे ‘शोक मनाने का स्थान’ कहा जाता है। यहां हजारों की संख्या में विशाल ग्रेनाइट पत्थर (मेगालिथ) बिछे हुए हैं, जिनके नीचे पूर्वजों की अस्थियां दफन हैं।

इस स्थल की खासियत यह है कि यह दुनिया के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है जहां महापाषाण काल की परंपराएं आज भी जीवित हैं। सुदेश महतो ने जोर देकर कहा कि अगर इसे समय रहते विश्व धरोहर का दर्जा और उचित संरक्षण नहीं मिला, तो इतिहास का यह अनमोल पन्ना हमेशा के लिए खो सकता है।

‘स्टेच्यू ऑफ उलगुलान’ और आदिवासी कल्याण पर बड़ा दांव

मुलाकात के दौरान सुदेश महतो ने केवल चोकाहातु ही नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी फाइल आगे बढ़ाई।

  • बुंडू में स्मारक: महतो ने बुंडू में ’स्टेच्यू ऑफ उलगुलान’ स्मारक विकसित करने का प्रस्ताव दिया है, जो भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष की याद दिलाएगा।
  • फंड की मांग: राज्य में जनजातीय कल्याण की योजनाओं के लिए उन्होंने केंद्रीय मंत्री से बजट बढ़ाने और ज्यादा राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर क्या होगा असर?

अगर चोकाहातु को यूनेस्को की सूची में जगह मिलती है, तो यह झारखंड का पहला ऐसा स्थल होगा जिसे यह वैश्विक सम्मान प्राप्त होगा।

  1. ग्लोबल टूरिज्म: विदेशी पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
  2. इंफ्रास्ट्रक्चर: सिल्ली और सोनाहातु क्षेत्र में सड़कों, होटलों और परिवहन की सुविधाओं का कायाकल्प होगा।
  3. सांस्कृतिक संरक्षण: मुंडा समुदाय की प्राचीन परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सुरक्षा मिलेगी।

आगे क्या? सिस्टम की सुस्ती या मिलेगी रफ्तार?

सुदेश महतो की इस पहल के बाद अब गेंद केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पाले में है। यूनेस्को की सूची में शामिल होने की प्रक्रिया लंबी और तकनीकी होती है, जिसमें राज्य सरकार की रिपोर्ट भी अहम भूमिका निभाएगी। क्या हेमंत सोरेन सरकार और केंद्र के बीच इस मुद्दे पर तालमेल बनेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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