Silver Price Crash: 60% तक टूट सकती है चांदी, एक्सपर्ट की ‘बबल’ वाली चेतावनी ने उड़ाई निवेशकों की नींद

Silver Price Crash: चांदी में 60% गिरावट की चेतावनी, जानें क्यों?

New Delhi: बुलियन मार्केट (Bullion Market) में सोमवार को भूचाल जैसी स्थिति देखने को मिली। चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उठापटक दर्ज की गई, जिससे निवेशक और ट्रेडर दोनों सहम गए हैं। MCX पर चांदी ने एक ही सत्र में 2.54 लाख रुपये का रिकॉर्ड हाई बनाया और कुछ ही घंटों में करीब 31,000 रुपये टूटकर नीचे आ गई। इस भारी उतार-चढ़ाव के बीच, बाजार के दिग्गज एक्सपर्ट अमित गोयल (Amit Goel) ने एक डराने वाली भविष्यवाणी की है। उनका मानना है कि चांदी एक ‘क्लासिक बबल’ (Classic Bubble) में है और यहां से कीमतें 60% तक क्रैश हो सकती हैं।

MCX पर चांदी में ऐतिहासिक गिरावट: क्या हुआ सोमवार को?

सोमवार का कारोबारी सत्र कमोडिटी बाजार के इतिहास में दर्ज हो गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी ने इंट्रा-डे में 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छुआ। लेकिन यह तेजी हवा के बुलबुले की तरह साबित हुई।

रिकॉर्ड हाई बनाने के तुरंत बाद मुनाफावसूली का ऐसा दौर चला कि कीमतें ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं। चांदी लुढ़ककर 2,22,504 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गई। एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह हिला दिया है। हालांकि, Pace 360 के को-फाउंडर अमित गोयल का कहना है कि यह तो बस शुरुआत हो सकती है।

यह ‘क्लासिक बबल’ है, हकीकत से नाता टूट चुका है

Pace 360 के को-फाउंडर और चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट, अमित गोयल ने निवेशकों को सख्त चेतावनी दी है। उनके अनुसार, चांदी की मौजूदा तेजी का जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं रह गया है।

गोयल ने कहा, “सिल्वर में जो तेजी दिख रही है, वह एक क्लासिक बबल है। अब इसकी कीमतें न तो डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) के मूवमेंट को फॉलो कर रही हैं और न ही शेयर बाजार की चाल से इनका कोई तालमेल है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी एसेट की कीमत बिना किसी ठोस फंडामेंटल कारण के आसमान छूने लगती है, तो उसे ‘बबल’ कहा जाता है, जिसके फूटने पर निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

2008 की मंदी और डॉटकॉम क्राइसिस जैसे हालात

अमित गोयल ने मौजूदा बाजार के माहौल की तुलना इतिहास के दो सबसे बड़े आर्थिक बबल्स से की है:

  1. 2008 का क्रूड ऑयल बबल: जब कच्चा तेल $145 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था और फिर बुरी तरह क्रैश हुआ।
  2. 1999-2000 का डॉटकॉम बबल: जब टेक कंपनियों के शेयर बेतहाशा भागे थे और फिर बाजार धराशायी हो गया था।

उन्होंने कहा, “यही बबल की पहचान होती है। ऐसा नजारा बहुत कम देखने को मिलता है। हालिया हाई से करीब 12 फीसदी की गिरावट आई है, लेकिन यह मान लेना बहुत बड़ी गलती होगी कि सिल्वर का टॉप बन चुका है और खतरा टल गया है।”

ETF निवेश नहीं, सट्टेबाजी चला रही है बाजार

बाजार में एक धारणा थी कि चांदी में तेजी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भारी निवेश के कारण आ रही है। लेकिन अमित गोयल ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में सिल्वर ETFs में निवेश आने के बजाय ‘आउटफ्लो’ (निकासी) देखने को मिला है।

असली वजह क्या है? गोयल के मुताबिक, इस तेजी के पीछे असली वजह ‘सट्टेबाजी’ (Speculation) है। चीन ने 1 जनवरी से सिल्वर एक्सपोर्ट पर कुछ पाबंदियां लगाने का फैसला किया है। यह खबर बाजार को कई हफ्तों से पता थी, लेकिन सट्टेबाजों ने इसे अब भुनाना शुरू किया है।

गोयल ने कहा, “जरा-सी अच्छी खबर को 10 गुना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। यह ठीक वैसा ही उन्माद (Euphoria) है जैसा डॉटकॉम दौर में देखा गया था।”

आगे क्या? $100 तक जा सकती है चांदी, लेकिन…

चेतावनी के बावजूद, शॉर्ट टर्म में चांदी में अभी और उछाल की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। अमित गोयल ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण स्तर साझा किए हैं:

  • संभावित टॉप: चांदी मौजूदा स्तरों से फिर चढ़कर $90 या $92 प्रति औंस तक जा सकती है। एक्सट्रीम केस में यह $100 का स्तर भी छू सकती है।
  • समय सीमा: फरवरी 2026 तक बाजार अपना ‘टॉप’ बना सकता है।
  • सपोर्ट लेवल: तकनीकी रूप से $70-71 का स्तर चांदी के लिए मजबूत सपोर्ट का काम करेगा।
  • रेंज: कुछ हफ्तों तक चांदी $70 से $84 के दायरे में कंसोलिडेट कर सकती है, जिसके बाद अगली बड़ी चाल आएगी।

सबसे बड़ा खतरा: 60% क्रैश की भविष्यवाणी

निवेशकों के लिए सबसे डराने वाली बात गोयल का लॉन्ग टर्म आउटलुक है। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा है कि एक बार टॉप बनने के बाद, चांदी में भयानक गिरावट आएगी।

“मैं भरोसे के साथ कह सकता हूं कि यह एक क्लासिक बबल है। जो भी टॉप बनेगा, वहां से कीमतें कम से कम 50 से 60 फीसदी तक गिरेंगी।”अमित गोयल

अगर गणित लगाएं, तो यदि 2.54 लाख रुपये को टॉप माना जाए, तो 60% गिरावट का मतलब है कि चांदी का भाव लुढ़ककर करीब 1.52 लाख रुपये प्रति किलो तक आ सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह क्रैश रातों-रात नहीं होगा। यह एक धीमी और दर्दनाक प्रक्रिया होगी जो 1 से 1.5 साल में पूरी होगी। यानी अगले 1-2 महीनों में जो टॉप बनेगा, वह लंबे समय तक नहीं टूटेगा।

खतरे की घंटी: 1980 के बाद सबसे ज्यादा ‘लालच’

अपने विश्लेषण को सही साबित करने के लिए Pace 360 ने कुछ ऐतिहासिक डेटा पॉइंट्स भी पेश किए हैं:

  • Gold-Silver Ratio: यह अनुपात कुछ ही महीनों में 108 से गिरकर 54 पर आ गया है, जो चांदी में अत्यधिक तेजी (Overbought) का संकेत है।
  • Bloomberg Greed Indicators: यह इंडिकेटर 1980 के स्तर से भी ऊपर पहुंच गया है। इतिहास गवाह है कि 1980 के बाद जब-जब ऐसे संकेत मिले, बाजार में बड़ा क्रैश आया।

निष्कर्ष (Conclusion): चांदी की चमक फिलहाल निवेशकों को अपनी ओर खींच रही है, लेकिन विशेषज्ञों की राय साफ है—सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। बाजार एक ऐसे मोड़ पर है जहां मुनाफा जितना आकर्षक लग रहा है, जोखिम उससे कई गुना ज्यादा है। जो निवेशक अब प्रवेश करने की सोच रहे हैं, उन्हें Pace 360 की इस चेतावनी और स्टॉप-लॉस का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment