RIMS DIG ग्राउंड के कैलाश कोठी पर चलेगा बुलडोजर, हाईकोर्ट से याचिका खारिज

RIMS DIG ग्राउंड के कैलाश कोठी पर चलेगा बुलडोजर, हाईकोर्ट से याचिका खारिज

Ranchi | राजधानी रांची के बरियातू स्थित RIMS DIG ग्राउंड के पास बनी कैलाश कोठी को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। झारखंड हाईकोर्ट ने इस भवन को ध्वस्त करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस निर्णय के बाद अब जिला प्रशासन के लिए कैलाश कोठी पर बुलडोजर चलाने का रास्ता साफ हो गया है।

मामले की सुनवाई तरलोक सिंह चौहान और एसएस प्रसाद की खंडपीठ में हुई। मंगलवार को अदालत ने याचिका में कोई मेरिट नहीं पाते हुए इसे खारिज कर दिया।

यह याचिका खुशबू सिंह की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में कैलाश कोठी को अवैध अतिक्रमण बताकर हटाने के लिए जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी। प्रार्थी का दावा था कि जिस जमीन पर कैलाश कोठी बनी है, उसका RIMS द्वारा अधिग्रहण नहीं किया गया है।

अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पहले फैसला सुरक्षित रखा था। दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि याचिका में ऐसे ठोस तथ्य नहीं हैं, जिनके आधार पर ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई जा सके।

जमीन विवाद का पूरा मामला

यह विवाद प्लॉट नंबर 1694, मौजा मोरहाबादी, कुल 33 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। पूर्व की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रांची उपायुक्त को इस जमीन से संबंधित गजट नोटिफिकेशन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने यह भी पूछा था कि—

  • क्या इस जमीन का RIMS द्वारा अधिग्रहण किया गया है?
  • अगर अधिग्रहण हुआ है तो क्या मुआवजे का भुगतान किया गया?

इसके बाद रांची उपायुक्त और बड़गाईं अंचल अधिकारी की ओर से मूल दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कैलाश कोठी को अवैध अतिक्रमण बताकर नोटिस चिपकाया गया है, जबकि जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ था। प्रार्थी ने कोठी के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज भी कोर्ट में जमा किए।

दलील दी गई कि जब तक अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती और मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक किसी निर्माण को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

प्रशासन और RIMS का पक्ष

प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि यह जमीन RIMS परिसर और DIG ग्राउंड से जुड़ी है। RIMS की जमीन पर अतिक्रमण हटाने को लेकर पहले से हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश मौजूद है।

हाईकोर्ट में RIMS से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया गया था कि अस्पताल परिसर की जमीन से सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं। उसी आदेश के आलोक में जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है।

कोर्ट का स्पष्ट रुख

अदालत ने कहा कि—

  • प्रस्तुत दस्तावेजों से यह साबित नहीं होता कि याचिकाकर्ता का दावा प्राथमिक रूप से मजबूत है।
  • जनहित और सार्वजनिक संस्थान की जमीन से अतिक्रमण हटाना आवश्यक है।
  • केवल स्वामित्व का दावा, बिना ठोस सरकारी रिकॉर्ड के, ध्वस्तीकरण रोकने का आधार नहीं बन सकता।

इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

जनता और शहर पर असर

हाईकोर्ट के इस फैसले को रांची शहर में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि—

  • सार्वजनिक संस्थानों की जमीन पर अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • कोर्ट के आदेशों के पालन में प्रशासन को पूरी छूट मिलेगी।

RIMS जैसे बड़े सरकारी अस्पताल के आसपास अवैध निर्माण हटने से भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का रास्ता भी साफ हो सकता है।

याचिका खारिज होने के बाद अब—

  • जिला प्रशासन जल्द ही कैलाश कोठी को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।
  • अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के इंतजाम किए जाएंगे।
  • RIMS परिसर से जुड़े अन्य अतिक्रमणों की भी समीक्षा संभव है।

RIMS DIG ग्राउंड के पास बनी कैलाश कोठी को लेकर चला लंबा कानूनी संघर्ष अब समाप्त हो गया है। हाईकोर्ट के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि सार्वजनिक हित और सरकारी जमीन के मामलों में कानून सख्ती से लागू होगा। आने वाले दिनों में रांची में अतिक्रमण के खिलाफ और भी कड़े कदम देखने को मिल सकते हैं।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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