रांची में बड़ा बदलाव: अब दफ्तरों के चक्कर काटने का खेल खत्म, अंचलों में क्यों उमड़ी भीड़ और क्या है असली वजह?

रांची में बड़ा बदलाव: अब दफ्तरों के चक्कर काटने का खेल खत्म, अंचलों में क्यों उमड़ी भीड़ और क्या है असली वजह?

Ranchi | क्या आप भी अपनी जमीन की रसीद, जाति प्रमाण पत्र या पेंशन के लिए महीनों से सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रहे थे? तो आपके लिए राहत भरी खबर है। रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री के एक कड़े आदेश ने जिले की पूरी प्रशासनिक मशीनरी को जनता के द्वार पर खड़ा कर दिया है। मंगलवार को रांची के विभिन्न अंचलों में जो ‘जनता दरबार’ सजा, उसने न केवल फाइलों की धूल झाड़ी, बल्कि सैकड़ों परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है।

अमूमन हफ्तों तक खिंचने वाले राजस्व और ब्लॉक के काम अब ऑन-द-स्पॉट हो रहे हैं। यह सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि सीधे सिस्टम पर प्रहार है, ताकि आम आदमी को बिचौलियों से मुक्ति मिले।

ग्राउंड रिपोर्ट: सोनाहातु से अरगोड़ा तक, कैसे हुआ ‘ऑन-द-स्पॉट’ फैसला?

रांची के अंचल कार्यालयों—सोनाहातु, राहे, खलारी, मांडर और अरगोड़ा—में आज का मंजर बदला हुआ था। लोग अपनी पुरानी फाइलों के साथ पहुंचे थे और अधिकारी लैपटॉप और रजिस्टरों के साथ समाधान करने बैठे थे।

  • सोनाहातु में बेटियों को मिला अधिकार: मुरुतडीह की तुला देवी और जाहेरडीह की मलिका कुमारी को जब मौके पर ही ‘पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र’ मिला, तो उनकी आँखों में चमक साफ़ दिखी।
  • राहे और अरगोड़ा का स्ट्राइक रेट: राहे अंचल में कुल 71 और अरगोड़ा में रिकॉर्ड 84 आवेदन आए, जिनमें से 75 का निपटारा तो कुछ ही घंटों में कर दिया गया।

पंजी-2 में सुधार और रसीद: अब नहीं चलेगा ‘कल आना’ का बहाना

जमीन से जुड़े विवादों में ‘पंजी-2’ (Register-II) का सुधार सबसे पेचीदा काम माना जाता है। मांडर के कन्दरी निवासी विजेश्वर नंद तिवारी जैसे कई लोग वर्षों से इसके लिए परेशान थे। आज जनता दरबार में न केवल इनका नाम सुधरा, बल्कि दाखिल-खारिज और लगान रसीद जैसी समस्याओं का भी तुरंत निष्पादन हुआ।

इन सेवाओं पर रहा फोकस:

  1. भूमि सुधार: पंजी-2 में नाम सुधार और दाखिल-खारिज।
  2. सर्टिफिकेट्स: आय, जाति, आवासीय और आचरण प्रमाण पत्र।
  3. सामाजिक सुरक्षा: वृद्धावस्था पेंशन और केसीसी (KCC) से जुड़े मामले।

इम्पैक्ट एनालिसिस: आखिर क्यों जरूरी था यह कदम?

झारखंड में अक्सर प्रखंड और अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार और देरी की शिकायतें आती रही हैं। डीसी मंजूनाथ भजन्त्री का यह ‘प्रत्येक मंगलवार जनता दरबार’ मॉडल दरअसल ‘डिजिटल गवर्नेंस’ और ‘ग्राउंड रियलिटी’ के बीच के गैप को भर रहा है। जब बड़े अधिकारी खुद मॉनिटरिंग करते हैं, तो निचले स्तर के कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ जाती है।

“हमारा उद्देश्य है कि जनता को उनके हक के लिए शहर न दौड़ना पड़े। अंचल स्तर पर ही समस्याओं का समाधान होना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।” — जिला प्रशासन, रांची

आगे क्या? सिस्टम में स्थायी बदलाव की आहट

यह जनता दरबार सिर्फ एक दिन का इवेंट नहीं है। यह इशारा है कि अब रांची प्रशासन ‘प्रो-एक्टिव मोड’ में है। आने वाले दिनों में लंबित पड़े म्यूटेशन (Mutation) के मामलों पर गाज गिर सकती है। अगर आपके पास भी कोई पुराना लंबित मामला है, तो अगले मंगलवार की तैयारी अभी से कर लें।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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