फर्जी कॉस्मेटोलॉजिस्ट से सावधान: रांची में IADVL की चेतावनी, गलत स्किन ट्रीटमेंट से बढ़ रहा खतरा

फर्जी कॉस्मेटोलॉजिस्ट से सावधान: रांची में IADVL की चेतावनी, गलत स्किन ट्रीटमेंट से बढ़ रहा खतरा

Ranchi: आज के समय में फर्जी डॉक्टरों से सावधान रहना बेहद जरूरी हो गया है। खासकर त्वचा रोग (स्किन डिजीज़) और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट्स के मामले में, जहां मरीज गलत जानकारी और झूठे दावों की वजह से गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हाल ही में इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता को चेतावनी दी है कि कॉस्मेटोलॉजी कोई मेडिकल स्पेशलाइजेशन नहीं है। फिर भी आज बड़े-बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, फर्जी डॉक्टरों का जाल तेजी से फैल रहा है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि फर्जी डॉक्टरों से सावधान क्यों रहना जरूरी है, ये किस तरह से स्किन मरीजों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, कॉस्मेटोलॉजी और डर्मेटोलॉजी में क्या फर्क है, और असली विशेषज्ञ को कैसे पहचानें।

कॉस्मेटोलॉजी क्या है और क्यों हो रहा है भ्रम?

कॉस्मेटोलॉजी का नाम सुनते ही बहुत से लोग यह मान बैठते हैं कि यह कोई मेडिकल डिग्री है। लेकिन हकीकत यह है कि यह केवल एक ब्यूटी ट्रीटमेंट कोर्स है।

  • इसमें फेशियल, मेकअप, हेयर कट, मैनीक्योर-पेडीक्योर जैसी सेवाएं आती हैं।
  • भारत सरकार के नियम के अनुसार, कोई भी व्यक्ति सिर्फ 10वीं पास करने के बाद कॉस्मेटोलॉजिस्ट बन सकता है।
  • इसका मतलब यह हुआ कि हर कॉस्मेटोलॉजिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं होता।

डॉ. नेहा रानी का कहना है कि मरीज अक्सर भ्रमित हो जाते हैं और सोचते हैं कि कॉस्मेटोलॉजिस्ट भी एमबीबीएस डॉक्टर हैं। नतीजा यह होता है कि लोग अपनी त्वचा और बालों की जिम्मेदारी गलत हाथों में सौंप देते हैं और बाद में गंभीर जटिलताओं का सामना करते हैं।

फर्जी डॉक्टरों का बढ़ता कारोबार

रांची समेत पूरे झारखंड में फर्जी डॉक्टरों से सावधान रहना अब और भी जरूरी हो गया है क्योंकि:

  • जगह-जगह ब्यूटी पार्लर और सैलून में अब लेजर हेयर रिडक्शन, टैटू रिमूवल, बोटॉक्स और फिलर्स जैसे ट्रीटमेंट किए जा रहे हैं।
  • इन प्रक्रियाओं के लिए मेडिकल स्पेशलाइजेशन और लंबे प्रशिक्षण की जरूरत होती है।
  • कई बार अनट्रेंड लोग स्टेरॉयड और हैवी ड्रग्स भी मरीजों को दे देते हैं, जिससे स्किन पर स्थायी नुकसान हो सकता है।

डॉ. कुमार प्रतीक ने बताया कि आजकल लोग टैटू बनवाने के साथ उसी जगह से टैटू हटाने की भी कोशिश कर रहे हैं। यह पूरी तरह से फर्जी इलाज (quackery) की श्रेणी में आता है क्योंकि टैटू हटाना एक गंभीर और तकनीकी प्रक्रिया है जिसे केवल क्वालिफाइड डर्मेटोलॉजिस्ट ही कर सकता है।

फर्जी इलाज के खतरनाक नतीजे

फर्जी डॉक्टरों से सावधान न रहने का खामियाजा कई बार बहुत महंगा पड़ता है।

  • स्टेरॉयड का गलत इस्तेमाल करने से त्वचा पतली और संवेदनशील हो जाती है।
  • गलत इंजेक्शन या फिलर्स से चेहरे का आकार बिगड़ सकता है
  • संक्रमण और खतरनाक स्किन डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है।
  • हाल ही में कानपुर में दो मरीजों की मौत सिर्फ गलत ट्रीटमेंट की वजह से हो गई थी।

डॉ. राज साहु ने चेतावनी दी कि अक्सर फर्जी डॉक्टर बिना जांच के ही खतरनाक दवाइयां लिख देते हैं। मरीजों को लगता है कि वे सही इलाज करवा रहे हैं लेकिन असल में वे जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे होते हैं।

डर्मेटोलॉजिस्ट और कॉस्मेटोलॉजिस्ट में फर्क

बिंदुडर्मेटोलॉजिस्टकॉस्मेटोलॉजिस्ट
योग्यताएमबीबीएस + एमडी/डीएनबी (डर्मेटोलॉजी)सिर्फ 10वीं पास या शॉर्ट-टर्म कोर्स
फोकसस्किन, हेयर, नेल्स की बीमारियों का इलाजब्यूटी और ग्रूमिंग
लाइसेंसमेडिकल काउंसिल से रजिस्टर्डब्यूटी इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन
इलाज करने का अधिकारदवाइयां, लेजर, सर्जरी, मेडिकल प्रोसिजर्सकेवल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट्स

यानी साफ है कि फर्जी डॉक्टरों से सावधान रहने का मतलब है कि आप हमेशा असली डर्मेटोलॉजिस्ट के पास ही जाएं।

कैसे पहचानें असली स्किन स्पेशलिस्ट?

  1. उनकी डिग्री देखें – एमडी, डीएनबी या डिप्लोमा इन डर्मेटोलॉजी।
  2. उनका रजिस्ट्रेशन नंबर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) से वेरिफाई करें।
  3. उनसे जुड़ी सोसाइटी मेंबरशिप जैसे कि IADVL (Indian Association of Dermatologists, Venereologists and Leprologists) चेक करें।
  4. क्लिनिक में दी जा रही सेवाओं को ध्यान से देखें – क्या वे सिर्फ मेडिकल ट्रीटमेंट कर रहे हैं या पार्लर जैसी सेवाएं भी जोड़ रहे हैं?

सरकार और समाज की जिम्मेदारी

डॉ. अम्लान का कहना है कि समाज को जागरूक करना जरूरी है लेकिन एक्शन लेने की जिम्मेदारी सरकार की है

  • अल्टरनेटिव मेडिसिन प्रैक्टिशनर्स (BAMS, BHMS, Unani) अगर एलोपैथिक दवाइयां लिख रहे हैं तो यह गैरकानूनी है।
  • सरकार को चाहिए कि फर्जी डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई करे और ऐसे क्लिनिक बंद कराए।
  • साथ ही, लोगों को जानकारी देने के लिए अवेयरनेस कैंपेन चलाए जाएं।

फर्जी डॉक्टरों से कैसे बचें?

  • किसी भी कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर की डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करें।
  • केवल एमसीआई मान्यता प्राप्त डर्मेटोलॉजिस्ट से ही इलाज कराएं।
  • ब्यूटी पार्लर या सैलून में दिए जा रहे लेजर, फिलर्स और इंजेक्शन ट्रीटमेंट्स से दूरी बनाएं।
  • अगर आपको संदेह है कि कोई डॉक्टर फर्जी है, तो उसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग को करें।

आज की दुनिया में जहां सुंदर दिखना एक चाहत है, वहीं यह चाहत कई बार जिंदगी पर भारी पड़ जाती है। फर्जी डॉक्टरों से सावधान रहना न केवल आपकी त्वचा बल्कि आपकी सेहत और सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। हमेशा याद रखें कि स्किन और हेयर से जुड़े इलाज केवल क्वालिफाइड डर्मेटोलॉजिस्ट से ही कराएं।

कॉस्मेटोलॉजी और डर्मेटोलॉजी में क्या फर्क है?

कॉस्मेटोलॉजी केवल ब्यूटी ट्रीटमेंट से जुड़ा कोर्स है जबकि डर्मेटोलॉजी एक मेडिकल स्पेशलाइजेशन है, जिसे केवल एमबीबीएस + एमडी/डीएनबी करने वाले डॉक्टर ही कर सकते हैं।

फर्जी डॉक्टर को कैसे पहचाना जाए?

फर्जी डॉक्टर के पास मेडिकल डिग्री नहीं होती, उनके पास रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं होता और वे अक्सर पार्लर या सैलून में मेडिकल ट्रीटमेंट्स ऑफर करते हैं।

अगर फर्जी इलाज का शिकार हो जाएं तो क्या करें?

तुरंत किसी क्वालिफाइड डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें और स्वास्थ्य विभाग में शिकायत दर्ज करें ताकि ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई हो सके।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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