Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची में बच्चों को नशे की दलदल से बाहर निकालने और गरीबों को उनके हक दिलाने के लिए एक साथ दो मोर्चों पर जंग शुरू हो गई है। डालसा (DALSA) ने खेलारी और कांके में बड़ी चौपाल लगाकर माता-पिता को आगाह किया है कि अगर अब भी नहीं जागे, तो मासूमों का भविष्य अंधेरे में डूब सकता है। डालसा की टीम ने साफ कहा कि नशा बेचने वाले अब बच्चों के कमजोर दिमाग को निशाना बना रहे हैं।
सावधान! बच्चों के दिमाग पर ‘नशाखोरों’ का हमला, खेलारी में मची खलबली
रांची के खेलारी प्रखण्ड स्थित बुकबुका पंचायत में जब डालसा की टीम ‘डॉन’ योजना के तहत पहुंची, तो वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीण सन्न रह गए। एलएडीसी चीफ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि नशे के सौदागर मासूमों के कच्चे दिमाग का फायदा उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “बच्चे नासमझ होते हैं, इसलिए उन्हें आसानी से नशे की लत में झोंका जा रहा है। अगर हम आज बच्चों को नशे से दूर रहने की शिक्षा नहीं देंगे, तो नशामुक्त भारत का सपना कभी पूरा नहीं होगा।” श्रीवास्तव ने जोर दिया कि जब तक मादक पदार्थों की मांग कम नहीं होगी, तब तक नशाखोरों का नेटवर्क नहीं टूटेगा। इस दौरान पीएलवी रंजना गिरी और उनकी टीम ने सरकार की जनहितकारी योजनाओं का खाका भी ग्रामीणों के सामने रखा।
गौशाला मैदान से हुंकार: “अब घर-घर पहुंचेगा न्याय, कोई नहीं रहेगा वंचित”
दूसरी ओर, कांके के शुकुरहुटु स्थित गौशाला मैदान में न्याय की एक अलग ही अलख जगाई गई। 90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने घोषणा की कि अब न्याय के लिए कोर्ट के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं, बल्कि न्याय खुद जनता के द्वार तक पहुंचेगा।

इन कुरीतियों पर होगा कड़ा प्रहार:
डालसा की टीम ने कांके में मुख्य रूप से तीन सामाजिक कैंसर पर चोट की:
- बाल विवाह: समाज के भविष्य को बचाने की अपील।
- बाल श्रम: मासूमों के हाथों में औजार नहीं, किताब देने की जरूरत।
- डायन बिसाही: अंधविश्वास के नाम पर होने वाली हिंसा के खिलाफ कानूनी डंडा।
राजेश कुमार सिन्हा ने लोगों को नालसा टॉल फ्री नंबर 15100 की शक्ति के बारे में बताया, ताकि कोई भी गरीब कानूनी मदद से महरूम न रहे।
9 मई को लगेगी ‘अदालत’: पुराने झगड़ों और मुकदमों से पाएं मुक्ति
इन दोनों कार्यक्रमों में एक सबसे महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई— 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत। डालसा सचिव श्री राकेश रौशन के नेतृत्व में पीएलवी टीम ने बताया कि जो लोग सालों से मुकदमों के बोझ तले दबे हैं, वे इस दिन उपस्थित होकर आपसी सहमति से अपने मामलों का निपटारा कर सकते हैं। यह न केवल समय बचाएगा बल्कि मानसिक तनाव से भी मुक्ति दिलाएगा।
क्या बदलेगी रांची की तस्वीर?
झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायायुक्त रांची के मार्गदर्शन में चल रहा यह 90 दिनों का अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति की आहट है। अब गेंद जनता के पाले में है— क्या वे जागरूक होकर नशे और अन्याय के खिलाफ इस लड़ाई में डालसा का साथ देंगे?








