Ranchi: झारखंड की राजनीति और आदिवासी समाज को गहरा आघात लगा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता और शिक्षा, साक्षरता एवं निबंधन विभाग के मंत्री रामदास सोरेन का 15 अगस्त 2025 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वे 62 वर्ष के थे और लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे।
दुर्घटना से लेकर अंतिम सांस तक की कहानी
2 अगस्त 2025 को अपने घोड़ाबांधा स्थित आवास के बाथरूम में गिरने से उन्हें सिर में गंभीर चोट लगी थी। इस दौरान ब्रेन हेमरेज हुआ और उन्हें तुरंत एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें लाइफ सपोर्ट पर रखा, लेकिन हालत लगातार नाजुक बनी रही। शुक्रवार को हृदय संबंधी समस्याएं और बढ़ गईं और देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।
राजनीतिक सफर और योगदान
रामदास सोरेन तीन बार घाटशिला विधानसभा से विधायक चुने गए। उन्होंने 2009, 2019 और 2024 में जनता का विश्वास जीता। झारखंड आंदोलन के समय से वे सक्रिय रहे और आदिवासी समाज के बीच उनकी मजबूत पकड़ थी। 2024 में चंपई सोरेन के भाजपा में जाने के बाद उन्हें मंत्री बनाया गया। उनकी सादगी, साफ छवि और जनता के बीच सेवा भाव ने उन्हें खास पहचान दिलाई।
झारखंड में शोक की लहर
उनके निधन के बाद पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थक और स्थानीय लोग उनके जनसेवा के कार्यों और सादगी को याद कर रहे हैं। झारखंड आंदोलन के योद्धा के रूप में उनकी पहचान हमेशा कायम रहेगी।
नेताओं की भावुक प्रतिक्रियाएं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए लिखा, “ऐसे छोड़कर नहीं जाना था रामदास दा… अंतिम जोहार दादा…”। उन्होंने इसे राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि उनका जाना राज्य के लिए बड़ी क्षति है और उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने उन्हें झारखंड आंदोलन का साथी बताते हुए श्रद्धांजलि दी। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने बाबा बैद्यनाथ से प्रार्थना की कि उनकी आत्मा को शांति मिले। भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने कहा कि ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
झामुमो और भाजपा नेताओं की संवेदनाएं
झामुमो प्रवक्ता कुणाल सारंगी ने कहा कि रामदास सोरेन का जाना पार्टी और राज्य के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इसे झारखंड आंदोलन के एक स्तंभ का अंत बताया। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि राज्य उनके योगदान को कभी नहीं भूलेगा। विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने इसे दोहरी और असहनीय क्षति कहा।
परिवार और समर्थकों का दुख
रामदास सोरेन के बेटे ने सोशल मीडिया पर पिता के निधन की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, “अत्यंत दुख के साथ बता रहा हूं कि मेरे पिताजी अब हमारे बीच नहीं रहे।” इस संदेश के बाद समर्थक और शुभचिंतक शोक संतप्त हो उठे।
हमेशा याद रखे जाएंगे रामदास सोरेन
रामदास सोरेन की सादगी, शिक्षा सुधारों और समाज सेवा को लोग लंबे समय तक याद करेंगे। झारखंड आंदोलन से लेकर मंत्री पद तक उनकी यात्रा संघर्ष और सेवा की मिसाल रही। उनका निधन न सिर्फ राजनीतिक बल्कि सामाजिक रूप से भी झारखंड के लिए बड़ी क्षति है।







