चाईबासा अदालत में पेश होंगे राहुल गांधी, मानहानि केस में सुनवाई आज

Subhash Shekhar
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Ranchi: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मंगलवार को चाईबासा की ओर रवाना हुए। वे 2018 के उस बहुचर्चित मानहानि मामले में पेश होने जा रहे हैं, जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

यह मामला चाईबासा स्थित एमपी-एमएलए विशेष अदालत में चल रहा है। राहुल गांधी की इस पेशी को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं, वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी हलचल तेज हो गई है।

अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी बना विवाद का कारण

यह मामला वर्ष 2018 का है, जब एक जनसभा के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कथित तौर पर ऐसा बयान दिया था जो गृह मंत्री अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचाता है।

उनके इस बयान पर भाजपा समर्थक और एक स्थानीय वकील ने चाईबासा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद न्यायालय ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित की थी।

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राहुल गांधी की कोर्ट पेशी से पहले कांग्रेस में हलचल

राहुल गांधी के चाईबासा आगमन को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। पार्टी कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अनुशासन बनाए रखें और राहुल गांधी के कार्यक्रम को सफल बनाएं।

वहीं रांची से चाईबासा तक सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। चाईबासा कोर्ट परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर दी गई है।

राहुल की रणनीति या कानूनी मजबूरी?

विशेषज्ञ मानते हैं कि राहुल गांधी का अदालत में स्वेच्छा से पेश होना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। इससे कांग्रेस अपने नेता को “कानून का पालन करने वाला जिम्मेदार नेता” के रूप में प्रस्तुत कर सकती है।

इससे पहले भी राहुल गांधी मानहानि के मामलों में अलग-अलग राज्यों की अदालतों में पेश होते रहे हैं। इससे वे एक नैतिक दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश करते हैं, जो उनके समर्थकों को प्रभावित करता है।

भाजपा की प्रतिक्रिया, कांग्रेस का पलटवार

भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के पुराने बयानों को गैर-जिम्मेदाराना बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को पहले अपने शब्दों पर सोच समझकर बोलना चाहिए।

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राहुल गांधी की चाईबासा अदालत में पेशी न सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी गहरे हैं। झारखंड की जमीन एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बनती दिख रही है, जहां कानून, राजनीति और जनभावनाएं तीनों एक साथ टकरा रही हैं।

आने वाले समय में यह देखा जाना बाकी है कि इस मामले का परिणाम क्या होता है और इसका आगामी विधानसभा चुनावों पर क्या असर पड़ता है।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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