Chaibasa: झारखंड के चाईबासा में बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक पुराने मानहानि केस में राहत मिली। चाईबासा की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने उनकी पेशी के बाद उन्हें जमानत दे दी। यह मामला साल 2018 में दिए गए उनके एक बयान से जुड़ा है, जो उन्होंने कांग्रेस अधिवेशन के दौरान दिया था।
राहुल गांधी पर यह आरोप है कि उन्होंने 28 मार्च 2018 को बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कथित विवादित टिप्पणी की थी। इस बयान को लेकर बीजेपी नेता प्रताप कटिहार ने 9 जुलाई 2018 को चाईबासा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) कोर्ट में मानहानि का केस दर्ज कराया था।
हाई कोर्ट के आदेश पर कोर्ट में पेश हुए राहुल गांधी
राहुल गांधी के वकील ने बताया कि झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर राहुल गांधी बुधवार को चाईबासा पहुंचे। उन्होंने सुप्रिया रानी तिग्गा की कोर्ट में सशरीर हाजिरी दी। कुछ ही मिनटों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। वकील ने कहा कि कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार अब केस की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।
इस केस की सुनवाई पहले रांची में हो रही थी, क्योंकि उस वक्त चाईबासा में एमपी-एमएलए कोर्ट नहीं थी। लेकिन 2021 में यह केस ट्रांसफर होकर चाईबासा की विशेष अदालत में पहुंचा। इसके बाद राहुल गांधी की ओर से भारतीय दंड संहिता की धारा 205 के तहत एक याचिका दायर की गई थी।
इस याचिका के आधार पर हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद राहुल गांधी ने कोर्ट में पेश होकर जमानत हासिल की। कोर्ट ने बिना किसी आपत्ति के उनकी जमानत को स्वीकार कर लिया।
सियासी हलकों में हलचल, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
राहुल गांधी की पेशी और कोर्ट से मिली जमानत के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे न्याय की जीत बताया, वहीं बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि यह केस राजनीतिक द्वेष के तहत किया गया था। वहीं, बीजेपी नेताओं ने दोहराया कि अगर कोई भी नेता संविधान और कानून से ऊपर समझेगा, तो जनता और अदालत जवाब देगी।
राहुल गांधी के लिए यह मामला ऐसे समय पर सामने आया है, जब देश में विपक्षी एकता की कोशिशें तेज हो रही हैं। उनकी चाईबासा पेशी को कई राजनीतिक विश्लेषकों ने विपक्ष को निशाना बनाने की रणनीति से भी जोड़ा है।
पुराने बयानों से अब भी मिल रही चुनौती
राहुल गांधी के खिलाफ यह मामला भले ही छह साल पुराना हो, लेकिन यह दिखाता है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयानों का असर कितना दूरगामी हो सकता है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत अब अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी, और यह देखा जाएगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल कांग्रेस नेता को चाईबासा कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।










