नई दिल्ली | पश्चिम एशिया (West Asia) में उपजे तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के सभी मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के साथ एक हाई-लेवल इमरजेंसी मीटिंग की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में पीएम ने साफ कर दिया कि भारत किसी भी वैश्विक व्यवधान (Global Disruption) से निपटने के लिए तैयार है। पीएम ने राज्यों को ‘होर्डिंग’ (जमाखोरी) के खिलाफ सख्त एक्शन लेने और ‘सप्लाई चेन’ को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।
3 मार्च से ही एक्टिव है इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने बैठक में बताया कि केंद्र सरकार इस संकट को लेकर 3 मार्च से ही अलर्ट पर है और एक ‘इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप’ हर दिन स्थिति की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार की पहली प्राथमिकता देश की आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना है। पीएम ने कहा, “हमारे पास कोविड-19 जैसे बड़े संकट से निपटने का अनुभव है, और ‘टीम इंडिया’ के जज्बे से हम इस चुनौती को भी पार कर लेंगे।”
राज्यों के लिए ‘स्पेशल एडवाइजरी’: क्या होंगे अगले कदम?
पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों को जमीनी स्तर पर मुस्तैद रहने के लिए 5 बड़े मंत्र दिए हैं:
- सप्लाई चेन और जमाखोरी पर लगाम: राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे जरूरी सामानों की कीमतों पर नजर रखें। मुनाफाखोरों और जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि आम आदमी की जेब पर असर न पड़े।
- खेती और खाद (Fertiliser) का संकट न हो: खरीफ सीजन आने वाला है, ऐसे में खाद के स्टॉक और वितरण की एडवांस प्लानिंग करने को कहा गया है ताकि किसानों को परेशानी न हो।
- अफवाहों पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’: पीएम ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक खबरों और ऑनलाइन फ्रॉड से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सही और सटीक जानकारी ही जनता के बीच डर (Panic) को रोक सकती है।
- तटीय और सीमावर्ती राज्यों को अलर्ट: समुद्री व्यापार और शिपिंग से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए बॉर्डर और कोस्टल स्टेट्स को विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
- विदेश में फंसे भारतीयों की मदद: जिन राज्यों के लोग पश्चिम एशिया में हैं, उन्हें तुरंत हेल्पलाइन नंबर जारी करने और जिला स्तर पर नोडल ऑफिसर तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।
आम आदमी को राहत: पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटी
बैठक के दौरान एक बड़ी राहत की खबर भी सामने आई। केंद्र सरकार ने वैश्विक अस्थिरता के बावजूद आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) कम करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, राज्यों को दिए जाने वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) कोटे को भी 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया गया है।
सभी मुख्यमंत्रियों ने केंद्र के इस कदम का स्वागत किया और पुष्टि की कि उनके राज्यों में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है।
भविष्य की तैयारी: तेल के लिए विकल्प की तलाश
पीएम मोदी ने केवल तात्कालिक समाधान ही नहीं, बल्कि दूरगामी सोच पर भी जोर दिया। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे बायोफ्यूल, सोलर एनर्जी, गोबरधन योजना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की रफ्तार बढ़ाएं। घरेलू तेल और गैस की खोज (Exploration) में तेजी लाने के लिए भी राज्यों से सहयोग मांगा गया है।










