Ranchi | झारखंड के लाखों अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से लंबित छात्रवृत्ति की बकाया राशि जल्द ही छात्रों के बैंक खातों में ट्रांसफर होने की उम्मीद है। कल्याण मंत्री चमरा लिंडा की केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले से मुलाकात के बाद इस दिशा में ठोस पहल हुई है।
पूरी खबर विस्तार से
झारखंड में SC और OBC वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति पिछले ढाई वर्षों से लंबित है। इस कारण हजारों छात्रों की पढ़ाई, रहन-सहन और भविष्य गंभीर संकट में फंस गया था। राज्य सरकार लगातार केंद्र से लंबित केंद्रांश की मांग कर रही थी।
16 दिसंबर को कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने नई दिल्ली में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री रामदास आठवले से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस दौरान छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से रखा गया।
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने मामले को गंभीर बताते हुए विभागीय सचिव को फोन पर निर्देश दिया कि बकाया राशि से जुड़े मुद्दे को शीघ्र सुलझाया जाए। इस पहल के बाद छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं।
छात्रवृत्ति संकट की पृष्ठभूमि
SC और OBC वर्ग के प्री-मैट्रिक (9वीं-10वीं) और पोस्ट-मैट्रिक छात्रों को वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए पूरा केंद्रांश नहीं मिल पाया। इसी कारण राज्य सरकार छात्रवृत्ति का भुगतान समय पर नहीं कर सकी।
कल्याण मंत्री ने ज्ञापन में यह भी बताया कि प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति को लेकर 21 अक्टूबर 2024 और 11 जून 2025 को केंद्र को पत्र भेजे गए थे। वहीं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 29 दिसंबर 2023, 5 जुलाई 2024 और 18 जुलाई 2025 को पत्राचार किया गया।
इसके बावजूद अपेक्षित राशि नहीं मिलने से पूरा सिस्टम प्रभावित रहा और छात्र लगातार आंदोलन करते रहे।
केंद्रांश में कमी के आंकड़े
राज्य सरकार द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार—
पोस्ट-मैट्रिक OBC छात्रवृत्ति:
- 2023-24: ₹271.37 करोड़ की मांग, प्राप्त ₹77.31 करोड़
- 2024-25: ₹253.21 करोड़ की मांग, प्राप्त ₹33.57 करोड़
- 2025-26: ₹370.17 करोड़ की मांग, प्राप्त शून्य
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति:
- 2023-24: ₹67.88 करोड़ की मांग, प्राप्त ₹7.35 करोड़
- 2024-25: ₹66.14 करोड़ की मांग, प्राप्त ₹11.61 करोड़
- 2025-26: ₹45.91 करोड़ की मांग, प्राप्त ₹3.95 करोड़
राज्य सरकार का कहना है कि केंद्रांश की भारी कमी के कारण ही भुगतान में देरी हुई।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं
सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने केंद्र सरकार पर ‘सौतेलापन’ बरतने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि राज्य की मांग के अनुरूप राशि नहीं मिलने से छात्रवृत्ति व्यवस्था चरमरा गई।
वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण छात्र दो वर्षों से छात्रवृत्ति से वंचित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई छात्र होटल में बर्तन धोने, डिलीवरी बॉय का काम करने या कर्ज लेकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
छात्रों और समाज पर असर
छात्रवृत्ति में देरी का सबसे गहरा असर गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों पर पड़ा है। रांची सहित राज्य के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र फीस, हॉस्टल और पढ़ाई का खर्च छात्रवृत्ति के भरोसे ही चलाते हैं।
समय पर पैसा नहीं मिलने से कई छात्र कॉलेज फीस जमा नहीं कर पाए। कुछ को हॉस्टल छोड़ने का खतरा झेलना पड़ा। कई छात्र मजबूरी में काम करने लगे, जबकि कुछ ने पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया।
अनुमान के मुताबिक, झारखंड में हर साल 6 लाख से अधिक छात्रवृत्ति आवेदन होते हैं। इनमें से आधे से अधिक OBC वर्ग के होते हैं। करीब 1 लाख छात्रों को 2023-24 और लगभग 3 लाख छात्रों को 2024-25 की छात्रवृत्ति अब तक नहीं मिली।
आगे क्या?
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले की मुलाकात के बाद विभागीय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। केंद्रीय स्तर से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद बकाया राशि जारी होने की संभावना मजबूत हुई है।
यदि राशि जल्द जारी होती है, तो लाखों छात्रों को राहत मिलेगी। इससे न केवल उनकी रुकी हुई पढ़ाई पटरी पर लौटेगी, बल्कि उन्हें कर्ज और मजबूरी में किए जा रहे कामों से भी मुक्ति मिलेगी।
Conclusion
झारखंड में SC और OBC छात्रों की छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके भविष्य की बुनियाद है। केंद्र और राज्य के बीच समन्वय से यदि यह राशि जल्द जारी होती है, तो यह लाखों छात्रों के लिए नए साल का सबसे बड़ा तोहफा साबित हो सकता है।











