वायरल वीडियो के बाद सरकार का बड़ा फैसला: अब हर जिले में चलेंगे ‘मोक्ष वाहन’, 15 करोड़ की मंज़ूरी!

वायरल वीडियो के बाद सरकार का बड़ा फैसला: अब हर जिले में चलेंगे 'मोक्ष वाहन', 15 करोड़ की मंज़ूरी!

Ranchi। राज्य के सभी जिला सदर अस्पतालों में चार-चार मोक्ष वाहन (शव वाहन) उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने विभाग को एक माह के भीतर वाहन क्रय प्रक्रिया पूरी करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। इस योजना पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, ताकि किसी भी परिवार को दुख की घड़ी में अमानवीय हालात का सामना न करना पड़े।

स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिलों में शव वाहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। मंत्री के निर्देशानुसार हर सदर अस्पताल को चार मोक्ष वाहन मिलेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पतालों से शव ले जाने में किसी प्रकार की असुविधा या अपमानजनक स्थिति न बने।

मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था गरीब, दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए राहतकारी होगी। अक्सर संसाधनों की कमी के कारण परिजनों को शव ले जाने में कठिनाई होती है, जिसे अब पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।

चाईबासा की घटना के बाद फैसला

यह निर्णय चाईबासा में सामने आई एक घटना के बाद लिया गया, जहां एक पिता को अपने बच्चे का शव थैले में ले जाते हुए देखा गया। इस घटना ने राज्यभर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।

हालांकि मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मामले को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में कई तथ्यों का खुलासा हुआ है, जिन्हें सार्वजनिक करना जरूरी था।

जांच रिपोर्ट में क्या आया सामने

जांच रिपोर्ट के अनुसार मृत बच्चा चार माह का था, जबकि सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक बयानों में उसे चार वर्ष का बताया गया। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि परिजनों ने स्वयं शव लेकर जाने का निर्णय लिया और एंबुलेंस का इंतजार नहीं किया।

मंत्री ने कहा कि तथ्य सामने आने के बावजूद कुछ तत्वों ने स्वास्थ्य विभाग की छवि खराब करने की कोशिश की, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

एंबुलेंस और मोक्ष वाहन को लेकर स्पष्टता

स्वास्थ्य मंत्री ने 108 एंबुलेंस और मोक्ष वाहन के उपयोग को लेकर भी स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि 108 एंबुलेंस का उपयोग मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए होता है, जबकि शवों के परिवहन के लिए अलग से मोक्ष वाहन संचालित किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों सेवाओं को मिलाकर देखना गलत है और इससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

दो शव वाहन थे उपलब्ध, लेकिन समस्या आई

जांच में यह भी स्वीकार किया गया कि संबंधित अस्पताल में दो शव वाहन मौजूद थे। इनमें से एक खराब था, जबकि दूसरा किसी अन्य स्थान पर गया हुआ था और लौटने वाला था। इसी अंतराल में परिजनों ने शव स्वयं ले जाने का फैसला किया।

मंत्री ने रिपोर्ट के आधार पर इस स्थिति को स्वीकार किया और कहा कि भविष्य में ऐसी परिस्थिति दोबारा न आए, इसके लिए ही नए मोक्ष वाहन खरीदे जा रहे हैं।

सरकार और विभाग की प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक कहा कि कुछ राजनीतिक दल और असामाजिक तत्व इस घटना को आधार बनाकर भ्रम फैला रहे हैं। विभाग ने पूरी पारदर्शिता के साथ जांच कराई और रिपोर्ट सार्वजनिक की।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार संवेदनशील मामलों को गंभीरता से लेती है और व्यवस्थागत सुधार के लिए त्वरित निर्णय लेती है।

इस फैसले से खासकर गरीब और ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। शव वाहन की उपलब्धता बढ़ने से अस्पतालों पर भरोसा मजबूत होगा और मानवीय गरिमा बनी रहेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बहाली की दिशा में अहम साबित होगा।

स्वास्थ्य विभाग को एक माह के भीतर खरीद प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद जिलों में चरणबद्ध तरीके से मोक्ष वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग स्तर पर निगरानी तंत्र भी मजबूत किया जाएगा, ताकि किसी भी जिले में लापरवाही न हो।

सदर अस्पतालों में चार-चार मोक्ष वाहन उपलब्ध कराने का निर्णय राज्य सरकार की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई को दर्शाता है। इससे न केवल व्यवस्थागत खामियां दूर होंगी, बल्कि आम लोगों को सम्मानजनक सुविधा भी सुनिश्चित होगी।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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